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परगट सिंह के पंजाब कांग्रेस प्रधान बनने पर परिवार और समर्थकों में खुशी, 2027 को लेकर जताया भरोसा

जालंधर / सत्ता संदेश

परगट सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनके परिवार और समर्थकों में खुशी का माहौल है। कांग्रेस ने 2 अक्टूबर को पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस की कमान सौंपी। उन्होंने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह यह जिम्मेदारी संभाली है।

परगट सिंह के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद उनकी पत्नी वरिंदर प्रीत कौर ने खुशी जाहिर करते हुए कांग्रेस हाईकमान के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि परगट सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस की जिम्मेदारी देना पार्टी का अच्छा फैसला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी अगुवाई में कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनाव में मजबूती से चुनाव लड़ेगी। इस दौरान उन्होंने समर्थकों और सभी शुभचिंतकों का धन्यवाद भी किया।

वहीं, वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. नवजोत दहिया ने परगट सिंह को पार्टी का वरिष्ठ नेता बताते हुए कहा कि उन्हें कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने का अनुभव है। उन्होंने कहा कि परगट सिंह के नेतृत्व में पार्टी संगठन को मजबूती देने पर जोर रहेगा।

डॉ. नवजोत दहिया ने आम आदमी पार्टी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार के कामकाज में दिल्ली के नेताओं का प्रभाव है। उन्होंने कहा कि जनता राजनीतिक दलों के कामकाज को देख रही है और 2027 के विधानसभा चुनाव में अपना फैसला सुनाएगी।

परगट सिंह की नियुक्ति पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के ऐसे समय हुई है, जब विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। कांग्रेस की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार परगट सिंह को तत्काल प्रभाव से पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

अब नई जिम्मेदारी के साथ परगट सिंह के सामने पार्टी संगठन को सक्रिय करने और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की तैयारियों को आगे बढ़ाने की चुनौती रहेगी।

लुधियाना दक्षिण : विकास को नई गति, विधायक राजिंदरपाल कौर छिना ने तीन जगह आरएमसी सड़कों का किया उद्घाटन

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में सड़क निर्माण से जुड़े विकास कार्यों को गति देते हुए विधायक राजिंदरपाल कौर छिना ने वार्ड नंबर 33 के अंतर्गत तीन अलग-अलग स्थानों पर आरएमसी (RMC) सड़क निर्माण कार्यों का उद्घाटन किया।

विधायक छिना ने हरगोबिंद नगर स्ट्रीट नंबर 10, करमजीत नगर और सुखदेव नगर स्ट्रीट नंबर 8 में सड़क निर्माण कार्यों की शुरुआत करवाई। इस दौरान स्थानीय निवासियों ने विधायक का आभार जताते हुए कहा कि लंबे समय से लंबित सड़क निर्माण की मांग अब पूरी हो रही है।

हरगोबिंद नगर की गली नंबर 10 के निवासियों के अनुसार, इस सड़क का निर्माण करीब 10 से 15 वर्षों से नहीं हुआ था। वहीं, करमजीत नगर के लोग भी लगभग 15 वर्षों से नई सड़क का इंतजार कर रहे थे। टूटी सड़कों के कारण लोगों को रोजाना आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता था। आरएमसी सड़क निर्माण शुरू होने से अब क्षेत्रवासियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

वहीं, सुखदेव नगर स्ट्रीट नंबर 8 में पिछली सरकार के समय अधूरे छोड़े गए सड़क निर्माण कार्य को भी दोबारा शुरू किया गया है। यहां आरएमसी तकनीक के माध्यम से सड़क का निर्माण किया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान राजिंदर शर्मा और उनकी पूरी टीम के अलावा बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी मौजूद रहे।

विधायक राजिंदरपाल कौर छिना ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि लुधियाना दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक वार्ड में बिना किसी भेदभाव के विकास कार्य करवाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य लोगों की समस्याओं का समाधान करना, गलियों और सड़कों का विकास करना तथा लोगों को जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करवाना है। उन्होंने कहा कि विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।

लुधियाना : बाल देखभाल गृहों के बच्चों के लिए जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिता आयोजित

