ब्रेकिंग न्यूज़
लुधियाना : वर्धमान जैन युवक मंडल गोल्फ लिंक ने लगाया मेडिकल चेकअप और ब्लड डोनेशन कैंप

लुधियाना में वर्धमान जैन युवक मंडल गोल्फ लिंक की ओर से मेडिकल चेकअप और ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन किया गया। लोगों की स्वास्थ्य जांच के साथ जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्तदान किया गया।

लुधियाना / सत्ता संदेश

वर्धमान जैन युवक मंडल गोल्फ लिंक की ओर से लुधियाना में विशेष मेडिकल चेकअप एवं ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन किया गया। कैंप के दौरान लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई, वहीं जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्तदान भी किया गया।

कैंप में स्वास्थ्य जांच के लिए पहुंचे लोगों को जरूरी चिकित्सकीय सलाह दी गई। वहीं रक्तदान करने वाले लोगों ने जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए अपना योगदान दिया। आयोजकों ने कहा कि रक्तदान किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

वर्धमान जैन युवक मंडल गोल्फ लिंक के सदस्यों ने कहा कि जरूरतमंद लोगों की सेवा करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। समाज के लोगों की ओर से कैंप में मिले सहयोग और उत्साह को देखते हुए आयोजकों ने जल्द ही दूसरा मेडिकल चेकअप एवं ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित करने की घोषणा की।

आयोजकों ने कहा कि उनका उद्देश्य समाज के जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं और रक्त जैसी महत्वपूर्ण सहायता पहुंचाना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे भी ऐसे सेवा कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और समाज के जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आएं।

कैंप के आयोजन के जरिए स्वास्थ्य जागरूकता के साथ-साथ रक्तदान के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करने का संदेश भी दिया गया।

Wildlife Week 2026: छतबीड़ जू में बर्ड वॉक, ट्राईसिटी के फोटोग्राफर्स और वन्यजीव प्रेमियों ने लिया हिस्सा

वाइल्डलाइफ वीक-2026 के तहत छतबीड़ जू में बर्ड वॉक और नेचर फोटो वॉक आयोजित की गई। चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली के फोटोग्राफर्स व वन्यजीव प्रेमियों ने पक्षियों और प्रकृति को कैमरे में कैद किया।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

पंजाब सरकार के वन एवं वन्यजीव संरक्षण विभाग की ओर से वाइल्ड लाइफ वीक-2026 मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में शनिवार सुबह छतबीड़ जू में विशेष बर्ड वॉक और नेचर फोटो वॉक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली सहित ट्राईसिटी के नामी वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स, आर्ट फोटोग्राफर्स और वन्यजीव प्रेमियों ने हिस्सा लिया।

यह बर्ड वॉक छतबीड़ जू अथॉरिटी और सोशल सब्सटेंस के सहयोग से आयोजित की गई। कार्यक्रम में सोशल सब्सटेंस, ट्राई सिटी फोटो आर्ट सोसाइटी (TAPAS) सहित विभिन्न संस्थाओं से जुड़े सदस्यों ने भाग लिया। सुबह के शांत वातावरण में प्रतिभागियों ने छतबीड़ जू परिसर में पक्षियों की विभिन्न गतिविधियों और प्राकृतिक वातावरण का करीब से अवलोकन किया।

इस दौरान फोटोग्राफरों ने छतबीड़ जू में मौजूद खूबसूरत पक्षियों के साथ-साथ वन्यजीवों और प्राकृतिक दृश्यों को अपने कैमरों में कैद किया। प्रतिभागियों ने पक्षियों की आवाज, उड़ान, भोजन की तलाश और उनके प्राकृतिक आवास के साथ संबंधों को करीब से देखने का अवसर प्राप्त किया।

सोशल सब्सटेंस के अरुण भाटिया ने बताया कि उनकी संस्था फोटोग्राफी और डॉक्युमेंटेशन के माध्यम से लगातार वन्यजीवन और प्रकृति के संरक्षण के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि फोटोग्राफी के माध्यम से लोगों को प्रकृति और वन्यजीवों के करीब लाने के साथ-साथ संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है।

ट्राई सिटी फोटो आर्ट सोसाइटी (TAPAS) के मेंटर दीप भाटिया ने बताया कि उनकी संस्था पिछले करीब 10 वर्षों से फोटोग्राफी के क्षेत्र में कलात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम फोटोग्राफर्स को प्रकृति को समझने और उसे रचनात्मक तरीके से दस्तावेज करने का अवसर प्रदान करते हैं।

कार्यक्रम के दौरान छतबीड़ जू के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने भागीदारी करने वाली संस्थाओं को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया। फोटोग्राफी से जुड़ी संस्थाओं की मांग पर अधिकारियों ने बताया कि वाइल्डलाइफ और आर्ट फोटोग्राफी से जुड़े कलाकारों के लिए कैमरा फीस माफ करने की व्यवस्था की जाएगी।

नेचर वॉक के दौरान प्रतिभागियों को जैव विविधता और प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई। आयोजकों ने बताया कि पक्षी किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण संकेतक होते हैं और उनकी मौजूदगी पर्यावरण के स्वास्थ्य के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देती है।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं और प्रकृति प्रेमियों में पक्षी अवलोकन, जैव विविधता संरक्षण और प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के प्रति रुचि पैदा करना रहा। आयोजकों ने कहा कि ऐसे प्रकृति-आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को वन्यजीवों और जैव विविधता से जोड़ने तथा संरक्षण के लिए सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है।

