अमेरिका में ट्रम्प के खिलाफ ‘नो किंग्स’ महारैली: 80 लाख लोग सड़कों पर उतरे, ईरान युद्ध और महंगाई को लेकर इस्तीफे की मांग
इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका में ट्रम्प के खिलाफ ‘नो किंग्स’ महारैली: 80 लाख लोग सड़कों पर उतरे, ईरान युद्ध और महंगाई को लेकर इस्तीफे की मांगइंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका में शनिवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ ‘नो किंग्स’ मार्च के रूप में एक विशाल जनाक्रोश देखने को मिला, जिसमें लगभग 80 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह प्रदर्शन अमेरिका के सभी 50 राज्यों में 3,300 से ज्यादा जगहों पर आयोजित किया गया। आयोजकों का दावा है कि पिछले साल अक्टूबर में हुए प्रदर्शनों की तुलना में इस बार 10 लाख अधिक लोग शामिल हुए हैं।
प्रदर्शन के मुख्य कारण और मांगें : प्रदर्शनकारी ट्रम्प सरकार की कई नीतियों, विशेष रूप से ईरान के साथ बढ़ते युद्ध के तनाव, सख्त इमिग्रेशन कार्रवाई और आसमान छूती महंगाई से बेहद नाराज हैं। कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति ट्रम्प और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को पद से हटाने की मांग करते हुए पोस्टर लहराए। ट्रम्प के खिलाफ यह अब तक का तीसरा बड़ा राष्ट्रीय प्रदर्शन है।
न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन: न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर और मैनहट्टन में बड़ी भीड़ जुटी, जबकि वॉशिंगटन डीसी में लोगों ने ट्रम्प का पुतला जलाकर विरोध प्रदर्शन किया।लॉस एंजिलिस और पोर्टलैंड: लॉस एंजिलिस में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिसमें कई गिरफ्तारियां की गईं। वहीं, पोर्टलैंड में प्रदर्शनकारियों ने इमिग्रेशन एजेंसी (ICE) के दफ्तर के बाहर अमेरिकी झंडा जला दिया।
सैन फ्रांसिस्को: यहाँ समुद्र तट पर लोगों ने एक विशाल ‘मानव बैनर’ बनाया, जिस पर लिखा था- ‘ट्रम्प मस्ट गो नाउ’।
सेलिब्रिटीज और दिग्गज नेताओं का समर्थन : इस आंदोलन को कई बड़े नामों का समर्थन मिला है। डेमोक्रेट नेता बर्नी सैंडर्स और सांसद इल्हान उमर ने रैलियों को संबोधित करते हुए ट्रम्प पर अमेरिका को असंवैधानिक युद्ध में धकेलने का आरोप लगाया। इसके अलावा, मशहूर सिंगर ब्रूस स्प्रिंग्सटीन, मैगी रोजर्स और जोन बेज ने भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में परफॉर्म किया।
दुनिया भर में गूंज और व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया : ट्रम्प के खिलाफ यह नाराजगी सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रही; पेरिस, लंदन, रोम और एथेंस जैसे अंतरराष्ट्रीय शहरों में भी विरोध प्रदर्शन हुए। दूसरी ओर, व्हाइट हाउस ने इन प्रदर्शनों को महज एक ‘थेरेपी सेशन’ करार देते हुए खारिज कर दिया और कहा कि आम जनता को इससे फर्क नहीं पड़ता। ट्रम्प ने स्वयं इन आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि उनके फैसले देश को मजबूत बनाने के लिए हैं।