लुधियाना / सत्ता संदेश

किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम के तहत स्थापित सरकारी और गैर-सरकारी बाल देखभाल गृहों में रहने वाले बच्चों के सर्वांगीण विकास और खेल प्रतिभा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिला कार्यक्रम अधिकारी एस. गुरमीत सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस प्रतियोगिता में बच्चों ने उत्साह और खेल भावना के साथ भाग लिया।

प्रतियोगिता के दौरान बच्चों के लिए 100 मीटर दौड़, रिले दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद और रस्साकशी सहित विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं और मनोरंजक गतिविधियां करवाई गईं। बच्चों ने सभी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करते हुए अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले बच्चों का उत्साहवर्धन भी किया गया।

इस अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी गुरमीत सिंह ने कहा कि खेल बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खेलों के माध्यम से बच्चों में अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होती है। साथ ही, खेल बच्चों को जीत और हार को खेल भावना के साथ स्वीकार करना भी सिखाते हैं।

उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने और अपनी क्षमताओं को पहचानने के लिए मंच प्रदान करते हैं। बच्चों के कल्याण, सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए शैक्षिक, रचनात्मक और खेल आधारित गतिविधियों को लगातार प्रोत्साहित किया जाएगा।

कार्यक्रम में जिला बाल संरक्षण अधिकारी रश्मी के अलावा जिला बाल विकास इकाई और चाइल्ड लाइन के कर्मचारी दीपक कुमार, मनजीत कौर, संदीप सिंह, कुलविंदर कौर, हरिंदर सिंह, संजना, रितु सूद, किरनदीप कौर, कमलजीत कौर और संदीप सागर मौजूद रहे।

कार्यक्रम के अंत में विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के विजेता बच्चों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। सभी बच्चों को नियमित रूप से खेलों और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया। प्रतियोगिता बच्चों के लिए अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ आपसी मेलजोल और खेल भावना को मजबूत करने का अवसर बनी।

लुधियाना : ‘स्वच्छता ही सेवा’ के तहत चलाया गया विशेष स्वच्छता अभियान

लुधियाना, 1 अक्टूबर: ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत जिला रक्षा सेवा कल्याण कार्यालय द्वारा विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस अभियान में कार्यालय के कर्मचारियों के साथ पूर्व सैनिकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।

अभियान के दौरान जिला रक्षा सेवा कल्याण कार्यालय के पूरे भवन के अलावा आसपास के बाजार और अन्य सार्वजनिक स्थानों की भी सफाई की गई। प्रतिभागियों ने लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करते हुए सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने का संदेश दिया।

इस अवसर पर जिला रक्षा सेवा कल्याण कार्यालय के अधीक्षक राकेश कुमार शर्मा ने लोगों से सड़कों, सार्वजनिक स्थानों, खाली प्लॉटों और अन्य स्थानों पर कूड़ा न फेंकने की अपील की। उन्होंने कहा कि कूड़ा निर्धारित स्थानों पर ही डाला जाना चाहिए, ताकि शहर को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त रखने में मदद मिल सके।

राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि स्वच्छता केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने लोगों से आगे आकर ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान को जन आंदोलन बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की अपील की।

लुधियाना : धान की सरकारी खरीद शुरू, पंग्रेन चेयरमैन डॉ. तेजपाल सिंह गिल ने किया उद्घाटन

लुधियाना / सत्ता संदेश

पंजाब में धान की सरकारी खरीद का सीजन शुरू हो गया है। लुधियाना की सुधर मंडी में पंग्रेन के अध्यक्ष डॉ. तेजपाल सिंह गिल ने धान की सरकारी खरीद का उद्घाटन किया। इस मौके पर पंग्रेन निरीक्षक राजेश कुमार भी मौजूद रहे।

डॉ. गिल ने कहा कि पंजाब सरकार धान खरीद के दौरान किसानों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं आने देगी। जिले की सभी मंडियों में खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए आवश्यक प्रबंध किए गए हैं, ताकि किसान अपनी फसल जल्द बेचकर घर लौट सकें और उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान मिल सके।

धान खरीद के पहले दिन डॉ. गिल ने कहा कि पंजाब सरकार किसानों के साथ खड़ी है और उनकी उपज का एक-एक दाना खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे फसल पूरी तरह पकने के बाद ही कटाई करें, ताकि धान में नमी की मात्रा निर्धारित 17 प्रतिशत की सीमा के भीतर रहे।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देशों के अनुसार जिला और स्थानीय प्रशासन खरीद प्रक्रिया को किसान हितैषी और सुचारू बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। मंडियों में किसी भी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए संबंधित विभागों को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