बर्ड वॉक में ट्राई सिटी फोटो आर्ट सोसाइटी की ओर से दीप भाटिया, हेमंत चौहान, प्रवीण नैन, पीयूष चित्रा, राजेश आर्य, राहुल बक्शी, अशोक गोयल, सुभाष गोयल, संदीप सैनी, अंगसुमन राय चौधरी और तरनजीव सिंह सहित अन्य प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

लुधियाना : अग्निवीर भर्ती रैली शुरू, 6100 युवाओं को सेना में शामिल होने का मौका

लुधियाना के गुरु नानक स्टेडियम में 4 से 10 अक्टूबर तक अग्निवीर भर्ती रैली आयोजित की जा रही है। करीब 6100 युवा भारतीय सेना में भर्ती के लिए शामिल होंगे।

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना के गुरु नानक स्टेडियम में रविवार से अग्निवीर भर्ती रैली की शुरुआत हो गई। हेडक्वार्टर रिक्रूटिंग जोन (पंजाब एवं जम्मू-कश्मीर) के तहत आर्मी रिक्रूटिंग ऑफिस (ARO) लुधियाना द्वारा आयोजित यह भर्ती रैली 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। रैली में क्षेत्र के करीब 6100 इच्छुक युवा भारतीय सेना में शामिल होने के लिए अपनी किस्मत आजमाएंगे।

भर्ती रैली का शुभारंभ ZRO मेजर जनरल एम.एस. सबरवाल, SM ने किया। उन्होंने रैली में चल रही भर्ती गतिविधियों का जायजा लिया और उम्मीदवारों के लिए की गई प्रशासनिक तथा मेडिकल व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने भर्ती में शामिल होने आए युवाओं से बातचीत भी की और देश की सेवा के प्रति उनके उत्साह, अनुशासन और दृढ़ संकल्प की सराहना की।

मेजर जनरल एम.एस. सबरवाल ने भर्ती प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों से भी बातचीत की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूरी भर्ती प्रक्रिया के दौरान पेशेवर मानकों को बनाए रखते हुए निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

भर्ती रैली के पहले दिन करीब 1000 उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया। उम्मीदवारों ने सबसे पहले 1.6 किलोमीटर की दौड़ में अपनी शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन किया। इसके बाद फिजिकल फिटनेस टेस्ट, शारीरिक माप और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया पूरी की गई।

गुरु नानक स्टेडियम में चल रही इस भर्ती रैली को लेकर युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। अगले दिनों में भी बड़ी संख्या में उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे।

CMC लुधियाना ने मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 100 से अधिक बच्चों की सर्जरी का आंकड़ा पार किया

CMC लुधियाना के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग ने मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 100 से अधिक बच्चों की सफल सर्जरी की। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने टीम को बधाई दी।

लुधियाना / सत्ता संदेश

क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC), लुधियाना के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग ने पंजाब सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ (MMSY) के तहत 100 से अधिक बच्चों की सफल सर्जरी करने का महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है। इस उपलब्धि पर पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने CMC लुधियाना के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग को बधाई दी और डॉक्टरों तथा मेडिकल स्टाफ की सेवाओं की सराहना की।

इस उपलब्धि के अवसर पर CMC लुधियाना में आयोजित विशेष कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने हिस्सा लिया। योजना के तहत बच्चों की कई जटिल और गंभीर सर्जरी की गई हैं। इन उपचारों का उद्देश्य पंजाब के शिशुओं और बच्चों को उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना आधुनिक और बेहतर सर्जिकल सेवाएं उपलब्ध कराना है।

डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार सभी नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और समान स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को उच्च गुणवत्ता वाली तृतीयक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि गंभीर बीमारी या सर्जरी की स्थिति में परिवारों पर आर्थिक बोझ न पड़े।

स्वास्थ्य मंत्री ने CMC लुधियाना के पीडियाट्रिक सर्जनों, एनेस्थिसियोलॉजिस्ट, नर्सिंग स्टाफ और प्रबंधन टीम को उनकी मेहनत और समर्पण के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि गंभीर सर्जरी की जरूरत वाले बच्चों का बिना आर्थिक परेशानी के संवेदनशीलता और चिकित्सकीय सटीकता के साथ इलाज करना एक सराहनीय कार्य है।

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को लगातार मजबूत कर रही है, ताकि आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं प्रदेश के दूर-दराज के क्षेत्रों तक भी पहुंचाई जा सकें।

CMC लुधियाना के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग और प्रशासन ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह तथा पंजाब सरकार का सहयोग और समर्थन देने के लिए आभार व्यक्त किया। विभाग ने मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पंजाब के जरूरतमंद और वंचित बच्चों तक विशेष पीडियाट्रिक सर्जिकल सेवाएं पहुंचाने के अपने संकल्प को भी दोहराया।

पंचकूला : ‘नशा मुक्त युवा’ अभियान के तहत राज्य स्तरीय वॉकथॉन, युवाओं ने लिया नशे से दूर रहने का संकल्प

पंचकूला में ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ अभियान के तहत राज्य स्तरीय वॉकथॉन आयोजित हुआ। युवाओं ने नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की शपथ ली।

पंचकूला / सत्ता संदेश

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत मेरा युवा भारत, हरियाणा द्वारा रविवार को ताऊ देवीलाल स्टेडियम, पंचकूला में ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ अभियान के तहत राज्य स्तरीय ‘वॉक फॉर नशा मुक्त युवा’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। 100 सप्ताह के नशा मुक्त युवा अभियान के अंतर्गत आयोजित इस वॉकथॉन में बड़ी संख्या में युवाओं और प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना और नशा मुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना रहा।

