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सुखविंदर सिंह बिंद्रा ने बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से की मुलाकात

लुधियाना: भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तहत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल डिफेंस (NISD) के सदस्य और नेशनल कंसल्टेटिव कमिटी ऑन ड्रग रिहैबिलिटेशन (NCCDR) के स्पेशल इनवाइटी सदस्य तथा पंजाब यूथ डेवलपमेंट बोर्ड के पूर्व चेयरपर्सन सुखविंदर सिंह बिंद्रा ने बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मुलाकात की।

इस दौरान सुखविंदर सिंह बिंद्रा ने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से आशीर्वाद लिया और समाज की भलाई एवं खुशहाली के लिए प्रार्थना की।

मुलाकात के दौरान बिंद्रा ने कहा कि समाज की तरक्की, एकता और खुशहाली को बढ़ावा देने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने की जरूरत है। उन्होंने लोगों से समाज की भलाई के लिए एकजुट होकर काम करने की अपील की।

वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान और गरिमा: विकसित भारत की आधारशिला

बी. एल. वर्मा, सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री

हर वर्ष 1 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाया जाता है। यह दिवस हमें वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, अधिकारों, सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः स्मरण करने का अवसर प्रदान करता है। बढ़ती जीवन-प्रत्याशा आधुनिक समाज की महत्वपूर्ण उपलब्धि है, किंतु दीर्घ जीवन तभी सार्थक है, जब प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक को सुरक्षा, सम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता के साथ जीवन जीने का अवसर मिले।

भारत में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण को सरकार की व्यापक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय वरिष्ठ नागरिकों के लिए आश्रय, स्वास्थ्य-संबंधी सहायता, सामाजिक सुरक्षा, सुगम जीवन तथा गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।

सरकार का दृष्टिकोण केवल कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य ऐसा समावेशी वातावरण तैयार करना है, जिसमें वरिष्ठ नागरिक समाज की मुख्यधारा में सक्रिय भागीदार बने रहें और उनके अनुभव, ज्ञान तथा जीवन-मूल्यों का लाभ आने वाली पीढ़ियों को प्राप्त हो।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुदृढ़ संस्थागत व्यवस्था

जिन वरिष्ठ नागरिकों के पास परिवार अथवा अन्य प्रकार का पर्याप्त सहारा उपलब्ध नहीं है, उनके लिए आश्रय और देखभाल सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

एकीकृत वरिष्ठ नागरिक कार्यक्रम (Integrated Programme for Senior Citizens – IPSrC) के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2014-15 से वरिष्ठ नागरिकों के लिए वृद्धाश्रम और निरंतर देखभाल गृह संचालित किए जा रहे हैं। गैर-सरकारी संगठनों, पंचायतों और स्थानीय निकायों के माध्यम से संचालित इन संस्थानों के माध्यम से 10.76 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को सहायता प्रदान की गई है।

इस दिशा में सरकारी वित्तीय सहायता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह सहायता लगभग 15 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष से बढ़कर 124 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।

यह वृद्धि वरिष्ठ नागरिकों के लिए संस्थागत देखभाल और सामाजिक सुरक्षा के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

सहायक उपकरणों के माध्यम से आत्मनिर्भरता

वरिष्ठ नागरिकों के लिए आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने में सहायक उपकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पढ़ने, सुनने, चलने-फिरने और दैनिक गतिविधियों को सहज बनाने वाले उपकरण उनके जीवन की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार ला सकते हैं।

इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय वयोश्री योजना (Rashtriya Vayoshri Yojana) के अंतर्गत देशभर में विभिन्न शिविरों का आयोजन किया गया है। इन शिविरों के माध्यम से 9 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को 53 लाख से अधिक निःशुल्क सहायक उपकरण वितरित किए गए हैं।

इन उपकरणों में व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, चलने की छड़ियाँ और चश्मे आदि शामिल हैं। इस पहल का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को दैनिक जीवन में अधिक आत्मनिर्भर बनाना और उनकी गतिशीलता तथा सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देना है।

एल्डरलाइन: सहायता और मार्गदर्शन का सशक्त माध्यम

वरिष्ठ नागरिकों को आवश्यकता के समय सहायता, परामर्श और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एल्डरलाइन हेल्पलाइन 14567 संचालित की जा रही है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित यह हेल्पलाइन वर्ष 2021 में प्रारंभ की गई थी।