डॉ. गिल के अनुसार, लुधियाना जिले में इस वर्ष करीब 2.57 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की गई है और लगभग 17.25 लाख मीट्रिक टन धान मंडियों में पहुंचने की उम्मीद है। पिछले खरीद सीजन में जिले में करीब 13.11 लाख मीट्रिक टन धान की सरकारी खरीद हुई थी।

उन्होंने बताया कि सरकारी निर्देशों के अनुसार किसानों को उनकी फसल का भुगतान 24 से 36 घंटे के भीतर उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे मंडियों में केवल सूखा धान लेकर आएं, जिससे खरीद प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।

पंग्रेन अध्यक्ष ने किसानों से पराली न जलाने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों का जिम्मेदारी से प्रबंधन किया जाना चाहिए और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली पराली जलाने की प्रथा से बचना चाहिए।

उन्होंने बताया कि जिले की मंडियों में साफ-सफाई, पर्याप्त रोशनी, स्वच्छ पेयजल, नमी मापने वाले मीटर, तिरपाल सहित खरीद प्रक्रिया से संबंधित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।

नाईपर मोहाली में ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान 2026 के तहत विभिन्न गतिविधियां आयोजित

मोहाली / सत्ता संदेश

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (नाईपर), एस.ए.एस. नगर की ओर से ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान 2026 के तहत 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया।

अभियान की शुरुआत मोहाली के फेज-10 स्थित सरकारी स्कूल में ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर इंटरैक्टिव जागरूकता कार्यक्रम के साथ हुई। इस दौरान विद्यार्थियों को कचरे का उचित वर्गीकरण, 3R यानी रिड्यूस, रीयूज और रीसायकल, कम्पोस्टिंग, रीसाइक्लिंग, सिंगल यूज प्लास्टिक से बचाव और कचरे के उचित निपटान के बारे में जानकारी दी गई। विद्यार्थियों ने कचरा प्रबंधन के बेहतर तरीकों को अपनाने का संकल्प भी लिया।

अभियान के तहत फेज-9 स्थित सिटी पार्क, फेज-11 रेलवे स्टेशन, फेज-10 मार्केट, फेज-10 सरकारी स्कूल और चंडीगढ़ के सेक्टर-42 स्थित झील क्षेत्र में स्वच्छता अभियान चलाए गए। इसके अलावा फेज-11 और सेक्टर-67 मार्केट में सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और टिकाऊ कचरा प्रबंधन को बढ़ावा दिया गया।

स्वच्छता, जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन जैसे विषयों पर डिबेट प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। वहीं, ‘कबाड़ से जुगाड़–बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट’ प्रतियोगिता के माध्यम से प्रतिभागियों को बेकार वस्तुओं का रचनात्मक तरीके से दोबारा इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

मोहाली की ऐतिहासिक धरोहर फतेह बुर्ज में भी स्वच्छता अभियान चलाया गया, जहां कचरे और अधिक उग आई झाड़ियों को हटाकर परिसर की सफाई की गई।

अभियान के दौरान हेल्थ टॉक और हेल्थ चेक-अप कैंप का आयोजन भी किया गया। इसमें नाईपर समुदाय के करीब 45 से 50 सदस्यों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता के साथ-साथ बुनियादी स्वास्थ्य जांच की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई।

1 अक्टूबर को नाईपर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ अभियान के तहत एक घंटे का स्वैच्छिक स्वच्छता अभियान चलाया गया, जिसमें नाईपर समुदाय के सदस्यों ने सामूहिक रूप से भाग लिया।

अभियान का समापन 2 अक्टूबर को ‘स्वच्छ भारत दिवस’ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के साथ हुआ। इस अवसर पर नाईपर परिसर में गुलमोहर के पौधे लगाए गए।

‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के माध्यम से नाईपर ने स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के टिकाऊ उपयोग और जनभागीदारी के महत्व का संदेश दिया। अभियान ने इस बात पर जोर दिया कि स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल समाज के निर्माण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी के साथ निरंतर सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

