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पंजाब कैबिनेट की बैठक आज, विधानसभा सत्र में किसानों और उद्योग से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा संभव

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को कैबिनेट की अहम बैठक बुलाई है। बैठक दोपहर 2 बजे मुख्यमंत्री आवास पर होगी। मुख्य सचिव केएपी सिन्हा की ओर से बैठक को लेकर अधिसूचना जारी की गई है। हालांकि, बैठक का विस्तृत एजेंडा फिलहाल सार्वजनिक नहीं किया गया है।

कैबिनेट बैठक में राज्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और नीतिगत प्रस्तावों पर चर्चा और उन्हें मंजूरी दिए जाने की संभावना है। सबसे अहम मुद्दों में पंजाब विधानसभा का अक्टूबर में सत्र बुलाने का फैसला शामिल हो सकता है। सरकार ने संयुक्त किसान मोर्चा को अक्टूबर में विधानसभा सत्र बुलाने का आश्वासन दिया था। ऐसे में आज की बैठक में सत्र की तारीख को लेकर फैसला या घोषणा हो सकती है।

इसके अलावा किसानों से जुड़ी अन्य मांगों पर भी कैबिनेट में प्रस्ताव रखे जाने की संभावना है। कृषि क्षेत्र से संबंधित मुद्दों के साथ-साथ राज्य के उद्योगपतियों को राहत देने से जुड़े प्रस्ताव भी बैठक में चर्चा के लिए आ सकते हैं।

फिलहाल सरकार की ओर से बैठक के एजेंडे की आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है। ऐसे में कैबिनेट बैठक समाप्त होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन प्रस्तावों पर अंतिम मुहर लगी और विधानसभा सत्र को लेकर क्या फैसला लिया गया।

अबोहर : सीवरेज समस्या को लेकर कांग्रेस का रोष प्रदर्शन, निगम गेट पर जड़ा ताला

अबोहर / सत्ता संदेश

अबोहर में लंबे समय से बनी सीवरेज समस्या के विरोध में कांग्रेस ने सोमवार को रोष रैली निकालकर धरना प्रदर्शन किया। कांग्रेस के वरिष्ठ जिला उपप्रधान सुधीर भादू के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और शहरवासियों ने नगर निगम के मेन गेट पर ताला लगाकर निगम कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया।

प्रदर्शन की शुरुआत बाजार नंबर-9 स्थित बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक से हुई। यहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद रोष रैली निकाली और नगर निगम कार्यालय पहुंचे।

धरने को संबोधित करते हुए सुधीर भादू ने कहा कि अबोहर शहर के अधिकांश इलाकों में सीवरेज व्यवस्था चरमराई हुई है। सीवरेज जाम होने के कारण कई क्षेत्रों में महीनों से दूषित पानी जमा है, जिसके चलते लोगों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हालात इतने खराब हैं कि लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।

भादू ने आरोप लगाया कि शहर के कई इलाकों में घरों तक पहुंचने वाला पानी भी दूषित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसके कारण लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बार-बार शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा।

कांग्रेस नेता ने कहा कि जनता ने अपनी समस्याओं के समाधान के लिए नेताओं और पार्षदों को चुना था, लेकिन अब लोगों की समस्याओं की सुनवाई नहीं हो रही। उन्होंने भाजपा विधायक समेत अन्य जनप्रतिनिधियों से अबोहर की सीवरेज समस्या का तत्काल समाधान करवाने की मांग की।

सुधीर भादू ने चेतावनी दी कि जब तक नगर निगम कमिश्नर या मेयर धरनास्थल पर पहुंचकर लोगों की समस्याएं नहीं सुनते और उनके समाधान के लिए ठोस कार्रवाई शुरू नहीं करते, तब तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।

Delhi Jal Board Scam: दिल्ली जल बोर्ड पर 73 हजार करोड़ का कर्ज, सुप्रीम कोर्ट में 28,400 करोड़ फंड पर उठे सवाल