कार्यक्रम में पंचकूला के महापौर श्याम लाल बंसल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा मेरा युवा भारत, हरियाणा के राज्य निदेशक आकर्ष दीक्षित, सहायक निदेशक ईशा गुप्ता, जिला युवा अधिकारी पंचकूला स्नेग्धा सिंह, वार्ड पार्षदों और अन्य गणमान्य अतिथियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ से हुई, जिसके बाद राज्य निदेशक आकर्ष दीक्षित ने मुख्य अतिथि और अन्य अतिथियों का स्वागत किया।

महापौर श्याम लाल बंसल ने हरी झंडी दिखाकर वॉकथॉन को रवाना किया। प्रतिभागियों ने ताऊ देवीलाल स्टेडियम से घग्गर नदी पुल तक जागरूकता पदयात्रा निकाली और निर्धारित मार्ग से वापस स्टेडियम पहुंचे। इस दौरान युवाओं ने नशे से दूर रहने, खेलकूद एवं नियमित शारीरिक गतिविधियों को अपनाने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संदेश दिया।

कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों ने नशा मुक्ति की शपथ भी ली। उन्होंने स्वयं नशीले पदार्थों से दूर रहने और अपने परिवार, मित्रों तथा समाज के अन्य लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर महापौर श्याम लाल बंसल ने स्वस्थ और जागरूक युवा शक्ति को विकसित भारत के निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताया और युवाओं से अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की। राज्य निदेशक आकर्ष दीक्षित ने भी युवाओं से जनजागरूकता गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा स्वयंसेवक नशा मुक्ति और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश जन-जन तक पहुंचाकर सकारात्मक बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

वॉकथॉन के बाद राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। राज्य स्तरीय आयोजन के माध्यम से ‘नशा मुक्त भारत—स्वस्थ भारत, सशक्त भारत, विकसित भारत’ का संदेश लोगों तक पहुंचाया गया। युवाओं से अपील की गई कि वे नशा मुक्ति के प्रति जागरूकता को अपने परिवार, मित्रों और समुदाय तक पहुंचाएं तथा स्वस्थ और नशा मुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय योगदान दें।

मोहाली : 1,000 से अधिक युवाओं ने लिया नशामुक्ति का संकल्प, 3 किलोमीटर की ‘वॉक फॉर नशा मुक्त युवा’ में दिखा उत्साह

मोहाली / सत्ता संदेश

युवाओं को नशे से दूर रखने और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से मोहाली के झंजेड़ी स्थित एक निजी यूनिवर्सिटी में राज्य स्तरीय ‘वॉक फॉर नशा मुक्त युवा’ का आयोजन किया गया। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत माय भारत, पंजाब द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में 1,000 से अधिक युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

यह कार्यक्रम देशव्यापी ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत – 100 संडे अभियान’ के तहत आयोजित किया गया। अभियान के पहले महीने की थीम ‘मेरा स्वास्थ्य, मेरा गौरव’ रखी गई है और इसी थीम के तहत देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक ही दिन विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए।

सुबह करीब 11 बजे वॉक को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। विद्यार्थियों, एनएसएस और एनसीसी स्वयंसेवकों, माय भारत स्वयंसेवकों, युवा क्लबों तथा खिलाड़ियों ने करीब 3 किलोमीटर की पैदल यात्रा में हिस्सा लिया। प्रतिभागियों के हाथों में नशामुक्ति का संदेश देती तख्तियां थीं और वे जागरूकता संबंधी नारों के माध्यम से युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दे रहे थे।

वॉक के समापन के बाद सभी प्रतिभागी सभागार में एकत्र हुए, जहां उन्होंने ‘नशा मुक्त युवा संकल्प’ लिया। इसके बाद नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए नशे के दुष्प्रभावों और इससे होने वाले सामाजिक एवं व्यक्तिगत नुकसान के प्रति जागरूक किया गया।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने युवाओं से फिटनेस को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने, नशे से पूरी तरह दूर रहने और अपने साथियों को भी स्वस्थ एवं नशामुक्त जीवन जीने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। प्रतिभागियों को मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 और नशामुक्ति संबंधी सहायता के लिए राष्ट्रीय नशा मुक्ति हेल्पलाइन 14446 की जानकारी भी दी गई।

‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत – 100 संडे अभियान’ का उद्देश्य युवाओं के बीच स्वस्थ जीवनशैली, मानसिक कल्याण और खाली समय के सकारात्मक उपयोग को बढ़ावा देना है। युवा माय भारत पोर्टल के माध्यम से अभियान से जुड़कर इसकी गतिविधियों में भाग ले सकते हैं। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।

पंजाब विश्वविद्यालय में ‘वॉक फॉर नशा मुक्त युवा’ का आयोजन, 350 से अधिक युवाओं ने लिया हिस्सा

चंडीगढ़ के पंजाब विश्वविद्यालय में 100 सप्ताह नशा मुक्त युवा अभियान के तहत ‘वॉक फॉर नशा मुक्त युवा’ का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में 350 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

100 सप्ताह नशा मुक्त युवा अभियान के तहत पंजाब विश्वविद्यालय में रविवार को ‘वॉक फॉर नशा मुक्त युवा’ का आयोजन किया गया। माई भारत चंडीगढ़, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार, स्टेट एनएसएस सेल, चंडीगढ़ प्रशासन और एनएसएस इकाई, पंजाब विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में 350 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम का आयोजन पंजाब विश्वविद्यालय के गांधी भवन में ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ थीम के तहत किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 5:30 बजे माई भारत वॉलंटियर एवं योग प्रशिक्षक सुश्री सारिका के नेतृत्व में वार्म-अप, ज़ुम्बा और रिदमिक योग सत्र से हुई। इन गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों में ऊर्जा और उत्साह का संचार किया गया।