नाईपर मोहाली में 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान 2026 के तहत स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, जागरूकता और जनभागीदारी से जुड़ी कई गतिविधियां आयोजित की गईं।

हरियाणा से कनाडा पहुंचा 24 मीट्रिक टन फ्रोजन फूड, APEDA ने FPO-आधारित निर्यात में की मदद
  • सोनीपत से कनाडा के लिए भेजी गई खेप में 2,295 डिब्बे, हरे मटर से लेकर समोसे तक शामिल1

नई दिल्ली / सोनीपत / सत्ता संदेश

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने हरियाणा के सोनीपत से कनाडा के लिए 24 मीट्रिक टन फ्रोजन फूड उत्पादों की खेप के निर्यात में मदद की है। 1 अक्टूबर 2026 को रवाना की गई इस खेप का निर्यात अटेर्ना फूड्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने किया है।

कुल 2,295 डिब्बों वाली इस खेप का मूल्य करीब 35,140 कनाडाई डॉलर (CAD) है। इसमें हरे मटर, मिश्रित सब्जियां, मटर एवं गाजर, स्वीट कॉर्न और समोसा जैसे फ्रोजन खाद्य उत्पाद शामिल हैं।

यह निर्यात किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के जरिए भारतीय कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। निर्यात करने वाली इकाई को APEDA की वित्तीय सहायता योजना के तहत सहयोग मिला है।

APEDA के अनुसार, FPO आधारित निर्यात मॉडल किसानों और खाद्य उत्पादकों को वैश्विक खरीदारों तथा बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद कर सकता है। खेती से जुड़े उत्पादों को प्रसंस्करण और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़कर FPO निर्यात-उन्मुख मूल्य श्रृंखला तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए APEDA के चेयरमैन अभिषेक देव ने निर्यातकों और अन्य हितधारकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि FPO द्वारा सीधे निर्यात किए जाने से उत्पादकों को बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर मिल सकते हैं। उन्होंने NIFTEM के योगदान की भी सराहना की और कनाडा के बाजार में भारतीय खाद्य उत्पादों के निर्यात के विस्तार की उम्मीद जताई।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत कार्यरत APEDA भारतीय कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के लिए बाजार संपर्क तथा निर्यात के अवसर विकसित करने में सहयोग करता है। इसके साथ ही प्राधिकरण किसान समूहों को वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जोड़ने की दिशा में भी काम करता है।

पॉलिटिकल विल, पब्लिक इन्वेस्टमेंट और पार्टिसिपेशन मिलकर भारत के टूरिज्म सफ़र को मिलेगा नया आकार

टूरिज्म का भविष्य पार्टनरशिप में है।

गजेंद्र सिंह शेखावत, भारत सरकार के केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री

टूरिज्म कभी भी सिर्फ़ सरकारी काम नहीं रहा है, और न ही कभी होगा।
किसी भी यात्री की हर यात्रा को एक कॉम्प्लेक्स इंफ्रास्ट्रक्चर का सपोर्ट मिलता है: सरकारें और लोकल एडमिनिस्ट्रेशन, एयरलाइंस और ट्रांसपोर्ट प्रोवाइडर, होटल और होमस्टे, टूर ऑपरेटर और गाइड, टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म और कंटेंट क्रिएटर, कारीगर और एंटरप्रेन्योर – सबसे बढ़कर, लोकल कम्युनिटी जिनकी ज़िंदगी, परंपराएं और नज़ारे किसी भी डेस्टिनेशन को उसकी खास पहचान देते हैं।

इसलिए, सरकार की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ डेस्टिनेशन को प्रमोट करना नहीं है। बल्कि ऐसे हालात बनाना है जिसमें यह पूरा इकोसिस्टम फल-फूल सके।

भारत आज अपनी टूरिज्म यात्रा में एक अहम मोड़ पर है। आज का टूरिस्ट सिर्फ़ मॉन्यूमेंट्स नहीं देखना चाहता, बल्कि ऐसे एक्सपीरियंस की तलाश में है जो ज़िंदगी भर याद रहें। लोकल खाना, शानदार परंपराएं, म्यूज़िक, हैंडीक्राफ्ट, नेचर, होमस्टे और लोकल कम्युनिटी के साथ बातचीत अब उतने ही ज़रूरी हो गए हैं जितना कि पारंपरिक टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर जाना।

