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सुखविंदर सिंह बिंद्रा ने बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से की मुलाकात

लुधियाना: भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तहत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल डिफेंस (NISD) के सदस्य और नेशनल कंसल्टेटिव कमिटी ऑन ड्रग रिहैबिलिटेशन (NCCDR) के स्पेशल इनवाइटी सदस्य तथा पंजाब यूथ डेवलपमेंट बोर्ड के पूर्व चेयरपर्सन सुखविंदर सिंह बिंद्रा ने बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मुलाकात की।

इस दौरान सुखविंदर सिंह बिंद्रा ने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से आशीर्वाद लिया और समाज की भलाई एवं खुशहाली के लिए प्रार्थना की।

मुलाकात के दौरान बिंद्रा ने कहा कि समाज की तरक्की, एकता और खुशहाली को बढ़ावा देने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने की जरूरत है। उन्होंने लोगों से समाज की भलाई के लिए एकजुट होकर काम करने की अपील की।

वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान और गरिमा: विकसित भारत की आधारशिला

बी. एल. वर्मा, सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री

हर वर्ष 1 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाया जाता है। यह दिवस हमें वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, अधिकारों, सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः स्मरण करने का अवसर प्रदान करता है। बढ़ती जीवन-प्रत्याशा आधुनिक समाज की महत्वपूर्ण उपलब्धि है, किंतु दीर्घ जीवन तभी सार्थक है, जब प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक को सुरक्षा, सम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता के साथ जीवन जीने का अवसर मिले।

भारत में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण को सरकार की व्यापक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय वरिष्ठ नागरिकों के लिए आश्रय, स्वास्थ्य-संबंधी सहायता, सामाजिक सुरक्षा, सुगम जीवन तथा गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।

सरकार का दृष्टिकोण केवल कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य ऐसा समावेशी वातावरण तैयार करना है, जिसमें वरिष्ठ नागरिक समाज की मुख्यधारा में सक्रिय भागीदार बने रहें और उनके अनुभव, ज्ञान तथा जीवन-मूल्यों का लाभ आने वाली पीढ़ियों को प्राप्त हो।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुदृढ़ संस्थागत व्यवस्था

जिन वरिष्ठ नागरिकों के पास परिवार अथवा अन्य प्रकार का पर्याप्त सहारा उपलब्ध नहीं है, उनके लिए आश्रय और देखभाल सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

एकीकृत वरिष्ठ नागरिक कार्यक्रम (Integrated Programme for Senior Citizens – IPSrC) के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2014-15 से वरिष्ठ नागरिकों के लिए वृद्धाश्रम और निरंतर देखभाल गृह संचालित किए जा रहे हैं। गैर-सरकारी संगठनों, पंचायतों और स्थानीय निकायों के माध्यम से संचालित इन संस्थानों के माध्यम से 10.76 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को सहायता प्रदान की गई है।

इस दिशा में सरकारी वित्तीय सहायता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह सहायता लगभग 15 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष से बढ़कर 124 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।

यह वृद्धि वरिष्ठ नागरिकों के लिए संस्थागत देखभाल और सामाजिक सुरक्षा के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

सहायक उपकरणों के माध्यम से आत्मनिर्भरता

वरिष्ठ नागरिकों के लिए आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने में सहायक उपकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पढ़ने, सुनने, चलने-फिरने और दैनिक गतिविधियों को सहज बनाने वाले उपकरण उनके जीवन की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार ला सकते हैं।

इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय वयोश्री योजना (Rashtriya Vayoshri Yojana) के अंतर्गत देशभर में विभिन्न शिविरों का आयोजन किया गया है। इन शिविरों के माध्यम से 9 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को 53 लाख से अधिक निःशुल्क सहायक उपकरण वितरित किए गए हैं।

इन उपकरणों में व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, चलने की छड़ियाँ और चश्मे आदि शामिल हैं। इस पहल का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को दैनिक जीवन में अधिक आत्मनिर्भर बनाना और उनकी गतिशीलता तथा सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देना है।

एल्डरलाइन: सहायता और मार्गदर्शन का सशक्त माध्यम

वरिष्ठ नागरिकों को आवश्यकता के समय सहायता, परामर्श और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एल्डरलाइन हेल्पलाइन 14567 संचालित की जा रही है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित यह हेल्पलाइन वर्ष 2021 में प्रारंभ की गई थी।