दिल्ली जल बोर्ड को 2015-16 से 28,400 करोड़ रुपये दिए जाने के बावजूद जवाबदेही पर सवाल उठे हैं। सुप्रीम कोर्ट में DJB के 73 हजार करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज और वित्तीय प्रबंधन का मामला सामने आया।

नई दिल्ली / सत्ता संदेश:

दिल्ली जल बोर्ड (DJB) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान फंड, वित्तीय प्रबंधन और जवाबदेही से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। दिल्ली सरकार के वित्त विभाग ने अपने हलफनामे में कहा कि वित्त वर्ष 2015-16 से दिल्ली जल बोर्ड को करीब 28,400 करोड़ रुपये दिए गए, लेकिन विभाग के अनुसार बोर्ड की ओर से फंड के इस्तेमाल को लेकर अपेक्षित जवाबदेही नहीं दिखाई गई और कुछ धनराशि निर्धारित शर्तों के अनुरूप खर्च नहीं की गई।

वित्त विभाग का यह जवाब उस याचिका के संदर्भ में सामने आया, जिसमें दिल्ली सरकार की ओर से दिल्ली जल बोर्ड के लिए करीब 3,000 करोड़ रुपये की राशि जारी करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली के वित्त सचिव से जवाब मांगा था।

हलफनामे में दिल्ली के मुख्य सचिव की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि घरेलू पानी और सीवेज टैरिफ में फरवरी 2018 से तथा सर्विस चार्ज में जनवरी 2015 से वृद्धि नहीं होने के कारण दिल्ली जल बोर्ड को हर साल करीब 1,200 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व का नुकसान हो रहा था। रिपोर्ट में बकायेदारों की संख्या बढ़ने का भी उल्लेख किया गया।

वित्त विभाग के अनुसार, दिल्ली जल बोर्ड पर कर्ज और उस पर लगने वाला ब्याज 73,000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका था और बोर्ड ने सरकार को कथित तौर पर बताया था कि वह इस कर्ज को चुकाने की स्थिति में नहीं है। इस दावे की पृष्ठभूमि में बोर्ड की वित्तीय स्थिति और राजस्व व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं।

मामले में 2003-04 से 2022-23 के बीच दिल्ली जल बोर्ड को दिए गए फंड के इस्तेमाल का विशेष ऑडिट भी कराया गया था। वित्त विभाग के अनुसार, ऑडिट में ऐसी आपत्तियां सामने आईं कि एक योजना के लिए निर्धारित राशि को दूसरी योजनाओं में इस्तेमाल किया गया।

यह पूरा विवाद उस समय सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जब दिल्ली सरकार ने आरोप लगाया कि जल बोर्ड के लिए स्वीकृत फंड जारी नहीं किया जा रहा है। इसके जवाब में वित्त विभाग ने फंड जारी किए जाने और उसके इस्तेमाल को लेकर अपनी आपत्तियां अदालत के सामने रखीं। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में भी वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान दिल्ली जल बोर्ड को प्राप्त और लंबित राशि से संबंधित आंकड़े दर्ज हैं।

हालांकि, उपलब्ध अदालती रिकॉर्ड और रिपोर्टों के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि किसी विशेष पूर्व या वर्तमान मंत्री ने व्यक्तिगत रूप से धन का गबन किया है या किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी निश्चित है। ऐसे आरोपों की पुष्टि जांच या सक्षम अदालत के निष्कर्ष के आधार पर ही की जा सकती है।

दिल्ली जल बोर्ड की वित्तीय स्थिति पर सवाल पहले भी उठते रहे हैं। 2026-27 के दिल्ली बजट विश्लेषण में भी यह उल्लेख है कि DJB ने 2013-14 के बाद कोई ऋण चुकाया नहीं था और बोर्ड ने सरकार से ऋण को अनुदान में बदलने का अनुरोध किया था। रिपोर्ट में खराब बिलिंग और पानी के राजस्व में कमी को भी वित्तीय चुनौतियों में शामिल किया गया है।