इस बदलाव के लिए टूरिज्म के प्रति हमारी सोच और नज़रिए में भी वैसा ही बदलाव ज़रूरी है। हमें सिर्फ़ ‘डेस्टिनेशन’ से आगे बढ़कर ‘एक्सपीरियंस’ की ओर, अलग-अलग अट्रैक्शन से इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम की ओर और सरकार के प्रमोशन के ज़रिए ऐसी पार्टनरशिप की ओर बढ़ना होगा जो पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर की काबिलियत और हमारे लोगों की एनर्जी को एक साथ ला सके।

इंडियन टूरिज्म में हाल की पार्टनरशिप के अनुभव हमारे सामने मौजूद बहुत बड़ी क्षमता को दिखाते हैं। मिनिस्ट्री ऑफ़ टूरिज्म ने टेक्नोलॉजी, ट्रांसपोर्ट, हॉस्पिटैलिटी, कंटेंट और डिजिटल आउटरीच की काबिलियत को मिलाने के लिए इंडस्ट्री और दूसरे स्टेकहोल्डर्स के साथ एक्टिव रूप से पार्टनरशिप की है। ऐसी पार्टनरशिप न सिर्फ़ इसलिए कीमती हैं क्योंकि वे इनक्रेडिबल इंडिया का दायरा बढ़ाती हैं, बल्कि इसलिए भी क्योंकि वे इंस्पिरेशन को एक्सेस से और एक्सेस को असली एक्सपीरियंस से जोड़ती हैं।

इस मामले में वाराणसी का उदाहरण खास तौर पर इंस्पायरिंग है। एक डेस्टिनेशन को सिर्फ़ मॉन्यूमेंट्स के कलेक्शन के तौर पर ही नहीं, बल्कि एक वाइब्रेंट कल्चरल एक्सपीरियंस के तौर पर भी पेश किया जा सकता है – गंगा, क्लासिकल म्यूज़िक, हेरिटेज, बनारसी बुनाई, लोकल कम्युनिटी और ट्रेडिशनल हॉस्पिटैलिटी का एक अनोखा मिक्स। यही वह दिशा है जिसमें टूरिज्म को अब आगे बढ़ना चाहिए।

पहला पिलर पॉलिटिकल विल

टूरिज्म पब्लिक पॉलिसी के लगभग हर पहलू को छूता है। किसी डेस्टिनेशन पर जाने वाले टूरिस्ट का अनुभव सिर्फ़ इस बात से तय नहीं होता कि वह क्या देखने आया है, बल्कि सड़कों, एयरपोर्ट, रेलवे, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, सफ़ाई, सिक्योरिटी, डिजिटल कनेक्टिविटी, अर्बन प्लानिंग, हेरिटेज कंज़र्वेशन और लोकल सर्विसेज़ की क्वालिटी से भी तय होता है।

इसलिए, टूरिज़्म को किसी एक टूरिज़्म डिपार्टमेंट की एडमिनिस्ट्रेटिव सीमाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसके लिए पूरी सरकार का एक इंटीग्रेटेड अप्रोच चाहिए।

ट्रांसपोर्टेशन, सिविल एविएशन, रेलवे, कल्चर, अर्बन डेवलपमेंट, एनवायरनमेंट, स्किल डेवलपमेंट, कॉमर्स और डिजिटल टेक्नोलॉजी, सभी को एक आम समझ के साथ आना होगा कि कोई डेस्टिनेशन सच में सफल क्यों होता है।

इस मामले में पॉलिटिकल विल का मतलब है टूरिज्म को सिर्फ़ एक सेकेंडरी इकोनॉमिक एक्टिविटी के बजाय रोज़गार, एंटरप्रेन्योरशिप, कल्चरल प्रोटेक्शन, रीजनल डेवलपमेंट और इंटरनेशनल कोऑपरेशन के लिए एक पावरफुल मीडियम के तौर पर पहचानना।

इसका मतलब यह भी है कि सबसे पॉपुलर डेस्टिनेशन से आगे देखें और कम जानी-मानी जगहों में इन्वेस्ट करने की हिम्मत रखें, जिनकी क्षमता का अब तक ज़्यादातर इस्तेमाल नहीं हुआ है।