हेल्पलाइन पर 29 लाख से ज़्यादा कॉल आए हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल डिफ़ेंस (NISD), जो इसके लागू होने की निगरानी करता है, ने वित्त वर्ष 2021 से 21 सितंबर, 2026 तक जानकारी, मार्गदर्शन, भावनात्मक सहयोग और फ़ील्ड इंटरवेंशन से जुड़े 8.67 लाख से ज़्यादा ऐसे कॉल पर कार्रवाई की है, जिन पर काम किया जा सकता था; यह एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।

इसके साथ ही वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने पर भी ध्यान दिया गया है। वर्ष 2023 से अब तक 30,000 से अधिक जेरियाट्रिक केयरगिवर्स को प्रशिक्षित किया गया है। ये प्रशिक्षित देखभालकर्ता देश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में वरिष्ठ नागरिकों की सहायता कर रहे हैं।

केवल सरकारी योजनाएँ नहीं, सामाजिक सहभागिता भी आवश्यक

वरिष्ठ नागरिकों के लिए संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ समाज में संवेदनशीलता और सहभागिता की भावना विकसित करना भी आवश्यक है।

शहरीकरण, रोजगार के अवसरों, शिक्षा और बढ़ती गतिशीलता के कारण परिवारों की संरचना में परिवर्तन आया है। इसके परिणामस्वरूप अनेक वरिष्ठ नागरिक अपने बच्चों और पोते-पोतियों से अलग रह रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में अंतरपीढ़ीगत संवाद और सहभागिता का महत्व और बढ़ जाता है।

वरिष्ठ नागरिक केवल सहायता प्राप्त करने वाले व्यक्ति नहीं हैं। उनके पास जीवन का व्यापक अनुभव, ज्ञान, कौशल और सामाजिक स्मृतियाँ हैं। वे परिवार, समुदाय और समाज के लिए मार्गदर्शक, स्वयंसेवक तथा प्रेरणास्रोत की भूमिका निभा सकते हैं।

इसी प्रकार युवा पीढ़ी अपनी ऊर्जा, तकनीकी ज्ञान और बदलते समय की समझ के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को अधिक सहज बना सकती है। दोनों पीढ़ियों के बीच यह संवाद एक संवेदनशील और समावेशी समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

अंतरपीढ़ीगत संबंधों को बढ़ावा देने की पहल

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा वरिष्ठ नागरिकों और युवा पीढ़ी के बीच संवाद एवं संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।

विद्यालयों के माध्यम से ‘दादा-दादी मिलन समारोह’ जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें बच्चों को वरिष्ठ नागरिकों के साथ संवाद करने, उनकी जीवन-कथाएँ सुनने और उनके अनुभवों से सीखने का अवसर मिला।

इसी प्रकार वॉकाथॉन जैसे कार्यक्रमों ने भी वरिष्ठ नागरिकों और युवा पीढ़ी को साथ लाने तथा सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल के क्षेत्र में कार्यरत सामाजिक एवं आध्यात्मिक संगठनों, जैसे ब्रह्माकुमारीज़, रामकृष्ण मिशन एवं अखिल विश्व गायत्री परिवार आदि, के साथ मंत्रालय द्वारा 7 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं। 

वर्ष 2024 से 2026 के बीच देशभर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के अनुभवों, प्रयासों और प्रेरक प्रसंगों को मंत्रालय द्वारा ‘स्नेह ई-बुक’ में संकलित किया गया है।

भारतीय परंपरा में वरिष्ठजनों का सम्मान

भारतीय संस्कृति में वरिष्ठजनों के सम्मान और उनके अनुभवों से सीखने की परंपरा सदियों पुरानी है। तैत्तिरीय उपनिषद में शिक्षा पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को दिए गए उपदेश में “मातृदेवो भव, पितृदेवो भव” का संदेश दिया गया है।

यह केवल माता-पिता के प्रति सम्मान का संदेश नहीं है, बल्कि भारतीय जीवन-दृष्टि में परिवार, अनुभव और ज्ञान के प्रति सम्मान की व्यापक भावना को भी अभिव्यक्त करता है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि इन मूल्यों को आधुनिक सामाजिक व्यवस्था के साथ जोड़ते हुए अंतरपीढ़ीगत संवाद को और मजबूत किया जाए।

सेवा से सामाजिक संवेदनशीलता तक

वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए सरकार द्वारा योजनाएँ और संस्थागत व्यवस्थाएँ विकसित की जा रही हैं, लेकिन सामाजिक संवेदनशीलता और व्यक्तिगत सहभागिता भी उतनी ही आवश्यक है।

इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस ‘सेवा संकल्प अभियान’ की अवधि में पड़ रहा है। 17 सितंबर से देशभर में संचालित इस सेवा अभियान के माध्यम से सेवा और सामाजिक सहभागिता की भावना को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

वरिष्ठ नागरिकों की सेवा केवल बड़े कार्यों तक सीमित नहीं है। किसी बुजुर्ग पड़ोसी को दैनिक कार्यों में सहयोग देना, उन्हें डिजिटल सेवाओं का उपयोग करने में सहायता करना, किसी आवश्यक प्रपत्र को भरने में मदद करना, बैंक अथवा अस्पताल जाने में साथ देना या उनकी बात धैर्यपूर्वक सुनना भी सेवा का महत्वपूर्ण रूप है।

ऐसी छोटी-छोटी पहल वरिष्ठ नागरिकों में आत्मविश्वास और सामाजिक जुड़ाव की भावना को मजबूत करती हैं।

विकसित भारत में वरिष्ठ नागरिकों की महत्वपूर्ण भूमिका

‘सबका साथ, सबका विकास’ के मार्गदर्शक दृष्टिकोण के अनुरूप वरिष्ठ नागरिकों का कल्याण समावेशी विकास का महत्वपूर्ण अंग है।

सरकार नीतियाँ और संस्थागत ढाँचा उपलब्ध करा सकती है, लेकिन वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सम्मान, अपनत्व और संवेदनशीलता का वातावरण समाज की सामूहिक भागीदारी से ही निर्मित होता है।

विकसित भारत केवल आर्थिक प्रगति और आधुनिक अवसंरचना का नाम नहीं है। यह ऐसा भारत है जहाँ प्रत्येक नागरिक, चाहे उसकी आयु कुछ भी हो, सम्मान, सुरक्षा और गरिमा के साथ जीवन जी सके।

वरिष्ठ नागरिक हमारे समाज की जीवंत स्मृति, अनुभव और ज्ञान के वाहक हैं। उनके अनुभवों को अगली पीढ़ी से जोड़ना हमारी सामाजिक जिम्मेदारी भी है और राष्ट्रीय आवश्यकता भी।

आज हम वरिष्ठ नागरिकों के साथ जितना सम्मान, धैर्य और संवेदनशीलता का व्यवहार करेंगे, वही आने वाले भारत के सामाजिक स्वरूप को निर्धारित करेगा।

एक संवाद, एक घंटा और एक आत्मीय संबंध—किसी वरिष्ठ नागरिक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत के लिए इतना ही पर्याप्त हो सकता है।

विकसित भारत का संकल्प तभी पूर्ण होगा, जब प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक को सम्मान, सुरक्षा और गरिमा के साथ जीने का अवसर मिले और प्रत्येक नई पीढ़ी अपने बुजुर्गों के अनुभवों और जीवन-मूल्यों से सीखने का अवसर प्राप्त करे।

पूनम अरोड़ा ने संभाला PUNBUS की डायरेक्टर का चार्ज, यात्रियों की सुविधाओं पर रहेगा फोकस

लुधियाना / सत्ता संदेश

पूनम अरोड़ा ने पंजाब स्टेट बस स्टैंड मैनेजमेंट कंपनी (PUNBUS) की डायरेक्टर का चार्ज संभाल लिया है। नई जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने इस अवसर के लिए पंजाब सरकार का विशेष रूप से धन्यवाद किया।

ट्रांसपोर्ट विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी अनुराग वर्मा IAS ने पूनम अरोड़ा को नई जिम्मेदारी संभालने पर बधाई दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि पूनम अरोड़ा के नेतृत्व में PUNBUS के कामकाज को और मजबूती मिलेगी।

इस अवसर पर PUNBUS के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव कुमार गुप्ता IAS भी मौजूद रहे। उन्होंने डायरेक्टर पूनम अरोड़ा को PUNBUS के कामकाज और विभिन्न व्यवस्थाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

पूनम अरोड़ा ने कहा कि वह अपनी नई जिम्मेदारी को पूरी मेहनत, ईमानदारी और लगन के साथ निभाएंगी। उन्होंने कहा कि PUNBUS पंजाब सरकार के पंजाब रोडवेज के तहत संचालित एक जानी-मानी और भरोसेमंद बस सेवा है। इसकी प्रतिष्ठा और भरोसे को बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यात्रियों के सफर को अधिक सुविधाजनक और आरामदायक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों को बस यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए हर मुमकिन कोशिश की जाएगी।