इसके बाद आयोजित औपचारिक कार्यक्रम में माई भारत के यूटी डायरेक्टर शिवधन शर्मा ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ एजुकेशन, सेक्टर-20 के माई भारत-एनएसएस स्वयंसेवकों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से नशे के दुष्प्रभावों और नशा मुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की भूमिका को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

माई भारत चंडीगढ़ के जिला युवा अधिकारी विनय कुमार ने शपथ चक्र के दौरान सभी प्रतिभागियों को नशा मुक्त युवा शपथ दिलाई। प्रतिभागियों ने नशे से दूर रहने और समाज के अन्य लोगों को भी नशे से बचने के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पंजाब विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) मीनाक्षी गोयल ने ‘वॉक फॉर नशा मुक्त युवा’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। वहीं, चंडीगढ़ प्रशासन के राज्य एनएसएस अधिकारी डॉ. नेमी चंद गोलिया सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। पंजाब विश्वविद्यालय के एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अनुपम बहरी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

वॉक के समापन के बाद प्रतिभागियों ने नशा मुक्त समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए सिग्नेचर वॉल पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए और अल्पाहार की व्यवस्था की गई।

यह आयोजन नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने और युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। कार्यक्रम ने नशा मुक्त समाज और विकसित भारत के निर्माण के लिए युवाओं, शैक्षणिक संस्थानों तथा सरकारी एजेंसियों के सामूहिक संकल्प को भी सामने रखा।

बच्चे की चाह में नेपाली युवतियों का कथित सौदा! 1 करोड़ तक की डील का दावा, यूपी-नेपाल बॉर्डर से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल

उत्तर प्रदेश / सत्ता संदेश

नेपाल से युवतियों को कथित तौर पर दलालों के जरिए भारत लाने और संतान की चाह रखने वाले दंपतियों के लिए इस्तेमाल किए जाने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दावा है कि इस पूरे नेटवर्क में लाखों रुपये का लेन-देन होता है और कुछ मामलों में दलालों को करीब 1 करोड़ रुपये तक दिए जाने की बात सामने आई है।

जांच के दौरान सामने आई जानकारी के मुताबिक, ऐसे दंपती इस कथित नेटवर्क का हिस्सा बन रहे हैं, जिनके यहां संतान नहीं है और महिला गर्भधारण करने में सक्षम नहीं है। दावा किया जा रहा है कि कुछ लोग IVF जैसे चिकित्सकीय विकल्पों के बजाय नेपाली युवतियों के जरिए बच्चा पैदा करने का रास्ता अपना रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, नेपाल से दलालों के माध्यम से युवतियों को भारत लाया जाता है। कथित तौर पर उन्हें लंबे समय तक भारत में रखा जाता है और गर्भधारण के बाद बच्चे को जन्म देने तक उनकी निगरानी की जाती है। बच्चा पैदा होने के बाद युवती को वापस नेपाल भेजे जाने का भी दावा किया गया है।

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात पैसों से जुड़ी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एक सौदे में दलाल को कथित तौर पर 1 करोड़ रुपये तक दिए जाने की बात सामने आई है, जबकि युवती को करीब 20 से 25 लाख रुपये मिलने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इन रकम और पूरे नेटवर्क से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

भुटवल तक पहुंची पड़ताल

यूपी से लगी भारत-नेपाल सीमा से मिले एक स्रोत के जरिए जांच के दौरान नेपाल के भुटवल में रहने वाली सुषमा थापा नाम की एक महिला के बारे में जानकारी मिली। दावा किया गया कि वह नेपाली युवतियों की कथित सप्लाई करने वाले नेटवर्क के लिए एजेंट के तौर पर काम करती है।

पड़ताल के दौरान उससे संपर्क किया गया। बातचीत में उसे बताया गया कि एक संपन्न दंपती की शादी को करीब आठ साल हो चुके हैं, लेकिन पत्नी गर्भधारण नहीं कर पा रही है। दंपती कथित तौर पर ऐसी युवती की तलाश में हैं, जो गर्भधारण कर बच्चे को जन्म दे।

कई दौर की बातचीत के बाद, जब कथित एजेंट को यह भरोसा हुआ कि सामने वाला व्यक्ति वास्तविक केस लेकर आया है और धोखे की आशंका नहीं है, तो वह मुलाकात के लिए तैयार हुई। इसके बाद भुटवल पहुंचकर उससे इस पूरे कथित नेटवर्क को लेकर बातचीत की गई।

जांच में सामने आई जानकारी इस बात की ओर इशारा करती है कि संतान की चाह, आर्थिक मजबूरी और बिचौलियों का नेटवर्क मिलकर एक ऐसा तंत्र तैयार कर रहे हैं, जिसमें महिलाओं और युवतियों के शोषण का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

हालांकि, इस मामले में सामने आए दावों की पुष्टि के लिए संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। यदि यह नेटवर्क वास्तव में सक्रिय है, तो इसके पीछे काम करने वाले बिचौलियों, युवतियों की भर्ती करने वालों और ऐसे सौदों में शामिल लोगों की भूमिका की जांच आवश्यक है।

अब AI बोलेगा आदिवासी भाषाओं में! ‘आदिवाणी’ से जनजातीय भाषाओं को मिलेगी डिजिटल आवाज : रंजना चोपड़ा