हेल्पलाइन पर 29 लाख से ज़्यादा कॉल आए हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल डिफ़ेंस (NISD), जो इसके लागू होने की निगरानी करता है, ने वित्त वर्ष 2021 से 21 सितंबर, 2026 तक जानकारी, मार्गदर्शन, भावनात्मक सहयोग और फ़ील्ड इंटरवेंशन से जुड़े 8.67 लाख से ज़्यादा ऐसे कॉल पर कार्रवाई की है, जिन पर काम किया जा सकता था; यह एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।

इसके साथ ही वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने पर भी ध्यान दिया गया है। वर्ष 2023 से अब तक 30,000 से अधिक जेरियाट्रिक केयरगिवर्स को प्रशिक्षित किया गया है। ये प्रशिक्षित देखभालकर्ता देश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में वरिष्ठ नागरिकों की सहायता कर रहे हैं।

केवल सरकारी योजनाएँ नहीं, सामाजिक सहभागिता भी आवश्यक

वरिष्ठ नागरिकों के लिए संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ समाज में संवेदनशीलता और सहभागिता की भावना विकसित करना भी आवश्यक है।

शहरीकरण, रोजगार के अवसरों, शिक्षा और बढ़ती गतिशीलता के कारण परिवारों की संरचना में परिवर्तन आया है। इसके परिणामस्वरूप अनेक वरिष्ठ नागरिक अपने बच्चों और पोते-पोतियों से अलग रह रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में अंतरपीढ़ीगत संवाद और सहभागिता का महत्व और बढ़ जाता है।

वरिष्ठ नागरिक केवल सहायता प्राप्त करने वाले व्यक्ति नहीं हैं। उनके पास जीवन का व्यापक अनुभव, ज्ञान, कौशल और सामाजिक स्मृतियाँ हैं। वे परिवार, समुदाय और समाज के लिए मार्गदर्शक, स्वयंसेवक तथा प्रेरणास्रोत की भूमिका निभा सकते हैं।

इसी प्रकार युवा पीढ़ी अपनी ऊर्जा, तकनीकी ज्ञान और बदलते समय की समझ के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को अधिक सहज बना सकती है। दोनों पीढ़ियों के बीच यह संवाद एक संवेदनशील और समावेशी समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

अंतरपीढ़ीगत संबंधों को बढ़ावा देने की पहल

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा वरिष्ठ नागरिकों और युवा पीढ़ी के बीच संवाद एवं संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।

विद्यालयों के माध्यम से ‘दादा-दादी मिलन समारोह’ जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें बच्चों को वरिष्ठ नागरिकों के साथ संवाद करने, उनकी जीवन-कथाएँ सुनने और उनके अनुभवों से सीखने का अवसर मिला।

इसी प्रकार वॉकाथॉन जैसे कार्यक्रमों ने भी वरिष्ठ नागरिकों और युवा पीढ़ी को साथ लाने तथा सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल के क्षेत्र में कार्यरत सामाजिक एवं आध्यात्मिक संगठनों, जैसे ब्रह्माकुमारीज़, रामकृष्ण मिशन एवं अखिल विश्व गायत्री परिवार आदि, के साथ मंत्रालय द्वारा 7 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं। 

वर्ष 2024 से 2026 के बीच देशभर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के अनुभवों, प्रयासों और प्रेरक प्रसंगों को मंत्रालय द्वारा ‘स्नेह ई-बुक’ में संकलित किया गया है।

भारतीय परंपरा में वरिष्ठजनों का सम्मान

भारतीय संस्कृति में वरिष्ठजनों के सम्मान और उनके अनुभवों से सीखने की परंपरा सदियों पुरानी है। तैत्तिरीय उपनिषद में शिक्षा पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को दिए गए उपदेश में “मातृदेवो भव, पितृदेवो भव” का संदेश दिया गया है।

यह केवल माता-पिता के प्रति सम्मान का संदेश नहीं है, बल्कि भारतीय जीवन-दृष्टि में परिवार, अनुभव और ज्ञान के प्रति सम्मान की व्यापक भावना को भी अभिव्यक्त करता है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि इन मूल्यों को आधुनिक सामाजिक व्यवस्था के साथ जोड़ते हुए अंतरपीढ़ीगत संवाद को और मजबूत किया जाए।

