भारत पर्व 2026 में प्रधानमंत्री ने सीसीआईसी पवेलियन का दौरा किया। एकता नगर में भारतीय हथकरघा, हस्तशिल्प और देशभर के कारीगरों की कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं।
गुजरात / सत्ता संदेश
वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के उपक्रम सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (सीसीआईसी) के लिए 30 अक्टूबर 2026 का दिन खास और यादगार रहा। गुजरात के केवड़िया स्थित एकता नगर में आयोजित भारत पर्व 2026 के दौरान प्रधानमंत्री ने सीसीआईसी पवेलियन का दौरा किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री को भारत की समृद्ध हथकरघा और हस्तशिल्प परंपरा, देशभर के कारीगरों और बुनकरों की कलात्मक प्रतिभा तथा पारंपरिक शिल्प को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों से रूबरू होने का अवसर मिला।
सीसीआईसी का पवेलियन भारतीय पारंपरिक कला और शिल्प कौशल का आकर्षक प्रदर्शन कर रहा है। इसके माध्यम से निगम ने कारीगरों और बुनकरों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने तथा उनकी आजीविका को मजबूत बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को प्रदर्शित किया है। सीसीआईसी अपनी विभिन्न पहलों के जरिए ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को आगे बढ़ाते हुए स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने तथा ‘लोकल को ग्लोबल’ बनाने में योगदान दे रहा है।
इस अवसर पर सीसीआईसी के प्रबंध निदेशक श्री बिमल गोपालाचारी सहित निगम के अधिकारी, कारीगर और बुनकर भी मौजूद रहे। पवेलियन में देश के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक कलाओं और शिल्प का प्रदर्शन किया जा रहा है। खासतौर पर गुजरात के कारीगरों द्वारा एगेट पत्थरों, अर्ध-कीमती पत्थरों और बारीक एप्लिक वर्क के माध्यम से तैयार की गई कलाकृतियां लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।
सीसीआईसी का यह प्रयास भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कला रूपों को एक मंच पर लाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। प्रदर्शनी में हस्तनिर्मित और पारंपरिक उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित की गई है, जो भारतीय कारीगरों की रचनात्मकता, मेहनत और पीढ़ियों से चली आ रही शिल्प परंपरा को दर्शाती है।
भारत पर्व 2026 में सीसीआईसी की भागीदारी न केवल देश की पारंपरिक कलाओं को प्रोत्साहित कर रही है, बल्कि स्थानीय कारीगरों और बुनकरों को नए बाजारों से जोड़ने का अवसर भी प्रदान कर रही है। गुजरात के केवड़िया स्थित एकता नगर में आयोजित यह प्रदर्शनी 15 नवंबर 2026 तक आगंतुकों के लिए खुली रहेगी।
लुधियाना के गांव गगरा स्थित गुरुद्वारा गोपालसर साहिब फायरिंग केस का पुलिस ने 48 घंटे में खुलासा किया। पुलिस के अनुसार, सुरक्षा पाने के लिए कथित साजिश के तहत फायरिंग की गई थी।
लुधियाना / सत्ता संदेश
रिपोर्ट : बसंत सिंह रोड़िया
लुधियाना ग्रामीण पुलिस ने गांव गगरा स्थित गुरुद्वारा गोपालसर साहिब के बाहर हुई फायरिंग की घटना को महज 48 घंटे में सुलझाने का दावा किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि गुरुद्वारा साहिब के मुख्य सेवक बाबा अमरजीत सिंह को पुलिस सुरक्षा दिलाने के लिए उनके कथित कहने पर संदीप सिंह ने फायरिंग की वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसके कब्जे से वारदात में इस्तेमाल की गई देसी पिस्तौल और मोटरसाइकिल भी बरामद की है।
लुधियाना ग्रामीण के एसएसपी डॉ. अंकुर गुप्ता, आईपीएस ने बताया कि 26 और 27 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि गांव गगरा स्थित गुरुद्वारा गोपालसर साहिब के बाहर नकाबपोश व्यक्ति ने दो गोलियां चलाई थीं। इसके बाद आरोपी गुरुद्वारा साहिब के मुख्य गेट पर एक धमकी भरा पत्र फेंककर फरार हो गया था। इस पत्र में गुरुद्वारा साहिब के मुख्य प्रशासक बाबा अमरजीत सिंह को धमकी दी गई थी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी (डी) राजन शर्मा, डीएसपी जगराओं जसविंदर सिंह ढींडसा और डीएसपी (डी) सागर बनाल के नेतृत्व में सीआईए स्टाफ जगराओं के इंचार्ज इंस्पेक्टर अमृतपाल सिंह तथा थाना सदर जगराओं के एसएचओ सब-इंस्पेक्टर सुखविंदर सिंह की टीमें गठित की गईं। पुलिस ने तकनीकी जांच, ह्यूमन इंटेलिजेंस और घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया और 48 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान संदीप सिंह उर्फ सोनी पुत्र शिंदरपाल सिंह निवासी गांव कडियाल, जिला मोगा के रूप में हुई है। शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह बाबा अमरजीत सिंह का भक्त है और गुरुद्वारा गोपालसर साहिब के पास रहता है। वह करीब एक साल पहले अपने गांव लौटा था।