दूसरा ज़रूरी एलिमेंट पब्लिक इन्वेस्टमेंट

टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर अब सिर्फ़ एयरपोर्ट, हाईवे और होटलों तक सीमित नहीं है। जबकि ये ज़रूरी हैं, मॉडर्न ट्रैवलर को साफ़ पब्लिक जगहों, अच्छी तरह से सुरक्षित ऐतिहासिक जगहों, इंटरप्रिटेशन सेंटर, सही साइनेज, पैदल चलने वालों के लिए आसान सुविधाएँ, एंड-टू-एंड कनेक्टिविटी, डिजिटल जानकारी और ट्रेंड वर्कर की भी ज़रूरत होती है।

एक्सपीरियंस की क्वालिटी टूरिस्ट के किसी मॉन्यूमेंट में घुसने से बहुत पहले शुरू हो जाती है और उसके जाने के बहुत बाद तक जारी रहती है।
पब्लिक इन्वेस्टमेंट का एक और ज़रूरी काम है: यह एक ऐसा माहौल बनाता है जिसमें प्राइवेट इन्वेस्टमेंट वायबल और प्रॉफिटेबल हो सकता है।
इसलिए सवाल यह नहीं होना चाहिए कि टूरिज्म में सरकार को इन्वेस्ट करना चाहिए या प्राइवेट सेक्टर को।

ज़्यादा ज़रूरी सवाल यह है कि पब्लिक इन्वेस्टमेंट वह नींव कैसे बना सकता है जिस पर प्राइवेट कैपिटल, एंटरप्राइज और इनोवेशन बन सकें। एक आसान और अच्छी तरह से जुड़ी हुई जगह होटलों को आकर्षित करती है। एक अच्छी तरह से संभालकर रखी गई ऐतिहासिक जगह अनुभवों को आकर्षित करती है। एक मज़बूत लोकल इकॉनमी एंटरप्रेन्योर्स को आकर्षित करती है। और एक ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर जहाँ ये सभी एक-दूसरे को मज़बूत करते हैं, सस्टेनेबल और मज़बूत टूरिज्म बनाता है।

तीसरा ज़रूरी एलिमेंटपब्लिक पार्टिसिपेशन।

फिर भी एक तीसरी चीज़ है जिसके बिना न तो पॉलिटिकल विल और न ही पब्लिक इन्वेस्टमेंट अपना वादा पूरा कर सकते हैं: पब्लिक पार्टिसिपेशन। किसी भी जगह के असली गार्डियन वहाँ के लोग होते हैं।

कोई गाँव सिर्फ़ इसलिए आकर्षक नहीं बन जाता क्योंकि वहाँ सुंदर नेचुरल लैंडस्केप है। उसकी पहचान, उसकी परंपराएँ, खाना, क्राफ़्ट, कहानियाँ, म्यूज़िक और जिस स्पिरिचुअल तरीके से वहाँ के लोग विज़िटर्स का स्वागत करते हैं, वे जीते हैं। अगर टूरिज्म को सच में सबको साथ लेकर चलने वाला बनाना है, तो लोकल कम्युनिटी को सिर्फ़ टूरिज्म की चीज़ नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका मुख्य पार्टिसिपेंट और बेनिफिशियरी बनना चाहिए।

होमस्टे, लोकल खाना, हैंडीक्राफ्ट, लोक परफ़ॉर्मेंस, लोकल गाइड और लोकल तौर पर ऑर्गनाइज़ किए गए अनुभव टूरिज्म को एक बाहरी इकॉनमिक एक्टिविटी से लोकल खुशी का सोर्स बना सकते हैं। होमस्टे ऑपरेटर्स की डिजिटल कैपेबिलिटी को मज़बूत करने, कम जानी-मानी जगहों को ज़्यादा दिखने लायक दिखाने और अनछुए गांवों को ऑनलाइन बुक किए जा सकने वाले होमस्टे से जोड़ने की हाल की कोशिशें इस अप्रोच की क्षमता को दिखाती हैं।

मकसद यह पक्का करना होना चाहिए कि जब कोई जगह किसी टूरिस्ट का ध्यान खींचे, तो उस आकर्षण से पैदा होने वाले आर्थिक मौके उन लोगों तक पहुंचें जो उस जगह को उसकी पहचान देते हैं। एक युवा गांव वाला किसान, एंटरप्रेन्योर, फोटोग्राफर या हॉस्पिटैलिटी प्रोफेशनल बन सके।