अब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखे गए आंकड़ों के बाद दिल्ली जल बोर्ड को मिले हजारों करोड़ रुपये के फंड, उनके इस्तेमाल, बकाया राजस्व और बढ़ते कर्ज को लेकर जवाबदेही का मुद्दा फिर चर्चा में है। मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों पर अदालत और संबंधित जांच एजेंसियों का निष्कर्ष क्या रहता है।

Punjab News: बकाया बिल पर शव रोकने वाले अस्पतालों पर FIR, मानवाधिकार आयोग का बड़ा फैसला

राजपुरा में मानवाधिकार आयोग के सदस्य जतिंदर सिंह शंटी ने कहा कि बकाया अस्पताल बिल के कारण मृतक का शव रोकने वाले निजी अस्पतालों के खिलाफ FIR दर्ज होगी। अस्पतालों को 20 अक्टूबर तक मॉर्चरी बॉक्स और सूचना बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

राजपुरा / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : दीपक कुमार

बकाया अस्पताल बिल के कारण मृतक का शव परिजनों को सौंपने से रोकने के मामलों को लेकर पंजाब राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग के सदस्य पद्मश्री जतिंदर सिंह शंटी ने स्पष्ट किया कि किसी भी निजी अस्पताल को बकाया बिल की वजह से मृतक का शव रोकने की अनुमति नहीं होगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पताल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी।

राजपुरा के बहावलपुर भवन में आयोजित खुली सुनवाई यानी ‘जनता की अदालत’ के दौरान जतिंदर सिंह शंटी ने लोगों की समस्याएं और शिकायतें सुनीं। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। पत्रकारों से बातचीत में शंटी ने बताया कि मानवाधिकार आयोग की ओर से अलग-अलग जिलों और तहसीलों में जाकर लोगों की शिकायतें सीधे सुनी जा रही हैं, ताकि पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाया जा सके।

शंटी ने बताया कि अस्पतालों से संबंधित इस महत्वपूर्ण निर्देश के तहत निजी अस्पतालों को बकाया राशि के नाम पर मृतक का शव रोकने से रोक दिया गया है। उन्होंने कहा कि किसी परिवार से अस्पताल का बिल वसूलने के लिए शव को रोकना मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है और ऐसे मामलों में नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने यह भी बताया कि अस्पतालों को 20 अक्टूबर तक मॉर्चरी बॉक्स की व्यवस्था करने और अस्पताल के अंदर तथा बाहर इस संबंध में सूचना बोर्ड लगाने की समय सीमा दी गई है।

मानवाधिकार आयोग के सदस्य ने लोगों से अपील की कि वे अपनी शिकायतें आधार कार्ड के साथ आयोग के व्हाट्सऐप नंबर 9855475547 पर भेज सकते हैं। इसके अलावा चंडीगढ़ के सेक्टर-34ए स्थित आयोग के कार्यालय में कार्यदिवस के दौरान सीधे शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है।

कांग्रेसी विधायक सुखपाल सिंह खैहरा द्वारा उनके खिलाफ की गई बयानबाजी पर प्रतिक्रिया देते हुए शंटी ने कहा कि वह राजनेता नहीं हैं, बल्कि संवैधानिक जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि उनके कामकाज को लेकर किसी को कोई संदेह है तो सरकार या प्रशासन उनकी किसी भी प्रकार की जांच करवा सकता है। उन्होंने कहा, “फलदार पेड़ पर ही पत्थर पड़ते हैं।”

शंटी ने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक लावारिस शवों को उठाने और उनके अंतिम संस्कार की सेवा की है। उन्होंने कहा कि बयानबाजी की परवाह किए बिना अपने तीन साल के कार्यकाल में लोगों के अधिकारों की रक्षा, नशे के खिलाफ कार्रवाई और ट्रैवल एजेंटों की धोखाधड़ी से लोगों को बचाने के लिए काम जारी रखेंगे।

