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पंजाब के कैंसर अस्पताल में बड़ा खुलासा: 1,000 परिवारों की जांच में करीब 30% में वंशानुगत कैंसर से जुड़े जेनेटिक बदलाव

स्तन और ओवेरियन कैंसर से संबंधित थे लगभग 95% पहचाने गए आनुवंशिक बदलाव; होमी भाभा कैंसर अस्पताल ने शुरू की थी जनवरी 2025 में कैंसर जेनेटिक्स क्लिनिक

न्यू चंडीगढ़ / सत्ता संदेश,

दिनांक : 14 अक्टूबर 2026

कैंसर के बढ़ते जोखिम की समय रहते पहचान और रोकथाम की दिशा में होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (HBCH&RC), न्यू चंडीगढ़ से महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। अस्पताल की कैंसर जेनेटिक्स क्लिनिक में मूल्यांकन किए गए उत्तर भारत के 1,000 परिवारों में से लगभग 30 प्रतिशत परिवारों में ऐसे आनुवंशिक बदलाव पाए गए हैं, जो वंशानुगत कैंसर के बढ़ते जोखिम से जुड़े हो सकते हैं। अस्पताल के अनुसार, पहचाने गए आनुवंशिक बदलावों में लगभग 95 प्रतिशत स्तन और डिम्बग्रंथि (ओवेरियन) कैंसर से संबंधित थे।

अस्पताल की समर्पित कैंसर जेनेटिक्स क्लिनिक जनवरी 2025 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य उन लोगों की पहचान करना है, जिनमें कैंसर होने का आनुवंशिक जोखिम मौजूद हो सकता है, ताकि जरूरत के अनुसार समय रहते जांच, निगरानी और रोकथाम की योजना बनाई जा सके।

912 मरीजों की जेनेटिक जांच, 132 परिजनों का भी मूल्यांकन

अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक, क्लिनिक में परामर्श के लिए आए 1,000 परिवारों में से 912 कैंसर-प्रभावित प्राथमिक मरीजों की आनुवंशिक जांच की गई। इन मरीजों को ‘इंडेक्स पेशेंट’ कहा जाता है, जिनकी जांच से परिवार में संभावित वंशानुगत कैंसर जोखिम का पता लगाने में मदद मिलती है।

जांच में लगभग 30 प्रतिशत की दर से कैंसर जोखिम से जुड़े आनुवंशिक बदलाव सामने आए। इसके अलावा, जोखिम की आशंका वाले 132 रक्त-संबंधियों—जैसे माता-पिता, भाई-बहन और बच्चों—की भी जांच की गई। इससे परिवार के अन्य सदस्यों में संभावित जोखिम की पहचान करने और जरूरत के अनुसार स्क्रीनिंग तथा नियमित फॉलो-अप की योजना बनाने में मदद मिली।

क्या होते हैं वंशानुगत कैंसर से जुड़े जेनेटिक बदलाव?

आनुवंशिक बदलाव DNA या आनुवंशिक कोड में होने वाले परिवर्तन हैं। इनमें से कुछ बदलाव व्यक्ति में विशेष प्रकार के कैंसर का जोखिम बढ़ा सकते हैं। हालांकि, किसी जोखिम-संबंधी आनुवंशिक बदलाव का मिलना यह निश्चित नहीं करता कि व्यक्ति को भविष्य में कैंसर होगा ही।

अस्पताल के निदेशक डॉ. आशीष गुलिया के अनुसार, आनुवंशिक जांच आमतौर पर रक्त के नमूने से की जाती है। चिकित्सकीय जरूरत के आधार पर 26 से 84 जीनों की जांच की जा सकती है। इसके परिणामों से डॉक्टरों को मरीज के लिए उपचार, अधिक निगरानी और जोखिम कम करने के संभावित उपायों के संबंध में निर्णय लेने में सहायता मिलती है।

उन्होंने बताया कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर कुछ मरीजों के लिए व्यक्तिगत उपचार योजना, नियमित स्क्रीनिंग और विशेष परिस्थितियों में जोखिम कम करने वाली सर्जरी पर विचार किया जा सकता है। इससे ऐसे परिजनों की पहचान करने में भी मदद मिलती है, जिन्हें आनुवंशिक जांच या अतिरिक्त निगरानी की जरूरत हो सकती है।

किन लोगों को आनुवंशिक परामर्श पर विचार करना चाहिए?