सेवा से सामाजिक संवेदनशीलता तक

वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए सरकार द्वारा योजनाएँ और संस्थागत व्यवस्थाएँ विकसित की जा रही हैं, लेकिन सामाजिक संवेदनशीलता और व्यक्तिगत सहभागिता भी उतनी ही आवश्यक है।

इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस ‘सेवा संकल्प अभियान’ की अवधि में पड़ रहा है। 17 सितंबर से देशभर में संचालित इस सेवा अभियान के माध्यम से सेवा और सामाजिक सहभागिता की भावना को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

वरिष्ठ नागरिकों की सेवा केवल बड़े कार्यों तक सीमित नहीं है। किसी बुजुर्ग पड़ोसी को दैनिक कार्यों में सहयोग देना, उन्हें डिजिटल सेवाओं का उपयोग करने में सहायता करना, किसी आवश्यक प्रपत्र को भरने में मदद करना, बैंक अथवा अस्पताल जाने में साथ देना या उनकी बात धैर्यपूर्वक सुनना भी सेवा का महत्वपूर्ण रूप है।

ऐसी छोटी-छोटी पहल वरिष्ठ नागरिकों में आत्मविश्वास और सामाजिक जुड़ाव की भावना को मजबूत करती हैं।

विकसित भारत में वरिष्ठ नागरिकों की महत्वपूर्ण भूमिका

‘सबका साथ, सबका विकास’ के मार्गदर्शक दृष्टिकोण के अनुरूप वरिष्ठ नागरिकों का कल्याण समावेशी विकास का महत्वपूर्ण अंग है।

सरकार नीतियाँ और संस्थागत ढाँचा उपलब्ध करा सकती है, लेकिन वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सम्मान, अपनत्व और संवेदनशीलता का वातावरण समाज की सामूहिक भागीदारी से ही निर्मित होता है।

विकसित भारत केवल आर्थिक प्रगति और आधुनिक अवसंरचना का नाम नहीं है। यह ऐसा भारत है जहाँ प्रत्येक नागरिक, चाहे उसकी आयु कुछ भी हो, सम्मान, सुरक्षा और गरिमा के साथ जीवन जी सके।

वरिष्ठ नागरिक हमारे समाज की जीवंत स्मृति, अनुभव और ज्ञान के वाहक हैं। उनके अनुभवों को अगली पीढ़ी से जोड़ना हमारी सामाजिक जिम्मेदारी भी है और राष्ट्रीय आवश्यकता भी।

आज हम वरिष्ठ नागरिकों के साथ जितना सम्मान, धैर्य और संवेदनशीलता का व्यवहार करेंगे, वही आने वाले भारत के सामाजिक स्वरूप को निर्धारित करेगा।

एक संवाद, एक घंटा और एक आत्मीय संबंध—किसी वरिष्ठ नागरिक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत के लिए इतना ही पर्याप्त हो सकता है।

विकसित भारत का संकल्प तभी पूर्ण होगा, जब प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक को सम्मान, सुरक्षा और गरिमा के साथ जीने का अवसर मिले और प्रत्येक नई पीढ़ी अपने बुजुर्गों के अनुभवों और जीवन-मूल्यों से सीखने का अवसर प्राप्त करे।

पूनम अरोड़ा ने संभाला PUNBUS की डायरेक्टर का चार्ज, यात्रियों की सुविधाओं पर रहेगा फोकस

लुधियाना / सत्ता संदेश

पूनम अरोड़ा ने पंजाब स्टेट बस स्टैंड मैनेजमेंट कंपनी (PUNBUS) की डायरेक्टर का चार्ज संभाल लिया है। नई जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने इस अवसर के लिए पंजाब सरकार का विशेष रूप से धन्यवाद किया।

ट्रांसपोर्ट विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी अनुराग वर्मा IAS ने पूनम अरोड़ा को नई जिम्मेदारी संभालने पर बधाई दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि पूनम अरोड़ा के नेतृत्व में PUNBUS के कामकाज को और मजबूती मिलेगी।

इस अवसर पर PUNBUS के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव कुमार गुप्ता IAS भी मौजूद रहे। उन्होंने डायरेक्टर पूनम अरोड़ा को PUNBUS के कामकाज और विभिन्न व्यवस्थाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

पूनम अरोड़ा ने कहा कि वह अपनी नई जिम्मेदारी को पूरी मेहनत, ईमानदारी और लगन के साथ निभाएंगी। उन्होंने कहा कि PUNBUS पंजाब सरकार के पंजाब रोडवेज के तहत संचालित एक जानी-मानी और भरोसेमंद बस सेवा है। इसकी प्रतिष्ठा और भरोसे को बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यात्रियों के सफर को अधिक सुविधाजनक और आरामदायक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों को बस यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए हर मुमकिन कोशिश की जाएगी।