भारत 700 से अधिक जनजातीय समुदायों और 100 से भी ज़्यादा विशिष्ट जनजातीय भाषाओं और बोलियों का घर है, फिर भी इनमें से बहुत कम के पास अपनी लिपि, शब्दकोश या ऑनलाइन उपस्थिति है। स्वास्थ्य संबंधी किसी सरकारी परामर्श को पढ़ने की कोशिश कर रहे गोंडी भाषी किसान के लिए या पाठ्यपुस्तक में किसी शब्द को खोज रहे संथाली छात्र के लिए डिजिटल दुनिया ने अब तक उनकी भाषा में बात नहीं की थी। ‘आदिवाणी’ एक-एक वाक्य, एक-एक रिकॉर्डिंग और एक-एक अनूदित पृष्ठ के माध्यम से इस स्थिति को बदल रही है।

आदिवाणी एक एआई-आधारित अनुवाद और भाषा प्रौद्योगिकी मंच है, जिसे जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) के अंतर्गत आईआईटी दिल्ली द्वारा विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सीधा और स्पष्ट है: ऐसे उपकरण तैयार करना जो अंग्रेजी और हिंदी को जनजातीय भाषाओं के साथ संवाद करने में सक्षम बनाएं, और जनजातीय भाषाओं को भी लिखित और मौखिक दोनों माध्यमों में उनका उत्तर देने की सुविधा दें।

आदिवाणी चार भाषाओं-संथाली, मुंडारी, भीली और गोंडी-के साथ लाइव हो चुकी है। इसके ठीक पीछे कुई और गारो भाषाएं हैं, जबकि अगले चरण के लिए कातकरी, कोया, कोकबोरोक, बेट्टा कुरुबा, चोधरी, थाडो कुकी और तांगखुल सहित आठ अन्य भाषाओं को तैयार किया जा रहा है।

सिर्फ एक अनुवादक नहीं, एक संपूर्ण टूलकिट

आदिवाणी केवल एक अनुवादक न होकर एक ही छत के नीचे संपूर्ण टूलकिट उपलब्ध कराती है। यह टेक्स्ट-टू-टेक्स्ट ट्रांसलेशन की सुविधा देती है, जो अंग्रेजी या हिंदी पाठ को तुरंत जनजातीय भाषा में और जनजातीय भाषा को वापस हिंदी या अंग्रेजी में बदल देता है; स्पीच-टू-टेक्स्ट (ASR), जो बोली जाने वाली जनजातीय भाषा को लिखित रूप में परिवर्तित करता है और ऐसी भाषाओं के लिए जीवनरेखा का काम करता है जिनके पास धाराप्रवाह पढ़ने वालों की संख्या बहुत कम या न के बराबर है; टेक्स्ट-टू-स्पीच, जो लिखे हुए पाठ से प्राकृतिक जनजातीय वाणी (ऑडियो) तैयार करता है ताकि निरक्षर व्यक्ति भी सुनकर जानकारी प्राप्त कर सकें; और स्पीच-टू-स्पीच, जो एक ऐसी बहु-चरणीय प्रणाली है जिससे अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले दो लोग लगभग वास्तविक समय में एक-दूसरे की बात समझ सकते हैं। इस प्लेटफॉर्म में ‘ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन’ (OCR) की सुविधा भी है, जो केवल कागजों पर मौजूद पुरानी पाठ्यपुस्तकों, लोक पांडुलिपियों, प्राथमिक पुस्तकों और शब्दकोशों को डिजिटाइज़ करती है-जो अक्सर किसी बोली के अंतिम बचे हुए दस्तावेज़ होते हैं। इसके साथ ही एक सार्वजनिक मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल भी उपलब्ध कराया गया है, जिसमें निरंतर सुधार के लिए शब्दकोश, सीखने के मॉड्यूल और फीडबैक तंत्र मौजूद हैं।

हाशिए से मुख्यधारा के केंद्र में लाना

दशकों से भारत की जनजातीय भाषाएं देश के डिजिटल और प्रशासनिक जीवन के हाशिए पर रही हैं। मौखिक इतिहास, पारिस्थितिक ज्ञान और सांस्कृतिक स्मृतियों से समृद्ध होने के बावजूद वे इंटरनेट, एआई प्रणालियों और अक्सर नीतियों से लगभग अदृश्य रही हैं। आदिवाणी इस स्थिति को बदल रही है। कल्याणकारी योजनाओं की अधिसूचनाएं, स्वास्थ्य परामर्श या एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों के अध्याय जो कभी केवल हिंदी या अंग्रेजी में उपलब्ध थे, अब संथाली या भीली में सटीकता और सम्मान के साथ रूपांतरित किए जा सकते हैं और किसी निरक्षर व्यक्ति को बोलकर सुनाए जा सकते हैं। दूसरी ओर, सरकारी अधिकारी, शिक्षक और स्वास्थ्य कार्यकर्ता भी यह समझ सकते हैं कि कोई जनजातीय नागरिक अपनी भाषा में क्या कहना चाह रहा है। यह संवाद दोनों तरफ से होता है और यही इसकी मुख्य विशेषता है: आदिवाणी सिर्फ जनजातीय समुदायों को मुख्यधारा तक पहुंच प्रदान नहीं कर रही है, बल्कि मुख्यधारा को भी जनजातीय भारत तक पहुंच उपलब्ध करा रही है।

यह परियोजना जनजातीय भाषाओं को एआई के लिए केवल डेटा स्रोत नहीं मानती, बल्कि उन्हें मौखिक परंपरा, कृषि, पारिस्थितिकी और सामुदायिक पहचान से जुड़ी जीवंत ज्ञान प्रणालियों के रूप में देखती है।