डॉ. गुलिया के अनुसार, यदि परिवार में कई लोगों को कैंसर हुआ हो, खासकर एक जैसे या आपस में संबंधित प्रकार के कैंसर, तो आनुवंशिक परामर्श उपयोगी हो सकता है। कम उम्र में कैंसर होना, दोनों स्तनों में कैंसर विकसित होना, अलग-अलग अंगों में एक से अधिक प्राथमिक कैंसर होना या कुछ वंशानुगत कैंसर सिंड्रोम के संकेत मिलना भी चिकित्सकीय मूल्यांकन का आधार हो सकता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवार में कैंसर का इतिहास न होने पर भी किसी व्यक्ति में आनुवंशिक जोखिम मौजूद हो सकता है। स्तन, डिम्बग्रंथि, जठरांत्र संबंधी और प्रोस्टेट कैंसर सहित कुछ कैंसरों के मामलों में मरीज के चिकित्सकीय इतिहास और पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर आनुवंशिक परामर्श की सलाह दी जा सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आनुवंशिक जोखिम का पता चलने पर उचित चिकित्सकीय मार्गदर्शन के साथ निगरानी और रोकथाम की योजना बनाई जा सकती है। हालांकि, जांच कराने या किसी निवारक प्रक्रिया का निर्णय विशेषज्ञ की सलाह और व्यक्तिगत जोखिम के आकलन के आधार पर ही लिया जाना चाहिए।

संगरूर केंद्र में भी शुरू हुई कैंसर जेनेटिक्स क्लिनिक

HBCH&RC पंजाब ने अपने संगरूर केंद्र में भी कैंसर जेनेटिक्स क्लिनिक शुरू की है। अस्पताल में ही आनुवंशिक जांच की सुविधा स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। फिलहाल जांच के लिए नमूने टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई भेजे जाते हैं।

क्लिनिक का संचालन जेनेटिक काउंसलर हाशिमे इस्माइल, रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. प्रग्यात ठाकुर और मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. सीमा गुलिया की देखरेख में किया जा रहा है।

होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र, पंजाब, परमाणु ऊर्जा विभाग, भारत सरकार के अंतर्गत संचालित टाटा मेमोरियल सेंटर की एक इकाई है। अस्पताल की यह पहल कैंसर के संभावित वंशानुगत जोखिम की पहचान, परिवारों को परामर्श और समय रहते चिकित्सकीय योजना बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

SIR पर सुनील जाखड़ का AAP-कांग्रेस पर निशाना, बोले- पंजाब की फाइनल वोटर लिस्ट में नहीं आई कोई परेशानी

अनिंदिता मित्रा से मुलाकात के बाद जाखड़ ने उठाए सवाल; हरपाल चीमा और भगवंत मान के विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़ों का किया जिक्र, प्रगट सिंह ने फॉर्म-6 पर मांगा जवाब

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने मुख्य चुनाव अधिकारी अनिंदिता मित्रा से मुलाकात के बाद मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं पर निशाना साधा। जाखड़ ने कहा कि देश के कुछ हिस्सों में SIR को लेकर विरोध और हंगामा हो रहा है, लेकिन पंजाब में अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद किसी बड़ी परेशानी की बात सामने नहीं आई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पंजाब में प्रक्रिया को लेकर स्थिति सामान्य रही, तो दूसरे राज्यों में इसे लेकर इतना विवाद क्यों हो रहा है।

गौरतलब है कि पंजाब की अंतिम मतदाता सूची 12 अक्टूबर 2026 को जारी की गई। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, सूची में कुल 2,01,00,727 मतदाता दर्ज हैं। SIR से पहले दर्ज मतदाताओं की तुलना में अंतिम सूची में करीब 13.60 लाख की कमी आई है, जबकि अगस्त में जारी ड्राफ्ट सूची के मुकाबले अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। <Cite refs={[“turn557186search6″,”turn557186search9”]}/>

हरपाल चीमा और भगवंत मान के क्षेत्रों के आंकड़ों का किया जिक्र

सुनील जाखड़ ने अपने बयान में वित्त मंत्री हरपाल चीमा और मुख्यमंत्री भगवंत मान के विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में हुई कमी का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि हरपाल चीमा के क्षेत्र में करीब 1.83 लाख मतदाताओं में से लगभग 3,000 नाम कम हुए, जबकि भगवंत मान के क्षेत्र में 1.57 लाख के आसपास मतदाताओं में से करीब 5,000 नाम कम हुए।

जाखड़ ने कांग्रेस नेताओं के विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़ों का भी जिक्र किया और कहा कि इन आंकड़ों को सामने रखकर स्थिति को समझना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रगट सिंह पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कांग्रेस को ऐसा अध्यक्ष मिला है, जो किसी मुद्दे पर समझौता नहीं करता। साथ ही उन्होंने नेताओं से चुनावी प्रक्रिया को लेकर लोगों को गुमराह नहीं करने और व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने से पहले तथ्यों को देखने की अपील की।