किला रायपुर रूरल गेम्स के लंबे समय तक सेक्रेटरी रहे परमजीत सिंह ग्रेवाल का अमेरिका में निधन

लुधियाना / सत्ता संदेश

किला रायपुर रूरल गेम्स (ओलंपिक्स) से लंबे समय तक जुड़े रहे और गेम्स के सेक्रेटरी की जिम्मेदारी निभाने वाले परमजीत सिंह ग्रेवाल का अमेरिका में निधन हो गया। वह 76 वर्ष के थे। पंजाब की स्पोर्ट्स कम्युनिटी में उन्हें प्यार से ‘पम्मी’ के नाम से जाना जाता था।

परमजीत सिंह ग्रेवाल का अंतिम संस्कार 3 अक्टूबर को सुबह 10 बजे नॉर्थ सैक्रामेंटो फ्यूनरल होम, एल कैमिनो एवेन्यू के श्मशान घाट में किया जाएगा। यह जानकारी उनके बेटे शवि ग्रेवाल ने दी।

परमजीत सिंह ग्रेवाल ने अपने करियर की शुरुआत हॉकी कोच के तौर पर की। उन्होंने गवर्नमेंट गुरु नानक कॉलेज काला अफगाना और गवर्नमेंट कॉलेज लुधियाना में हॉकी कोच के रूप में सेवाएं दीं। इसके बाद पंजाब स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट में भी लंबे समय तक हॉकी कोच के तौर पर कार्य किया।

किला रायपुर गेम्स से उनका रिश्ता पारिवारिक भी था। उनके पिता स. तारा सिंह ग्रेवाल किला रायपुर गेम्स के संस्थापकों में शामिल थे और लंबे समय तक इन खेलों के सेक्रेटरी भी रहे।

पंजाबी लोक विरासत एकेडमी के चेयरमैन प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने परमजीत सिंह ग्रेवाल को याद करते हुए कहा कि गवर्नमेंट कॉलेज लुधियाना में पढ़ाई के दौरान उनका उनसे संपर्क हुआ था और यह संबंध आखिरी समय तक बना रहा। उन्होंने परमजीत के साथ जुड़ी पुरानी यादों को साझा करते हुए कहा कि उनके साथ बिताया समय आज भी उनकी यादों में ताजा है।

परमजीत सिंह ग्रेवाल पटियाला स्थित NIS में प्रसिद्ध गायक गुरदास मान और हॉकी से जुड़े गिल सुरजीत के कोर्स मेट भी रहे। खेलों के साथ-साथ उनका पंजाबी कला और संस्कृति से भी गहरा जुड़ाव था।

जाने-माने गीतकार और परमजीत के करीबी दोस्त शमशेर सिंह संधू ने बताया कि किला रायपुर गेम्स में उनकी पहल और सरदार जगदेव सिंह जस्सोवाल सहित अन्य साथियों के सहयोग से कई नामी पंजाबी गायकों को कार्यक्रमों में मेहमान के तौर पर बुलाया गया। इनमें अमरजीत गुरदासपुरी, मोहम्मद सादिक, रंजीत कौर, सुरिंदर शिंदा, कुलदीप मानक, जसवंत संडीला, सुरजीत बिंद्राखिया, जैज़ी बी, हंस राज हंस, हरभजन मान सहित कई कलाकार शामिल रहे।

किला रायपुर गेम्स के दौरान पंजाबी थिएटर को भी मंच मिला और प्रसिद्ध रंगकर्मी सरदार गुरशरण सिंह के नाटकों का कई बार शाम के समय मंचन किया गया।

परमजीत सिंह ग्रेवाल के निधन की खबर से पंजाब के खेल और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर है। विभिन्न खेल, साहित्य और सांस्कृतिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। इनमें पूर्व लुधियाना डिप्टी कमिश्नर एवं पंजाब के पूर्व मुख्य सचिव सरवन सिंह चन्नी, भारतीय बास्केटबॉल से जुड़े तेजा सिंह धालीवाल, पद्मश्री हॉकी कोच बलदेव सिंह, अर्जुन अवार्डी एवं पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान हरदीप सिंह ग्रेवाल, सुरजीत स्पोर्ट्स एसोसिएशन बटाला के अध्यक्ष पिरथीपाल सिंह बटाला सहित खेल, साहित्य और सांस्कृतिक क्षेत्र की कई हस्तियां शामिल हैं।