सिर्फ जनजातीय भारत के लिए नहीं-सभी के लिए एक मंच

आदिवाणी का दायरा केवल जनजातीय परिवारों तक ही सीमित नहीं है। शोधकर्ताओं और भाषाविदों को दुनिया की सबसे कम प्रलेखित भाषाओं के लिए एक प्रामाणिक और उपयोगी डेटासेट मिलता है। जनजातीय जिलों में तैनात सिविल सेवकों, डॉक्टरों, शिक्षकों और एनजीओ के फील्ड कार्यकर्ताओं को (जिनमें से अधिकांश स्वयं जनजातीय नहीं हैं) एक रियल-टाइम अनुवादक साथी मिल जाता है, जो असहज और त्रुटिपूर्ण संचार को एक सार्थक संवाद में बदल देता है। भाषाविज्ञान और नृविज्ञान के छात्रों को ऐसी डिजिटाइज़्ड पांडुलिपियां और मौखिक अभिलेखागार मिलते हैं, जो अन्यथा स्थानीय पुस्तकालयों में बिना देखे नष्ट हो जाते। इसके अलावा प्रत्येक भारतीय को डिजिटल रिकॉर्ड में एक महत्वपूर्ण सुधार का लाभ मिलता है: जो भाषाएं केवल स्मृति में जीवित रहने के खतरे का सामना कर रही थीं, अब उन्हें ऑनलाइन सर्च करने, बोलने और सिखाने के लिए एक मंच मिल गया है।

यही बात आदिवाणी को एक साधारण अनुवाद ऐप से कहीं अधिक बनाती है; यह समावेशन का एक ऐसी सार्वजनिक अवसंरचना है जिसे समुदाय को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है, न कि केवल एक प्राप्तकर्ता के रूप में।

पहले समुदाय, फिर तकनीक

आदिवाणी की सबसे विशिष्ट पहचान इसके एआई मॉडल नहीं, बल्कि इसकी कार्यप्रणाली है। मूल भाषियों, अनुवादकों, क्षेत्रीय भाषाविदों और समुदाय के वरिष्ठ नागरिकों को केवल एनोटेटर (डेटा विश्लेषक) नहीं, बल्कि ज्ञान भागीदार माना जाता है। प्रत्येक डेटासेट एक त्रि-स्तरीय कार्यप्रवाह मेकर-चेकर-सुपरचेकर से होकर गुजरता है, जहां समुदाय के समीक्षक उन सूक्ष्म बदलावों को पकड़ते हैं जिनके तहत एआई अक्सर किसी क्षेत्रीय भाषा को हिंदी या अंग्रेजी के अनुरूप ढालने का प्रयास करता है-जैसे कोई छूटा हुआ प्रत्यय, अत्यधिक सरलीकृत मुहावरा या पारंपरिक बोलचाल का खोया हुआ लहज़ा। मशीन द्वारा किए गए अनुवाद को कभी भी अंतिम नहीं माना जाता; मुख्य डेटाबेस में शामिल करने से पहले उसे सुधार के लिए मूल भाषियों के पास भेजा जाता है। यह ऐसा एआई विकास है जो सहमति, सांस्कृतिक सम्मान और इस समझ पर आधारित है कि भाषा केवल डेटासेट नहीं, बल्कि किसी समाज की अपनी पहचान को याद रखने का माध्यम है।

यहीं पर राज्य जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRIs) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। किसी वाक्य के एआई मॉडल तक पहुंचने से बहुत पहले, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों के TRIs ज़मीनी स्तर पर डेटा संकलन के पूरे प्रयास का संचालन करते हैं। वे मूल भाषियों को जोड़ते हैं, विभिन्न गांवों और ब्लॉकों में बोली की भिन्नताओं की पुष्टि करते हैं, और प्रशिक्षण डेटा में शामिल करने से पहले प्रत्येक अनूदित या लिप्यंतरित नमूने की जांच करते हैं। उनका क्षेत्रीय अनुभव यह तय करता है कि कौन सी रिकॉर्डिंग प्रामाणिक है और अनुवाद में किन मुहावरों का मूल अर्थ खो गया है। इस प्रकार वे समुदाय की स्थानीय भाषा और उपयोगी डिजिटल डेटा के बीच पहली जांच कड़ी के रूप में कार्य करते हैं। TRIs द्वारा ज़मीनी स्तर पर की जाने वाली इस सतत समीक्षा के बिना, आदिवाणी के मॉडल में वही विसंगतियां आ सकती थीं जिन्हें दूर करने के लिए यह परियोजना शुरू की गई है।

आगे की राह 

आदिवाणी का कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है। अगले नौ महीनों में इसकी योजना दस और भाषाओं को जोड़ने, अपनी स्पीच रिकॉग्निशन और वॉयस तकनीक को बेहतर बनाने तथा सत्यापित रिकॉर्डिंग का एक बहुत बड़ा संग्रह तैयार करने की है, जिसमें प्रति भाषा सैकड़ों-हजारों रिकॉर्डिंग शामिल होंगी। आंकड़ों से परे, आदिवाणी एक बड़े उद्देश्य का प्रतीक है: यह इस बात का प्रमाण है कि तकनीक जनजातीय भाषाओं को मिटाने के बजाय उनका संरक्षण और संवर्धन कर सकती है। ऐसे देश में जहां प्रत्येक  कुछ वर्षों में भाषाएं विलुप्त हो रही हैं, आदिवाणी जनजातीय समुदायों को उनकी अपनी आवाज़ और शर्तों पर सुने जाने का अधिकार देती है, और बाकी भारत को उन्हें सुनने की एक ठोस वजह प्रदान करती है।

(लेखिका सचिव- जनजातीय कार्य मंत्रालय हैं)