समराला की गलियों में आवारा कुत्तों का आतंक, 5 लोगों पर हमला; लोगों में दहशत

समराला शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से लोगों में डर का माहौल है। अलग-अलग इलाकों में 5 लोगों पर कुत्तों के हमले की जानकारी सामने आई है। लोगों ने प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की।

समराला / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : परमिंदर वर्मा

पंजाब के समराला शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या अब लोगों के लिए चिंता का बड़ा कारण बनती जा रही है। शहर के अलग-अलग इलाकों में आवारा कुत्तों द्वारा 5 लोगों पर हमला कर उन्हें घायल करने की जानकारी सामने आई है। लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद स्थानीय लोगों में डर का माहौल है और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग उठ रही है।

शहरवासियों के मुताबिक, समराला की लगभग हर गली और मोहल्ले में आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। खासकर सुबह और शाम के समय बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर कुत्तों के झुंड लोगों का पीछा करते हैं, जिससे वाहन चालकों के साथ सड़क हादसा होने का खतरा भी बना रहता है।

पीड़ित जसविंदर सिंह काला ने बताया कि आवारा कुत्तों के हमलों के कारण शहरवासियों को लगातार परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

शहरवासी मनदीप सिंह मणि ने प्रशासन से मांग की कि आवारा कुत्तों की समस्या का कोई स्थायी समाधान निकाला जाए। उनका कहना है कि केवल शिकायतों के बाद अस्थायी कार्रवाई करने के बजाय कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।

समराला के पार्षद दीपक कश्यप ने भी इस समस्या को गंभीर बताते हुए संबंधित विभाग से जरूरी कार्रवाई करने की अपील की है। वहीं अस्पताल के डॉक्टर ने कुत्ते के काटने की स्थिति में घाव को तुरंत साफ करने और बिना देरी किए चिकित्सकीय उपचार लेने की सलाह दी है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि शहर में आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए जल्द अभियान चलाया जाए और संवेदनशील इलाकों में विशेष व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों को खतरे से बचाया जा सके।

Machhiwara News: निहंग वेशधारी युवक का हाईवोल्टेज ड्रामा, सुनार पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने की कोशिश

माछीवाड़ा साहिब के गांधी चौक में निहंग वेशधारी युवक पर सुनार और अन्य लोगों पर ज्वलनशील पदार्थ छिड़ककर आग लगाने की कोशिश का आरोप लगा। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जांच शुरू की।

माछीवाड़ा साहिब / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : जसबीर सिंह अलबेला

माछीवाड़ा साहिब के गांधी चौक में देर शाम उस समय हड़कंप मच गया, जब निहंग वेशधारी एक युवक पर सुनार की दुकान में घुसकर हंगामा करने और ज्वलनशील पदार्थ छिड़ककर आग लगाने की कोशिश करने का आरोप लगा। घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद युवक को काबू कर गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस को दिए बयान में सुनार करण वर्मा ने बताया कि वह अपनी दुकान पर ग्राहकों को सामान दिखा रहा था। उस समय उसका दोस्त सुनील कुमार गिरधर और सोने का कारोबारी रुस्तम रणजीत सिंह भी दुकान में मौजूद थे। इसी दौरान निहंग वेश में दीपक कुमार कथित तौर पर एक व्यक्ति से बहस करता हुआ दुकान के अंदर आ गया।

करण वर्मा के अनुसार, युवक ने दुकान में मौजूद लोगों के साथ कथित तौर पर बहस की। जब उसे रोकने का प्रयास किया गया तो आरोप है कि उसने अपने हाथ में पकड़ी बोतल में मौजूद मिट्टी के तेल या पेट्रोलनुमा ज्वलनशील पदार्थ को अपने ऊपर छिड़कने की कोशिश की और दुकानदार, ग्राहकों तथा खुद को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, दुकान बंद करने के बाद जब वह बाहर निकला तो युवक उसका पीछा करने लगा। जान बचाने के लिए करण वर्मा अपने दोस्त रुस्तम की गाड़ी में बैठ गया। आरोप है कि युवक वहां भी पहुंच गया और उसने उन पर ज्वलनशील पदार्थ छिड़क दिया। इसके बाद माचिस की तीली जलाकर आग लगाने की कोशिश किए जाने का भी आरोप है।