नोट: विधानसभा क्षेत्रों से संबंधित आंकड़े सुनील जाखड़ के बयान के अनुसार हैं; इनका स्वतंत्र निर्वाचन क्षेत्रवार सत्यापन उपलब्ध जानकारी में नहीं किया गया है।

फॉर्म-6 को लेकर प्रगट सिंह ने उठाए सवाल

SIR प्रक्रिया और फॉर्म-6 को लेकर कांग्रेस नेता प्रगट सिंह ने कहा कि यदि किसी को फॉर्म-6 से संबंधित कोई समस्या है, तो उसे तथ्यों और उचित प्रक्रिया के आधार पर उठाना चाहिए, न कि केवल हंगामा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई वास्तविक परेशानी थी, तो संबंधित स्तर पर उस पर सवाल उठाए जाने चाहिए थे।

जाखड़ ने प्रगट सिंह को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें अपने आसपास मौजूद ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिए, जो उनके मुताबिक उन्हें गलत दिशा में ले जा सकते हैं। दोनों नेताओं की टिप्पणियों के बीच मतदाता सूची के पुनरीक्षण और उसके आंकड़ों को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।

नशे के मामले में पिस्टल लाइसेंस पर उठाया सवाल

पंजाब में नशे के मुद्दे पर बोलते हुए सुनील जाखड़ ने एक व्यक्ति के खिलाफ नशे से संबंधित मामले होने के बावजूद उसके पास पिस्टल का लाइसेंस होने पर सवाल उठाया। उन्होंने इसे हैरानी की बात बताया और कहा कि ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

जाखड़ ने एक ड्रग इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि उसके बाद आगे की कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, इस संबंध में उन्होंने जिस मामले का जिक्र किया, उसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।

मोहाली SSP को ED के पत्र पर सरकार को घेरा

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को पत्र लिखकर मामला दर्ज करने की मांग किए जाने के सवाल पर जाखड़ ने पंजाब सरकार की आलोचना की। उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे “महाबेईमान सरकार” कहा।

यह जाखड़ की राजनीतिक टिप्पणी है। ED के पत्र, उसमें उल्लिखित आरोपों और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों या अधिकारियों का पक्ष जरूरी है।

परमिंदर झोटा हत्याकांड में बड़ी कार्रवाई: आरोपी अश्वनी कुमार का घर गिराया, राजस्थान के सालासर से गिरफ्तारी

मानसा / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : बिट्टू बुढलाडा

पंजाब के मानसा में परमिंदर सिंह झोटा हत्याकांड को लेकर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में आरोपी बताए जा रहे मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार के घर को प्रशासन ने गिरा दिया। वहीं, पुलिस ने राजस्थान के सालासर में दबिश देकर अश्वनी कुमार को गिरफ्तार करने की जानकारी दी है। घर गिराने की कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा, ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके।

भारी पुलिस बल की मौजूदगी में गिराया गया मकान

जानकारी के अनुसार, परमिंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में कार्रवाई करते हुए प्रशासन की टीम मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार के घर पहुंची। वहां प्रशासन की मौजूदगी में मकान गिराने की कार्रवाई की गई। सुरक्षा के मद्देनजर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।

हालांकि, मकान गिराने के पीछे प्रशासन की ओर से बताए गए आधिकारिक कारणों और कार्रवाई के कानूनी आधार की विस्तृत जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।

नशे के खिलाफ आवाज उठाने को लेकर चर्चा में थे झोटा

परमिंदर सिंह झोटा नशे के खिलाफ आवाज उठाने और अपनी गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहते थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वह एक मेडिकल स्टोर पर पहुंचे थे, जहां कथित तौर पर अवैध दवाइयों की बिक्री को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसी दौरान विवाद बढ़ने पर गोली चलने की घटना सामने आई।

झोटा को घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में उनकी मौत हो गई। घटना के बाद मानसा में लोगों में आक्रोश देखने को मिला और मामले में आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा पीड़ित को न्याय दिलाने की मांग उठी।

गिरफ्तारी के बाद जांच पर टिकी नजरें

पुलिस की ओर से राजस्थान के सालासर में दबिश देकर अश्वनी कुमार को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब मामले में आगे की पुलिस जांच, आरोपों से जुड़े साक्ष्यों और कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।

प्रशासन की ओर से मकान गिराने की कार्रवाई के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही इसके आधार और प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।