मानसा-सिरसा हाईवे पर किसानों का धरना, गरीब किसान पर दर्ज मामला रद्द करने की मांग

मानसा / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : बिट्टू बुढलाडा

मानसा जिले के झुनीर कस्बे में भाखड़ा पुल के पास किसानों ने मानसा-सिरसा हाईवे जाम कर रोष प्रदर्शन किया। किसान एक गरीब किसान के खिलाफ दर्ज मामले को रद्द करने की मांग को लेकर पिछले सात दिनों से थाना झुनीर के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं।

किसान नेताओं का आरोप है कि पुलिस ने कथित तौर पर दबाव में आकर संबंधित किसान के खिलाफ मामला दर्ज किया है। किसानों के मुताबिक, किसान की जमीन घग्गर नदी के पास स्थित है और ग्राम पंचायत की ओर से इस जमीन को हर साल ठेके पर दिए जाने का विरोध किया जा रहा था। किसानों का कहना है कि इसके बावजूद संबंधित किसान के खिलाफ मामला दर्ज कर दिया गया।

किसानों ने आरोप लगाया कि पिछले सात दिनों से थाना झुनीर के बाहर धरना देने के बावजूद उनकी मांग पर पुलिस अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद मंगलवार को किसानों ने मानसा-सिरसा मार्ग पर भाखड़ा पुल के पास धरना देकर हाईवे जाम कर दिया।

किसानों ने चेतावनी दी कि यदि किसान के खिलाफ दर्ज मामला रद्द नहीं किया गया तो वे मानसा-सिरसा मार्ग पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे।

वहीं, थाना झुनीर प्रभारी भूपिंदर सिंह ने किसानों के आरोपों से अलग पक्ष रखते हुए कहा कि बीडीपीओ की ओर से पत्र भेजकर संबंधित किसान के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए कहा गया था। थाना प्रभारी ने कहा कि इसी आधार पर मामले में कार्रवाई की गई है।

धरने के दौरान किसान नेता मोहिंदर सिंह, किसान मलूक सिंह और थाना प्रभारी भूपिंदर सिंह ने मामले को लेकर अपनी-अपनी बात रखी।

हरिद्वार में सामाजिक चिंतन-सद्भावना एवं समरसता सम्मेलन, समाज की एकता और युवा सशक्तिकरण पर मंथन

दिनांक : 29 सितंबर 2026

हरिद्वार / पानीपत / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : शशी कपूर

देवभूमि हरिद्वार स्थित कबीर आश्रम, ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज के सामने देवपुरा में श्री कबीर आश्रम धर्मार्थ ट्रस्ट समिति (रजि.), हरिद्वार के तत्वावधान में सामाजिक चिंतन-सद्भावना एवं समरसता सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में समाज की एकता, सामाजिक समरसता, शिक्षा, रोजगार और युवा सशक्तिकरण सहित समाज के सर्वांगीण विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।

सम्मेलन की अध्यक्षता विकास महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. ओमवीर सिंह पंवार ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में केवल व्यक्तिगत प्रगति पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर आगे बढ़ना जरूरी है। उन्होंने शिक्षा, जागरूकता, आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता को मजबूत समाज की आधारशिला बताया।

डॉ. पंवार ने कहा कि सद्गुरु कबीर साहेब की वाणी मानवता, समानता, प्रेम और भाईचारे का संदेश देती है। उन्होंने युवाओं के लिए बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, सामाजिक कुरीतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास करने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि समाज की एकता, समरसता और आने वाली पीढ़ियों का उज्ज्वल भविष्य सामूहिक जिम्मेदारी है। युवाओं को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से सशक्त बनाने की दिशा में मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है।

धर्मार्थ ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष अजब सिंह ने धन्यवाद संबोधन में कहा कि समाज को मजबूत बनाने के लिए आपसी सहयोग, सद्भावना और सामाजिक समरसता को और सशक्त करना होगा। उन्होंने शिक्षा और युवा सशक्तिकरण को समाज को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