घटना की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी करमजीत सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस के अनुसार, आरोपी युवक ने पुलिस कर्मचारियों के साथ भी हाथापाई की, जिसके दौरान एक कर्मचारी की वर्दी फट गई। आरोपी को काबू करने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी।

पुलिस ने आसपास मौजूद लोगों से आरोपी को पकड़ने में सहयोग करने की अपील भी की, लेकिन कथित तौर पर डर के कारण कोई आगे नहीं आया। इस दौरान एक युवक ने हिम्मत दिखाते हुए पुलिस की मदद की, जिसके बाद आरोपी को पुलिस वाहन में बैठाकर थाने ले जाया गया।

थाना प्रभारी करमजीत सिंह ने बताया कि आरोपी के संबंध में पहले भी पुलिस के पास कई शिकायतें आने की बात सामने आई है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

CMC Ludhiana: मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना से 125 बच्चों की मेजर सर्जरी मुफ्त, डॉ. बलबीर सिंह ने की सराहना

लुधियाना के CMC अस्पताल में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत करीब 125 बच्चों की मेजर सर्जरी और गंभीर बीमारियों का मुफ्त इलाज किया गया। पात्र मरीजों को 10 लाख रुपये तक के उपचार की सुविधा मिल रही है।

लुधियाना / सत्ता संदेश

मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत लुधियाना स्थित सीएमसी अस्पताल में करीब 125 बच्चों की मेजर सर्जरी और गंभीर बीमारियों का मुफ्त इलाज किए जाने की जानकारी सामने आई है। योजना के तहत पात्र मरीजों को 10 लाख रुपये तक के मुफ्त उपचार की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है।

इस योजना के तहत इलाज करवाने वाले बच्चों में जन्मजात हृदय रोग, दिल में छेद, कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चे शामिल हैं। इन बच्चों की महंगी सर्जरी और उपचार का खर्च योजना के तहत सरकार द्वारा वहन किया गया है, जिससे जरूरतमंद परिवारों को बड़ी आर्थिक राहत मिली है।

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने सीएमसी अस्पताल पहुंचकर मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत चल रहे उपचार का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल में इलाज करवा रहे मरीजों और उनके परिवारों से भी जानकारी ली तथा योजना के तहत जरूरतमंदों को मिल रही स्वास्थ्य सुविधाओं की सराहना की।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार का उद्देश्य राज्य के लोगों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना है। सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण किसी जरूरतमंद व्यक्ति का इलाज न रुके।

उन्होंने लोगों से अपील की कि अधिक से अधिक पात्र परिवार स्वास्थ्य बीमा कार्ड बनवाएं, ताकि गंभीर बीमारी की स्थिति में उन्हें योजना का लाभ मिल सके। सरकार की ओर से पंजाब की करीब 3 करोड़ आबादी तक योजना का लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत गंभीर बीमारियों के इलाज और महंगी सर्जरी की सुविधा मिलने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को योजना के बारे में जागरूक करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

1984 Sikh Victims: 84 पीड़ित परिवारों का भगवंत मान सरकार के खिलाफ मोर्चा, अकाल तख्त से इंसाफ की मांग

अमृतसर में 1984 के सिख विरोधी हिंसा के पीड़ित परिवारों ने भगवंत मान सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। परिवारों ने श्री अकाल तख्त साहिब से इंसाफ, पुनर्वास और अपनी मांगों के समाधान की अपील की।

अमृतसर / सत्ता संदेश

1984 के सिख विरोधी हिंसा के पीड़ित परिवारों ने पंजाब की भगवंत मान सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए इंसाफ की मांग उठाई है। अमृतसर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीड़ित परिवारों के प्रतिनिधियों ने दावा किया कि उन्हें अभी भी परेशानियों और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इस मामले को लेकर श्री अकाल तख्त साहिब से हस्तक्षेप की मांग की है।

