करवा चौथ की छुट्टी और स्कूलों का दोहरा रवैया
जितेंद्र कुमार / संपादक / सत्ता संदेश
भारत त्योहारों का देश है। यहाँ लगभग हर महीने कोई न कोई पर्व आता है। दिवाली, होली, ईद, क्रिसमस, रक्षाबंधन, नवरात्रि, गुरुपर्व… सूची लंबी है। इन त्योहारों पर स्कूल बंद होते हैं। बच्चे खुश होते हैं, परिवार खुश होते हैं। लेकिन इस खुशी के पीछे एक सच्चाई भी छिपी है—पढ़ाई का नुकसान।
अब इस सूची में करवा चौथ भी जुड़ गया है। कई स्कूलों में करवा चौथ के नाम पर एक दिन की छुट्टी घोषित की जा रही है। सवाल यह है कि क्या यह जरूरी है?
करवा चौथ मुख्य रूप से विवाहित महिलाओं का व्रत है। इसमें पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है। यह घर-परिवार का पर्व है। स्कूलों से इसका सीधा संबंध नहीं बनता। फिर भी स्कूल बंद कर दिए जा रहे हैं। जबकि कई अन्य जरूरी और गैर-जरूरी छुट्टियाँ पहले से ही कैलेंडर में दर्ज हैं।
समस्या यहीं खत्म नहीं होती। स्कूल साल भर में कई दिनों के लिए बंद रहते हैं। फिर जब सिलेबस अधूरा रह जाता है, तो बच्चों पर बोझ डाल दिया जाता है। अतिरिक्त क्लासें, होमवर्क का ढेर, परीक्षा का दबाव—सब बच्चों के हिस्से में आता है। अभिभावक भी चिंतित रहते हैं। शिक्षक भी दबाव में रहते हैं कि कैसे पूरा कोर्स कराया जाए।
यह दोहरा रवैया समझ से परे है। एक तरफ त्योहारों के नाम पर छुट्टियाँ बढ़ाई जा रही हैं, दूसरी तरफ बच्चों से कहा जा रहा है कि वे ज्यादा मेहनत करें। शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान देना और व्यक्तित्व का विकास करना है, न कि कैलेंडर भरना।
कुछ त्योहारों पर छुट्टी उचित है—जहाँ सांस्कृतिक महत्व बहुत गहरा हो या अधिकांश छात्र-शिक्षक प्रभावित हों। लेकिन हर छोटे-बड़े पर्व पर स्कूल बंद करना शिक्षा व्यवस्था को कमजोर बनाता है। करवा चौथ जैसे पर्व पर छुट्टी की बजाय, स्कूलों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जो बच्चे व्रत रख रहे हों या घर में कोई विशेष व्यवस्था हो, उन्हें थोड़ी छूट दी जाए। लेकिन पूरे स्कूल को बंद करना जरूरी नहीं।
सरकारों और स्कूल प्रबंधन को चाहिए कि वे छुट्टियों की सूची पर गंभीरता से विचार करें। जरूरी राष्ट्रीय और धार्मिक पर्वों को तो रखा जाए, लेकिन बाकी छुट्टियों को सीमित किया जाए। साथ ही, जब छुट्टियाँ दी जाएँ तो सिलेबस की योजना भी उसी हिसाब से बनाई जाए, ताकि बच्चों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
भारत त्योहारों का देश जरूर है, लेकिन शिक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। त्योहार और पढ़ाई दोनों साथ-साथ चल सकते हैं—बशर्ते हम संतुलन बनाएँ। करवा चौथ की छुट्टी इस संतुलन को और बिगाड़ने वाली साबित न हो, यही कामना है।