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने पूछताछ में खुलासा किया कि बाबा अमरजीत सिंह को पुलिस सुरक्षा दिलाने के उद्देश्य से कथित तौर पर पहले से तय साजिश के तहत फायरिंग की गई थी। वारदात के दिन वह अपनी डिस्कवर मोटरसाइकिल पर अकेला गुरुद्वारा साहिब पहुंचा था। पहचान छिपाने के लिए उसने सिर पर परना बांधा और चेहरे को कपड़े से ढक रखा था। इसके अलावा अपनी शारीरिक बनावट छिपाने के लिए कमर पर कपड़ा बांधा हुआ था। गुरुद्वारा साहिब के बाहर दो गोलियां चलाने के बाद वह वापस अपने गांव चला गया।
पूछताछ में आरोपी ने यह भी बताया कि उसने करीब छह महीने पहले इलाहाबाद और मिर्जापुर के आसपास के इलाके से .32 बोर की देसी पिस्तौल और जिंदा कारतूस खरीदे थे। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई देसी पिस्तौल, मैगजीन और डिस्कवर मोटरसाइकिल बरामद कर ली है।
पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे सात दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस अब धमकी भरे पत्र के संबंध में जांच कर रही है और इस साजिश से जुड़े अन्य पहलुओं का पता लगाने के लिए आरोपी से पूछताछ की जा रही है।
एसएसपी डॉ. अंकुर गुप्ता ने कहा कि लुधियाना ग्रामीण पुलिस जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आम लोगों की जान-माल की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी को भी क्षेत्र का माहौल खराब करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
लुधियाना में माइनिंग साइट्स के लिए कंप्लायंस सर्टिफिकेट अनिवार्य किया गया। अवैध माइनिंग, ओवरलोडिंग और नियमों के उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई।
लुधियाना / सत्ता संदेश
लुधियाना में अवैध माइनिंग, ओवरलोडिंग और माइनिंग मटीरियल के परिवहन में नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। डिप्टी कमिश्नर-कम-डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट लुधियाना ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि माइनिंग डिपार्टमेंट से कंप्लायंस सर्टिफिकेट जारी होने के बाद ही किसी साइट पर माइनिंग की अनुमति दी जाएगी। बिना सर्टिफिकेट के माइनिंग करने या माइनिंग मटीरियल का परिवहन करने पर पूरी तरह रोक रहेगी।
30 अक्टूबर को डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता में माइनिंग से जुड़े मामलों की समीक्षा के लिए एक बैठक आयोजित की गई। इसमें अवैध माइनिंग, वाहनों की ओवरलोडिंग और माइनिंग मटीरियल के परिवहन के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने को लेकर अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए गए।
बैठक में कहा गया कि माइनिंग साइट्स से मटीरियल ले जाने की अनुमति केवल माइनिंग डिपार्टमेंट में रजिस्टर्ड टिपर को ही होगी। इन वाहनों पर वैध नंबर प्लेट, चालू GPS ट्रैकर और मटीरियल को ढकने के लिए तिरपाल होना अनिवार्य होगा। यदि बिना नंबर प्लेट वाला कोई वाहन साइट से बाहर निकलता है तो वहां तैनात जूनियर इंजीनियर (JE) की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।
प्रशासन ने वाहनों की क्षमता से अधिक वजन ले जाने पर भी सख्ती दिखाई है। किसी भी वाहन को उसकी रजिस्टर्ड क्षमता से अधिक वजन की वेट स्लिप या फॉर्म-J जारी नहीं किया जाएगा। सभी वाहनों को केवल मंजूर ट्रांसपोर्ट रूट पर ही चलने की अनुमति होगी। इसके लिए वाहनों की विंडस्क्रीन पर रूट मैप प्रदर्शित करना जरूरी होगा। इस्तेमाल होने वाली लिंक सड़कों की जानकारी संबंधित ग्राम पंचायतों को भी दी जाएगी।
डिप्टी कमिश्नर ने निर्देश दिए कि माइनिंग केवल मंजूर क्षेत्रों में और निर्धारित गहराई तक ही की जाए। इसके लिए प्रत्येक साइट पर पक्के बाउंड्री पिलर लगाए जाएंगे और उनके GPS कोऑर्डिनेट मैप किए जाएंगे। संबंधित सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली माइनिंग साइट्स पर इन पिलरों की जांच और वेरिफिकेशन करेंगे।