एक महिला के नेतृत्व वाला एंटरप्राइज लोकल खाने या हैंडीक्राफ्ट को नेशनल और इंटरनेशनल मार्केट तक ले जा सके। एक कारीगर अपनी पीढ़ियों से मिले ज्ञान से एक इज्ज़तदार (गर्मजोशी भरी) रोजी-रोटी कमा सके। तभी टूरिज्म इनक्लूसिव डेवलपमेंट का सच्चा ज़रिया बन सकता है।

हालांकि, पार्टनरशिप और ज़मीनी स्तर पर पार्टनरशिप के नतीजों में एक बड़ा अंतर होता है। एग्रीमेंट पर साइन करना तो बस शुरुआत है।

सफलता का असली पैमाना ज़मीनी स्तर पर दिखना चाहिए: क्या जगहें ज़्यादा आसानी से मिलने लगी हैं? क्या विज़िटर का अनुभव बेहतर हुआ है? क्या लोकल एंटरप्राइज फले-फूले हैं? क्या रोज़गार बढ़ा है? क्या कारीगरों और समुदायों को नए बाज़ार मिले हैं? क्या सांस्कृतिक विरासत को सिर्फ़ इस्तेमाल करने के बजाय ठीक से बचाकर रखा गया है?

इसलिए पार्टनरशिप को सिर्फ़ साइन किए गए एग्रीमेंट की संख्या से नहीं, बल्कि उनसे बनने वाली वैल्यू से मापा जाना चाहिए।

इंडियन टूरिज्म का भविष्य आखिरकार ऐसे रिश्तों के ताने-बाने से तय होगा: सेंटर और राज्यों के बीच; सरकार और इंडस्ट्री के बीच; टेक्नोलॉजी और परंपरा के बीच; ग्लोबल फोरम और लोकल कम्युनिटी के बीच; और पब्लिक इन्वेस्टमेंट और प्राइवेट एंटरप्राइज के बीच।

भारत के पास सभ्यता, संस्कृति, प्रकृति और विविधता की एक असाधारण विरासत है। अब हमें इंस्टीट्यूशनल कल्पना की ज़रूरत है – ताकि उस विरासत को ट्रैवलर्स और एंटरप्रेन्योर्स की नई पीढ़ी की उम्मीदों से जोड़ा जा सके। मकसद सिर्फ़ भारत में ज़्यादा टूरिस्ट लाना नहीं होना चाहिए।

मकसद यह पक्का करना होना चाहिए कि टूरिज्म से बनने वाले मौके भारत के अंदरूनी हिस्सों तक पहुँचें।
इसलिए, हमारी सफलता का असली पैमाना सिर्फ़ हमारे किनारों पर आने वाले टूरिस्ट की संख्या नहीं होगी, बल्कि उनके आने से बेहतर हुई ज़िंदगी की संख्या होगी।

टूरिज्म, अपने सबसे अच्छे रूप में, एक लेन-देन है; ट्रैवलर एक जगह खोजता है, और वह जगह ट्रैवलर के ज़रिए अपने लिए नई संभावनाएँ खोजती है। अगर हम पॉलिटिकल विल, पब्लिक इन्वेस्टमेंट, प्राइवेट एंटरप्राइज और अपने लोगों की भागीदारी को एक साथ जोड़ सकें, तो टूरिज्म सिर्फ एक इकोनॉमिक सेक्टर से कहीं ज़्यादा बन सकता है।

यह एक बड़ा ज़रिया बन सकता है जिससे भारत दुनिया के सामने अपनी सभ्यता पेश कर सके, देश के अंदर अपनी कम्युनिटी को मज़बूत कर सके, अपने युवाओं के लिए रोज़ी-रोटी बना सके, अपनी कल्चरल विरासत को बचा सके और साझा खुशहाली के नए दरवाज़े खोल सके।

आखिर में, इंडियन टूरिज्म का भविष्य सिर्फ सरकार नहीं तय करेगी। इसे पार्टनरशिप में और इस पक्के विश्वास के साथ तय किया जाएगा कि टूरिज्म से पैदा हुई खुशहाली का पहला हक उन लोगों और जगहों पर होना चाहिए जो भारत को घूमने लायक बनाती हैं।