Punjab Assembly Passes Resolution Against SIR: पंजाब विधानसभा में SIR के खिलाफ प्रस्ताव पारित
पंजाब विधानसभा में SIR के खिलाफ प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित। CM भगवंत मान ने मतदाता सूची, वोट कटने और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
चंडीगढ़ / सत्ता संदेश
पंजाब विधानसभा में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर सरकार की ओर से पेश किया गया प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। प्रस्ताव में मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। प्रस्ताव पारित होने के बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
मतदान के अधिकारों की सुरक्षा की मांग
पंजाब सरकार की ओर से सदन में पेश प्रस्ताव में कहा गया कि योग्य नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित किए जाने की कथित घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं। सदन ने मांग की कि प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि कोई भी योग्य मतदाता अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित न रहे।
प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों से संबंधित कथित अनियमितताओं की जांच के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय तंत्र स्थापित करने की मांग भी की गई। इसमें कहा गया कि जांच के दौरान यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक उल्लंघन के ठोस सबूत मिलते हैं, तो लागू कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजा जाएगा प्रस्ताव
प्रस्ताव में केंद्र सरकार और संबंधित संवैधानिक प्राधिकारियों से चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और जवाबदेही बनाए रखने की अपील की गई है। इसके साथ ही प्रस्ताव की प्रति भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजने की मांग की गई, ताकि मामले में उचित कार्रवाई की जा सके।
प्रस्ताव में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा नागरिकों को दिए गए समान मतदान अधिकार का उल्लेख करते हुए कहा गया कि किसी भी योग्य नागरिक को अवैध रूप से वोट डालने के अधिकार से वंचित करना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
CM भगवंत मान ने SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि SIR के माध्यम से 13 करोड़ से अधिक लोगों के वोट काटे गए हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव आयोग के माध्यम से विपक्षी मतदाताओं के वोट कटवाती है और अपने समर्थकों के वोट जुड़वाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक है और लोकतंत्र की रक्षा के लिए इस प्रक्रिया को रद्द किया जाना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए।
हालांकि, मुख्यमंत्री द्वारा मतदाताओं के वोट काटे जाने और राजनीतिक पक्षपात को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। प्रस्ताव पारित होना अपने आप में इन आरोपों को प्रमाणित नहीं करता।
SIR को लेकर राजनीतिक बहस तेज
पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पारित होने के बाद विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), मतदाता सूची की शुद्धता और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। राज्य सरकार ने प्रस्ताव के माध्यम से मताधिकार की सुरक्षा और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग उठाई है। अब इस मामले में संबंधित संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