किला रायपुर रूरल गेम्स के लंबे समय तक सेक्रेटरी रहे परमजीत सिंह ग्रेवाल का अमेरिका में निधन

लुधियाना / सत्ता संदेश

किला रायपुर रूरल गेम्स (ओलंपिक्स) से लंबे समय तक जुड़े रहे और गेम्स के सेक्रेटरी की जिम्मेदारी निभाने वाले परमजीत सिंह ग्रेवाल का अमेरिका में निधन हो गया। वह 76 वर्ष के थे। पंजाब की स्पोर्ट्स कम्युनिटी में उन्हें प्यार से ‘पम्मी’ के नाम से जाना जाता था।

परमजीत सिंह ग्रेवाल का अंतिम संस्कार 3 अक्टूबर को सुबह 10 बजे नॉर्थ सैक्रामेंटो फ्यूनरल होम, एल कैमिनो एवेन्यू के श्मशान घाट में किया जाएगा। यह जानकारी उनके बेटे शवि ग्रेवाल ने दी।

परमजीत सिंह ग्रेवाल ने अपने करियर की शुरुआत हॉकी कोच के तौर पर की। उन्होंने गवर्नमेंट गुरु नानक कॉलेज काला अफगाना और गवर्नमेंट कॉलेज लुधियाना में हॉकी कोच के रूप में सेवाएं दीं। इसके बाद पंजाब स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट में भी लंबे समय तक हॉकी कोच के तौर पर कार्य किया।

किला रायपुर गेम्स से उनका रिश्ता पारिवारिक भी था। उनके पिता स. तारा सिंह ग्रेवाल किला रायपुर गेम्स के संस्थापकों में शामिल थे और लंबे समय तक इन खेलों के सेक्रेटरी भी रहे।

पंजाबी लोक विरासत एकेडमी के चेयरमैन प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने परमजीत सिंह ग्रेवाल को याद करते हुए कहा कि गवर्नमेंट कॉलेज लुधियाना में पढ़ाई के दौरान उनका उनसे संपर्क हुआ था और यह संबंध आखिरी समय तक बना रहा। उन्होंने परमजीत के साथ जुड़ी पुरानी यादों को साझा करते हुए कहा कि उनके साथ बिताया समय आज भी उनकी यादों में ताजा है।

परमजीत सिंह ग्रेवाल पटियाला स्थित NIS में प्रसिद्ध गायक गुरदास मान और हॉकी से जुड़े गिल सुरजीत के कोर्स मेट भी रहे। खेलों के साथ-साथ उनका पंजाबी कला और संस्कृति से भी गहरा जुड़ाव था।

जाने-माने गीतकार और परमजीत के करीबी दोस्त शमशेर सिंह संधू ने बताया कि किला रायपुर गेम्स में उनकी पहल और सरदार जगदेव सिंह जस्सोवाल सहित अन्य साथियों के सहयोग से कई नामी पंजाबी गायकों को कार्यक्रमों में मेहमान के तौर पर बुलाया गया। इनमें अमरजीत गुरदासपुरी, मोहम्मद सादिक, रंजीत कौर, सुरिंदर शिंदा, कुलदीप मानक, जसवंत संडीला, सुरजीत बिंद्राखिया, जैज़ी बी, हंस राज हंस, हरभजन मान सहित कई कलाकार शामिल रहे।

किला रायपुर गेम्स के दौरान पंजाबी थिएटर को भी मंच मिला और प्रसिद्ध रंगकर्मी सरदार गुरशरण सिंह के नाटकों का कई बार शाम के समय मंचन किया गया।

परमजीत सिंह ग्रेवाल के निधन की खबर से पंजाब के खेल और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर है। विभिन्न खेल, साहित्य और सांस्कृतिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। इनमें पूर्व लुधियाना डिप्टी कमिश्नर एवं पंजाब के पूर्व मुख्य सचिव सरवन सिंह चन्नी, भारतीय बास्केटबॉल से जुड़े तेजा सिंह धालीवाल, पद्मश्री हॉकी कोच बलदेव सिंह, अर्जुन अवार्डी एवं पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान हरदीप सिंह ग्रेवाल, सुरजीत स्पोर्ट्स एसोसिएशन बटाला के अध्यक्ष पिरथीपाल सिंह बटाला सहित खेल, साहित्य और सांस्कृतिक क्षेत्र की कई हस्तियां शामिल हैं।