हिमाचल से पहुंचे कबीरपंथ महासभा के प्रदेशाध्यक्ष मस्तराम ने सामाजिक एकता और समरसता के मूल्यों को मजबूत करने तथा समाज के सर्वांगीण विकास के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य बलराज आर्य ने भी युवाओं से समाज की मजबूती के लिए आगे आने की अपील की।

कार्यक्रम का मंच संचालन खिलेराम आर्य ने किया। कार्यक्रम से पहले ट्रस्ट समिति के पदाधिकारियों और समाज के प्रबुद्ध लोगों ने डॉ. ओमवीर सिंह पंवार का फूलमालाओं और गुलदस्तों से स्वागत किया। हिमाचल से आए प्रतिनिधियों ने उन्हें हिमाचली टोपी और शॉल पहनाकर सम्मानित किया।

सम्मेलन में ट्रस्ट समिति के उपाध्यक्ष प्रमोद कुमार, बलराज आर्य, कैलाश चंद, विकास महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अरविंद कुमार उर्फ बिल्लू भाई, राष्ट्रीय महासचिव महेंद्र गाहल्याण, अमरपाल तोमर, राजकुमार कटारिया, विकास कुमार रोशे, रामकुमार तंवर, अमित पवार, प्रमोद तोमर, लोकेश दहिया, राजेंद्र सिंह, पालेराम पवार, किरणपाल पवार, मदनपाल, संत कुमार, पवन कुमार, धर्मेंद्र लालाजी, अशोक ठेकेदार, डॉ. अशोक कुमार, परवीन कुमार, रामनिवास आर्य, अजय कुमार, मेहर सिंह, धर्मेंद्र गहलोत, एडवोकेट लोकेश, योगेश, जनेश्वर और जगपाल सहित बड़ी संख्या में सामाजिक प्रतिनिधि एवं प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।

इंडिया एनर्जी वीक 2027 का ऐलान, कोलकाता में होगा पांचवां संस्करण

चंडीगढ़ / सत्ता संदेश

29 सितंबर 2026

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने चंडीगढ़ में आयोजित कर्टन रेज़र कार्यक्रम के दौरान ‘इंडिया एनर्जी वीक (IEW) 2027’ के पांचवें संस्करण की घोषणा की। भारत का यह प्रमुख वैश्विक ऊर्जा कार्यक्रम 28 से 31 जनवरी 2027 तक कोलकाता के न्यू टाउन कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया जाएगा।

इस अवसर पर हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि IEW 2027 में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विमर्श में नए दृष्टिकोण और नई आवाज़ों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में उद्यमियों, नवप्रवर्तकों और उभरते खिलाड़ियों की भूमिका को प्रमुखता दी जाएगी, जो ऊर्जा के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि कोलकाता में आयोजित होने वाला यह संस्करण भारत के ऊर्जा विकास के अगले चरण को प्रदर्शित करेगा। कार्यक्रम के जरिए भारत वैश्विक ऊर्जा संवाद में भाग लेने के साथ-साथ उसे दिशा देने में अपनी भूमिका को और मजबूत करेगा।

हरदीप पुरी ने कहा कि IEW 2027 भारत के बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम, इंजीनियरिंग क्षमताओं और नवाचार की क्षमता को भी दुनिया के सामने रखेगा। इसका उद्देश्य भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों से निपटने के लिए देश में विकसित हो रही तकनीकी और औद्योगिक क्षमताओं को प्रदर्शित करना है।

कर्टन रेज़र कार्यक्रम में इंडियनऑयल के निदेशक (रिफाइनरीज़) अरविंद कुमार, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और अन्य हितधारक मौजूद रहे। अरविंद कुमार ने कहा कि इंडिया एनर्जी वीक ने अपनी शुरुआत के कुछ ही समय में वैश्विक ऊर्जा मंच पर भारत की भूमिका को मजबूती से सामने रखा है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में आयोजित कार्यक्रम इस बात को दर्शाता है कि भारत में ऊर्जा से जुड़ी चर्चा किसी एक शहर या मंच तक सीमित नहीं है।

कार्यक्रम में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक (अंतरिम) प्रोफेसर राजेश कुमार भाटिया भी उपस्थित रहे। ऊर्जा क्षेत्र के पेशेवरों के साथ पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के करीब 120 छात्रों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

75 हजार से अधिक ऊर्जा पेशेवरों के पहुंचने की उम्मीद

2023 में शुरुआत के बाद से इंडिया एनर्जी वीक ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक प्रमुख वैश्विक मंच के रूप में उभरा है। IEW 2027 का आयोजन ‘नवाचार को गति, ऊर्जा सुरक्षा, भविष्य का निर्माण’ (Unlocking Innovation, Securing Energy, Shaping Tomorrow) थीम के तहत किया जाएगा।