नेक्स्ट-जेनरेशन GSTऔर भारत के विकास का अगला चरण : निर्मला सीतारमण

‘विकसित भारत’ बनने के भारत के संकल्प के लिए एक ऐसी अर्थव्यवस्था की आवश्यकता है जिसमें हर स्तर और आकार के उद्यम फल-फूल सकें, चाहे उनकी शुरुआत कहीं से भी हुई हो। पिछले बारह वर्षों में हमारी सरकार ने इन अनुकूल परिस्थितियों के निर्माण के लिए निरंतर कार्य किया है। वर्ष 2017 में जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) लागू होने से अप्रत्यक्ष कराधान के लिए एक साझा राष्ट्रीय ढांचा स्थापित हुआ। ‘नेक्स्ट- जेनरेशन का जीएसटी’ (Next-Gen GST) नौ वर्षों के क्रियान्वयन तथा करदाताओं और राज्यों के अनुभवों के आधार पर इसी प्रयास को आगे बढ़ाता है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप, नेक्स्ट- जेनरेशन जीएसटी की परिकल्पना दो परस्पर जुड़े उद्देश्यों के साथ की गई थी: कर दरों को कम व तर्कसंगत बनाना और अनुपालन को अधिक सरल बनाना। दरों में किए गए संशोधन 22 सितंबर 2025 से प्रभावी हुए। प्रक्रियात्मक सुधारों का अगला चरण शीघ्र ही जीएसटी परिषद के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। सम्मिलित रूप से, इन प्रयासों का उद्देश्य परिवारों को राहत देना, व्यवसायों को अधिक निश्चितता प्रदान करना और करदाताओं के लिए एक ऐसी प्रणाली सुनिश्चित करना है जिसमें वे बिना किसी अनावश्यक कठिनाई के अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।

राज्य इस पूरी यात्रा में बराबर के साझेदार रहे हैं। वे परिषद में अपनी प्राथमिकताओं और अनुभवों को लेकर आए, निर्णयों को आकार देने में सहयोग किया और उनके क्रियान्वयन का दायित्व संभाला। मैं इस प्रतिबद्धता के लिए उनका आभार व्यक्त करती हूँ। जीएसटी की प्रगति प्रत्येक सरकार के उत्तरदायित्वों का सम्मान करते हुए एक साझा राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने की इसी तत्परता पर टिकी है।

इसके परिणाम विश्वास को सुदृढ़ करते हैं। अक्टूबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच, दर्ज की गई कर-योग्य आपूर्ति के मूल्य में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 25.8% की वृद्धि हुई। कर दरों की हल्की संरचना के साथ-साथ दर्ज आर्थिक गतिविधियों में भी व्यापक विस्तार देखा गया है। यह उस सुधार के लिए एक अत्यंत उत्साहवर्धक आधार है जिसका उद्देश्य उद्यमों और सार्वजनिक वित्त दोनों को संबल प्रदान करना है।

यह सुदृढ़ता हालिया राजस्व आंकड़ों में स्पष्ट दिखाई देती है। अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान सकल जीएसटी संग्रह 12.46 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि से 11.6% अधिक है। जून से सितंबर तक के प्रत्येक महीने में वार्षिक आधार पर दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज की गई; इन चार महीनों का कुल संग्रह मिलकर लगभग 15% की गति से बढ़ा। कर वापसी (रिफंड) के बाद शुद्ध संग्रह में भी इस छमाही के दौरान 10.4% की वृद्धि हुई। इस प्रकार, करदाताओं को दी गई राहत और विकास के लिए उपलब्ध संसाधनों में वृद्धि साथ-साथ हुई है।

इस विस्तार का दायरा उसके पैमाने जितना ही महत्वपूर्ण है। सभी 11 क्षेत्रक समूहों और सभी प्रमुख राज्यों में दर्ज कर-योग्य आपूर्ति में वृद्धि देखी गई। भारत जैसी विविध अर्थव्यवस्था में यह व्यापक प्रसार अत्यंत महत्वपूर्ण है। विभिन्न क्षेत्रों और भौगोलिक हिस्सों में होने वाली यह वृद्धि अधिक से अधिक व्यवसायों को विस्तार लेते बाज़ारों में भाग लेने का अवसर देती है, और इसके परिणामस्वरूप उत्पन्न मांग, निवेश तथा रोज़गार से अधिकाधिक समुदायों को लाभान्वित करती है।

सुधार के बाद की अवधि की तुलना में उपभोक्ताओं को की गई प्रत्यक्ष बिक्री (बी2सी) में भी 26.7% की बढ़ोतरी हुई। जब कर राहत का प्रभाव कीमतों में दिखाई देता है, तो परिवारों के पास अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने या बचत करने के लिए अधिक गुंजाइश होती है। उपभोक्ता राहत और उद्यम विकास आपस में गहराई से जुड़े हैं: परिवारों की क्रय शक्ति व्यवसायों द्वारा दी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की मांग को बनाए रखती है। इसका लाभ परिवार से लेकर खुदरा विक्रेता, आपूर्तिकर्ता और उत्पादक तक सभी तक पहुंचता है।

लघु और मध्यम उद्यमों के लिए एक राष्ट्रीय बाज़ार तभी सार्थक होता है जब वह उनके स्थानीय परिवेश से परे ग्राहकों तक पहुँचने का व्यावहारिक मार्ग प्रशस्त करे। द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों के व्यवसायों को स्थानीय स्तर पर निवेश और रोज़गार जारी रखते हुए ऐसे संबंध बनाने में सक्षम होना चाहिए। वहीं दूसरी ओर, इन शहरों में विस्तार करने वाले उद्यम स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं और वितरकों के लिए नए अवसर सृजित कर सकते हैं। जीएसटी का साझा ढांचा इन कड़ियों को सुदृढ़ करता है; और सरल प्रशासनिक व्यवस्था को इन्हें बनाए रखना और भी सहज बनाना होगा।