पीड़ित परिवारों की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि 42 साल बीत जाने के बावजूद कई परिवारों का पुनर्वास पूरी तरह नहीं हो पाया है और उनके सामने रोजगार तथा आवास से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं। एक महिला प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि उन्हें सरकार की ओर से ऐसे पत्र मिले हैं, जिनमें उन्हें आवंटित घर खाली करने के लिए कहा गया है।

पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे लंबे समय से अपने अधिकारों और पुनर्वास की मांग उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि पिछली सरकारों के बाद मौजूदा आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में भी उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।

मामले को लेकर पीड़ित परिवारों के प्रतिनिधि श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचे और सिंह साहिब से मुलाकात की। उनके अनुसार, अकाल तख्त साहिब पर उनकी समस्याओं को सुना गया और उन्हें भरोसा दिलाया गया कि उनके मुद्दे पर पंथ स्तर पर विचार किया जाएगा।

पीड़ित परिवारों ने कहा कि 1 नवंबर को 1984 की घटनाओं की बरसी के मौके पर आगे की रणनीति और बड़े ऐलान किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वे सरकार के मंत्रियों और विधायकों के विधानसभा क्षेत्रों में जाकर लोगों के बीच अपनी समस्याएं उठाएंगे और सरकार के खिलाफ अपने आरोपों को जनता के सामने रखेंगे।

परिवारों ने पंजाब के लोगों से भी अपील की कि वे 1984 के पीड़ितों के मुद्दे पर उनका साथ दें और सरकार से उनके पुनर्वास, अधिकारों और लंबित मांगों को लेकर जवाब मांगें।

गौरतलब है कि 2026 में भी श्री अकाल तख्त साहिब और भगवंत मान सरकार के बीच कई मुद्दों को लेकर सार्वजनिक तौर पर मतभेद सामने आए हैं। जून में अकाल तख्त ने गुरु ग्रंथ साहिब से संबंधित कानून में संशोधन को लेकर पंजाब सरकार को निर्देश दिए थे, जबकि सितंबर में सरकार ने संबंधित कानून पर अकाल तख्त की ओर से उठाई गई चिंताओं पर विचार के लिए उच्चस्तरीय समिति के साथ बैठक भी की थी।

फिलहाल 84 पीड़ित परिवारों की ओर से लगाए गए आरोपों पर पंजाब सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

Rajpura Congress Meeting: पूर्व MLA हरदयाल सिंह कंबोज की बैठक ने लिया रैली का रूप, कार्यकर्ताओं की उमड़ी भीड़

राजपुरा में पूर्व MLA हरदयाल सिंह कंबोज के निवास पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैठक बड़ी सभा में बदल गई। कंबोज ने पंजाब की कानून-व्यवस्था और AAP सरकार पर निशाना साधा।

राजपुरा / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : गुरप्रीत धीमान

राजपुरा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक और पंजाब कांग्रेस मैनिफेस्टो कमेटी के को-चेयरमैन हरदयाल सिंह कंबोज के निवास पर कांग्रेस नेताओं और सक्रिय कार्यकर्ताओं की बैठक आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के पहुंचने के बाद कार्यक्रम ने रैली का रूप ले लिया।

पत्रकारों से बातचीत में हरदयाल सिंह कंबोज ने कहा कि बैठक का उद्देश्य राजपुरा शहर के 13 वार्डों के कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ संगठन और आगामी गतिविधियों को लेकर चर्चा करना था, लेकिन कार्यकर्ताओं और लोगों की बड़ी मौजूदगी ने इसे बड़ी सभा में बदल दिया।

कंबोज ने बताया कि राजपुरा विधानसभा क्षेत्र को 21 जोन में बांटा गया है। इनमें 17 ग्रामीण जोन, 3 राजपुरा शहरी जोन और एक बनूर जोन शामिल है। उन्होंने कहा कि पुराने राजपुरा के 9 वार्डों को लेकर पहले ही एक बड़ी बैठक हो चुकी है, जबकि अगले 9 वार्डों की बैठक अगले सप्ताह आयोजित की जाएगी।