आयोजकों के मुताबिक, कार्यक्रम में 75,000 से अधिक ऊर्जा पेशेवरों और 700 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शकों के शामिल होने की उम्मीद है। कार्यक्रम में हाइड्रोजन, बायोफ्यूल, एलएनजी, डिजिटलाइजेशन, नवीकरणीय ऊर्जा और नेट-ज़ीरो से जुड़े विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत पर भी रहेगा फोकस

कोलकाता में IEW के आयोजन को कार्यक्रम के भौगोलिक और रणनीतिक विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है। इसके जरिए पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत की आर्थिक एवं औद्योगिक क्षमता के साथ पड़ोसी क्षेत्रों से बढ़ते संपर्कों को भी सामने लाने का अवसर मिलेगा।

IEW 2027 में नवाचार और युवा प्रतिभा को भी विशेष महत्व दिया जाएगा। ‘वसुधा’, अविन्या और हैकाथॉन जैसे मंचों के जरिए प्रतिभागियों को वास्तविक ऊर्जा चुनौतियों के लिए समाधान प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। FIPI के 12 स्टूडेंट चैप्टर्स छात्रों और फैकल्टी सदस्यों को तकनीकी सत्रों और प्रदर्शनियों से जोड़ेंगे, जिससे शिक्षा जगत और ऊर्जा उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

पंजाब स्टेट ऑफिस नेटवर्क की जानकारी

इंडियनऑयल के पंजाब स्टेट ऑफिस (PSO) नेटवर्क के तहत पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर क्षेत्र शामिल हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में कुल 6,183 रिटेल आउटलेट्स में से 3,023 इंडियनऑयल के रिटेल आउटलेट्स हैं।

एलपीजी क्षेत्र में कुल 1,402 वितरकों में से इंडियनऑयल के पंजाब स्टेट ऑफिस नेटवर्क के तहत 784 वितरक हैं। वहीं, बीपीसीएल और एचपीसीएल के पास क्रमशः 328 और 290 एलपीजी वितरक हैं।

माछीवाड़ा : बंद कमरे से राजमिस्त्री का खून से लथपथ शव बरामद, हत्या या हादसे की जांच

माछीवाड़ा साहिब / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : जसबीर सिंह अलबेला

माछीवाड़ा साहिब के स्थानीय सरकारी कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल के पास एक बंद कमरे से करीब 50 वर्षीय राजमिस्त्री चरणजीत सिंह उर्फ बिल्ला का खून से लथपथ शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। शव अर्धनग्न अवस्था में पड़ा था, जबकि कमरे से बाहर तक खून के निशान दिखाई दे रहे थे।

जानकारी के अनुसार, चरणजीत सिंह माछीवाड़ा शहर में अपने परिवार से अलग किराए के कमरे में रह रहा था। बताया जा रहा है कि कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। आसपास के लोगों ने जब कमरे से बाहर खून निकलता देखा तो पुलिस को सूचना दी।

सूचना मिलने के बाद थाना प्रभारी करमजीत सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। दरवाजा तोड़कर पुलिस टीम अंदर दाखिल हुई तो चरणजीत सिंह खून से लथपथ हालत में मृत मिला। पुलिस के अनुसार, शव से दुर्गंध आ रही थी और प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मौत करीब दो से तीन दिन पहले हुई होगी।

पुलिस को मृतक के सिर के पीछे चोट के निशान मिले हैं, जबकि चेहरे पर भी चोट दिखाई दी। इन परिस्थितियों के चलते मौत को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

पुलिस ने मृतक के परिवार को सूचना दी। मृतक की पत्नी जसप्रीत कौर ने बताया कि चरणजीत सिंह शराब पीने का आदी था और करीब चार वर्षों से परिवार से अलग रह रहा था।

फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थाना प्रभारी करमजीत सिंह के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण का पता चल सकेगा। पुलिस फिलहाल कमरे में गिरने से हुए हादसे और हत्या, दोनों पहलुओं से मामले की जांच कर रही है।

165 साल पुराने अंग्रेजों के दौर के रेस्ट हाउस का बदलेगा रूप, पर्यटन केंद्र के रूप में होगा विकास