इस व्यवस्था में सहभागिता अत्यंत व्यापक रही है। अगस्त के अंत तक केंद्र और राज्य क्षेत्राधिकारों के अंतर्गत कुल जीएसटी पंजीकरण लगभग 1.71 करोड़ तक पहुंच गए, जो एक वर्ष पहले की तुलना में लगभग 15% अधिक हैं। अप्रैल-जुलाई 2026 की कर अवधियों के लिए, निर्धारित तिथि तक दाखिल किए गए जीएसटीआर-3बी रिटर्न पिछले वर्ष की समान अवधियों की तुलना में 12.6% अधिक थे। ये सुधार प्रशासन पर एक समान दायित्व भी डालते हैं: नियमित अनुपालन को विश्वसनीय सेवा, स्पष्ट मार्गदर्शन और समस्याओं के समयबद्ध समाधान द्वारा समर्थित किया जाना चाहिए।

इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की कार्यप्रणाली इस अनुभव का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा है। सुधार-उपरांत आंकड़े दर्शाते हैं कि इनपुट टैक्स क्रेडिट के माध्यम से चुकाई गई कर देयता का अनुपात बढ़ा है, जबकि कर-योग्य आपूर्ति के सापेक्ष संचित क्रेडिट में कमी आई है। यह उन व्यवसायों के लिए उत्साहवर्धक है जो पात्र क्रेडिट के प्रभावी उपयोग पर निर्भर करते हैं। किसी छोटे उद्यम के लिए उसकी कार्यशील पूंजी ही यह तय करती है कि वह कितनी सुगमता से कच्चा माल खरीद सकता है, कोई ऑर्डर पूरा कर सकता है और अगला काम हाथ में ले सकता है।

कर वापसी (रिफंड) भी उतनी ही प्रासंगिक है। अप्रैल-सितंबर के दौरान लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये की धनराशि रिफंड के रूप में लौटाई गई। व्यवसायों के प्राप्य बकाये को वापस लौटाना एक सुव्यवस्थित कर प्रणाली का अनिवार्य अंग है। इस प्रक्रिया में अधिक निश्चितता और पूर्वानुमेयता उद्यमों को अधिक आत्मविश्वास के साथ खरीद और उत्पादन की योजना बनाने में सहायता करेगी। किसी करदाता को देय रिफंड प्राप्त होने का अनुभव प्रशासनिक दक्षता का एक प्रमुख पैमाना होता है।

राज्यों की राजस्व स्थिति भी अधिक सुदृढ़ हुई है। इस वर्ष अप्रैल-सितंबर के दौरान एकीकृत माल और सेवा कर (आईजीएसटी) निपटान में उनके हिस्से सहित राज्यों की कुल एसजीएसटी प्राप्तियों में लगभग 16% की वृद्धि हुई। ये संसाधन बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं में निवेश को गति प्रदान करते हैं, जिससे परिवारों और उद्यमों को अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बेहतर परिवेश मिलता है। इस प्रकार, ये लाभ एक-दूसरे को सशक्त बनाते हैं: परिवारों को मिलने वाली राहत मांग को बढ़ावा देती है, उद्यम आर्थिक गतिविधियों को सुदृढ़ करते हैं, और सार्वजनिक राजस्व विकास को निरंतर बनाए रखने में सहायक होता है।

यह अनुभव भविष्य में किए जाने वाले कार्यों को भी रेखांकित करता है। एक विकासशील प्रणाली को इस बात के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए कि छोटे प्रतिभागियों पर इसका कितना आर्थिक व समय संबंधी भार पड़ता है। उनका समय और संसाधन सीमित होते हैं। रिटर्न दाखिल करने, क्रेडिट या रिफंड की व्यवस्था में प्रत्येक सुधार से ऐसे संसाधनों की अधिक से अधिक बचत होनी चाहिए, ताकि उनका उपयोग व्यवसाय के संचालन और विस्तार में किया जा सके।

7 अक्टूबर को जीएसटी परिषद के समक्ष रखे जाने वाले प्रस्ताव राज्यों के साथ निरंतर विचार-विमर्श और समन्वय के माध्यम से तैयार किए गए हैं। ये प्रस्ताव अनुपालन में लगने वाले समय और लागत को कम करने के उद्देश्य से पंजीकरण, रिटर्न, रिफंड, विवादों के निपटारे और इनपुट टैक्स क्रेडिट के सुगम प्रवाह से जुड़े हैं। करदाताओं का अनुभव ही इसके क्रियान्वयन का मुख्य मार्गदर्शक बना रहना चाहिए।

जीएसटी की बढ़ती परिपक्वता हमें सुधारों के अगले चरण के लिए एक सशक्त आधार प्रदान करती है। स्पष्टता, निश्चितता और करदाता के प्रति सम्मान की यही प्रतिबद्धता प्रत्यक्ष करों से जुड़े हमारे कार्य को भी दिशा देती है। एक भरोसेमंद कर प्रणाली उद्यमों को अपने तात्कालिक दायित्वों से आगे बढ़कर योजना बनाने तथा ऐसे अवसरों में निवेश करने में सक्षम बनाती है जिनके फलने-फूलने में समय लगता है। वे चाहे कहीं भी कार्य कर रहे हों, उन्हें यह भरोसा दिलाना प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप एक ‘विकसित भारत’ की आर्थिक शक्ति के निर्माण में सहायक सिद्ध होता है।

******

(लेखिका केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री हैं)