पूर्व विधायक ने दावा किया कि राजपुरा के व्यापारी, कर्मचारी, गरीब वर्ग और महिलाएं कांग्रेस की नीतियों और संगठन पर भरोसा रखते हैं। उन्होंने कहा कि राजपुरा के लोगों का कंबोज परिवार पर अटूट विश्वास है।

पंजाब की कानून-व्यवस्था को लेकर कंबोज ने आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हो चुकी है और समाज का अलग-अलग वर्ग मौजूदा सरकार से असंतुष्ट है।

उन्होंने मुख्यमंत्री के गृह जिले संगरूर का उल्लेख करते हुए पुलिस कार्रवाई और पीड़ित परिवारों के साथ कथित व्यवहार को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। कंबोज ने कहा कि सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। उनके इन आरोपों पर सरकार की ओर से प्रतिक्रिया का उल्लेख इस बयान में नहीं है।

इस दौरान हरदयाल सिंह कंबोज ने परगट सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाए जाने पर राजपुरा कांग्रेस की ओर से बधाई दी। उन्होंने कहा कि पार्टी हाईकमान के इस फैसले से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा आई है। कंबोज ने दावा किया कि कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और राहुल गांधी के नेतृत्व में आगामी चुनावों में मजबूती से मैदान में उतरेगी।

पंजाब कांग्रेस की मैनिफेस्टो कमेटी को लेकर उन्होंने कहा कि कमेटी के चेयरमैन डॉ. अमर सिंह के नेतृत्व में पंजाब के लोगों की जमीनी जरूरतों और समस्याओं को ध्यान में रखते हुए घोषणापत्र तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर घोषणापत्र को लागू किया जाएगा।

कार्यक्रम में राजपुरा हलके के कांग्रेस पार्षदों, ब्लॉक अध्यक्षों, युवा नेताओं और बड़ी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ताओं एवं लोगों ने हिस्सा लिया।

लुधियाना : ऑपरेशन कासो के तहत सर्च ऑपरेशन, बस स्टैंड से 4 संदिग्ध हिरासत में

लुधियाना / सत्ता संदेश

नशे और आपराधिक गतिविधियों पर शिकंजा कसने के लिए लुधियाना पुलिस ने ऑपरेशन कासो के तहत शहर के अलग-अलग स्थानों पर सर्च और चेकिंग अभियान चलाया। इसी कड़ी में पुलिस टीमों ने लुधियाना बस स्टैंड पर भी विशेष चेकिंग की। पुलिस के मुताबिक, इस दौरान करीब 4 संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया गया है और कुछ सामान की रिकवरी की बात भी सामने आई है।

एसीपी सरबजीत सिंह चीमा ने बताया कि यह चेकिंग अभियान पंजाब के डीजीपी के निर्देशों पर और लुधियाना पुलिस कमिश्नर के नेतृत्व में चलाया जा रहा है। अभियान के तहत उन स्थानों पर विशेष नजर रखी जा रही है, जहां पुलिस को नशे की तस्करी या आपराधिक गतिविधियों से जुड़े लोगों के मौजूद होने की आशंका रहती है।

एसीपी ने बताया कि पुलिस टीमों ने बस स्टैंड परिसर में संदिग्ध लोगों और स्थानों की जांच की। इस दौरान कुछ लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान रिकवरी भी हुई है, हालांकि बरामदगी से संबंधित विस्तृत जानकारी पुलिस की ओर से जांच पूरी होने के बाद सामने रखी जा सकती है।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि ऑपरेशन कासो के तहत शहर में संदिग्ध स्थानों पर लगातार चेकिंग की जा रही है। एसीपी सरबजीत सिंह चीमा ने इसे पुलिस की रूटीन चेकिंग और निगरानी प्रक्रिया का हिस्सा बताया।

पुलिस का कहना है कि नशे और अपराध के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।