माछीवाड़ा साहिब / सत्ता संदेश

रिपोर्ट : जसबीर सिंह अलबेला

माछीवाड़ा के पास सरहिंद नहर के किनारे स्थित करीब 165 साल पुराने सरकारी रेस्ट हाउस को अब नई पहचान देने की तैयारी शुरू हो गई है। जल संसाधन विभाग ने ऐतिहासिक इमारत को खुले टेंडर के जरिए एक निजी कंपनी को 7 साल के लिए किराये पर दिया है। इसके बाद कंपनी ने परिसर में साफ-सफाई और मरम्मत का काम शुरू कर दिया है।

दोराहा निवासी राजवीर सिंह मांगट ने बताया कि उनकी कंपनी ट्रिपल ए-1947 ने टेंडर प्रक्रिया के जरिए रेस्ट हाउस किराये पर लिया है। उनके मुताबिक, इमारत लंबे समय से खस्ताहाल हालत में थी और आसपास की जमीन पर घास-फूस उग आई थी। पिछले करीब एक महीने से परिसर की सफाई और जमीन को समतल करने का काम किया जा रहा है।

विरासत की पहचान बरकरार रखते हुए होगा विकास

प्रस्तावित योजना के तहत ऐतिहासिक इमारत की पुरानी विरासती पहचान को बरकरार रखते हुए इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। रेस्ट हाउस में मौजूद चार कमरों को पारंपरिक शैली में तैयार कर पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था करने की योजना है।

इसके अलावा परिसर में हॉर्स स्टड फार्म, मेडिटेशन सेंटर, बच्चों के लिए गतिविधियों और फूड हब जैसी सुविधाएं विकसित करने की तैयारी है। इस स्थान का इस्तेमाल फिल्मों और गानों की शूटिंग के लिए भी किए जाने की योजना बताई गई है।

राजवीर सिंह मांगट के अनुसार, इमारत के पुराने दरवाजों को हटाकर नए दरवाजे लगाने के बजाय उनकी मौजूदा शैली को ही संरक्षित और संवारा जाएगा। उन्होंने बताया कि इमारत की छतों की गोलाकार बनावट और घड़ों में मिट्टी भरकर तैयार किया गया डिजाइन इसकी खास विशेषताओं में शामिल है।

आतंकवाद के दौर से जुड़ी रही है इमारत

स्थानीय लोगों के अनुसार, पंजाब में आतंकवाद के दौर में सरहिंद नहर के किनारे सुनसान इलाके में स्थित इस रेस्ट हाउस का इस्तेमाल पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ के लिए भी किया जाता था। स्थानीय स्तर पर इस जगह को पूछताछ और कथित प्रताड़ना से जुड़ी चर्चाओं के साथ भी याद किया जाता है।

पिछले कई वर्षों से यह ऐतिहासिक इमारत वीरान और जर्जर हालत में थी। अब जल संसाधन विभाग द्वारा इसे किराये पर दिए जाने के बाद इसके संरक्षण और पुनर्विकास की प्रक्रिया शुरू हुई है।

प्रस्तावित पर्यटन परियोजना के जरिए इस ऐतिहासिक स्थल को नई पहचान मिलने के साथ माछीवाड़ा क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

लुधियाना के पंजाबी बाग में पार्किंग को लेकर दो पक्ष भिड़े, पुलिस के सामने भी हुई मारपीट

लुधियाना / सत्ता संदेश

लुधियाना शहर के पंजाबी बाग इलाके में गाड़ी पार्क करने को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच झड़प होती दिखाई दे रही है।

जानकारी के मुताबिक, गाड़ी पार्क करने को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आए थे। विवाद की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन पुलिस की मौजूदगी में भी दोनों पक्ष एक-दूसरे से उलझ गए और मारपीट शुरू हो गई।

झड़प के दौरान कुछ गाड़ियों के शीशे टूटने की भी बात सामने आई है। वहीं, एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्हें धमकियां दी जा रही हैं। परिवार की ओर से एक कांग्रेस नेता के बेटे पर भी धमकाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

पीड़ित परिवार ने पुलिस से मामले में कार्रवाई की मांग की है।

वहीं, जब इस संबंध में पुलिस अधिकारियों से बात करने का प्रयास किया गया तो बताया गया कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी वीआईपी ड्यूटी में व्यस्त हैं। ड्यूटी ऑफिसर द्वारा मामले में जरूरी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस के अनुसार, जांच के बाद तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल, पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।