इसके अलावा, हर माइनिंग साइट पर डिस्प्ले बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा। इस पर ठेकेदार का विवरण, साइट का क्षेत्रफल, मंजूरी की अवधि और काम करने के निर्धारित घंटे दर्ज होंगे। काम के दौरान साइट पर माइनिंग सुपरवाइजर की मौजूदगी भी सुनिश्चित करनी होगी।
माइनिंग गतिविधियों के समय को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। माइनिंग केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही की जा सकेगी। हालांकि, लोडेड ट्रकों को सूर्यास्त के बाद अधिकतम एक घंटे का समय दिया जाएगा, ताकि वे गांवों की लिंक सड़कों से निकलकर नेशनल या स्टेट हाईवे तक पहुंच सकें। इसके बाद लिंक सड़कों पर वाहनों की आवाजाही की अनुमति नहीं होगी।
इन समय सीमाओं का सख्ती से पालन करवाने के लिए लुधियाना रूरल और खन्ना के पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। वहीं, माइनिंग साइट्स के मुख्य प्रवेश और निकास रास्तों पर CCTV कैमरे लगाए जाएंगे। निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नाइट-विजन ड्रोन के इस्तेमाल पर भी विचार किया जाएगा।
डिप्टी कमिश्नर ने सभी संबंधित विभागों को इन निर्देशों का तत्काल पालन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध माइनिंग, ओवरलोडिंग या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लोगों के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
लुधियाना में 2 नवंबर से पेंशनर्स जिला ट्रेजरी और सब-ट्रेजरी ऑफिस में ऑनलाइन लाइफ सर्टिफिकेट जमा कर सकेंगे। पेंशन बुक, आधार कार्ड और बैंक पासबुक लाना जरूरी।
लुधियाना / सत्ता संदेश
पंजाब सरकार की ओर से राज्य के पेंशनर्स को राहत देते हुए सालाना लाइफ सर्टिफिकेट जमा करने की प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है। अब पेंशनर्स 2 नवंबर से जिला ट्रेजरी ऑफिस और सब-ट्रेजरी ऑफिस में अपना लाइफ सर्टिफिकेट ऑनलाइन जमा करवा सकेंगे। इस सुविधा से पेंशनर्स को लाइफ सर्टिफिकेट जमा करवाने के लिए बैंकों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
डिस्ट्रिक्ट ट्रेजरी ऑफिसर लुधियाना उपनीत सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि पेंशनर्स के लिए ट्रेजरी ऑफिस में ऑनलाइन लाइफ सर्टिफिकेट जमा करने की सुविधा शुरू की जा रही है। इसके लिए बायोमेट्रिक सिस्टम का भी इस्तेमाल किया जाएगा। लाइफ सर्टिफिकेट जमा होते ही पेंशनर को तुरंत उसके मोबाइल फोन पर इसकी जानकारी मिल जाएगी।
उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार का उद्देश्य पेंशन वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, बेहतर और आसान बनाना है। इसी दिशा में सालाना लाइफ सर्टिफिकेट जमा करने की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जा रहा है। पेंशनर्स मोबाइल ऐप के माध्यम से भी अपना लाइफ सर्टिफिकेट ऑनलाइन जमा कर सकते हैं।
डिस्ट्रिक्ट ट्रेजरी ऑफिसर ने बताया कि पहले पेंशनर्स को हर साल नवंबर महीने में बैंकों के माध्यम से मैन्युअल रूप से लाइफ सर्टिफिकेट जमा करवाना पड़ता था। लेकिन अब वे अपने नजदीकी जिला ट्रेजरी ऑफिस या सब-ट्रेजरी ऑफिस में जाकर ऑनलाइन यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
उन्होंने पेंशनर्स से अपील की कि इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए अपनी पेंशन बुक, आधार कार्ड और बैंक पासबुक साथ लेकर आएं, ताकि लाइफ सर्टिफिकेट जमा करवाने के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
वर्धमान स्पेशल स्टील्स ने लुधियाना में मेगा कैंप लगाकर 101 जरूरतमंद लोगों को आधुनिक तकनीक से बने मुफ्त आर्टिफिशियल अंग वितरित किए।
लुधियाना / सत्ता संदेश
वर्धमान स्पेशल स्टील्स लिमिटेड की ओर से जरूरतमंद लोगों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से एक मेगा कैंप आयोजित किया गया। इस दौरान 101 जरूरतमंद लोगों को आधुनिक तकनीक से तैयार किए गए मुफ्त आर्टिफिशियल अंग प्रदान किए गए।
यह कैंप वर्धमान स्पेशल स्टील्स लिमिटेड ने सेंटर ऑफ आर्टिफिशियल लिम्ब्स और भारत विकास परिषद चैरिटेबल ट्रस्ट के सहयोग से लगाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता लुधियाना की एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (जनरल) श्रेयांसी जैन, IAS और DDF अंबर बंद्योपाध्याय ने की।
कैंप में जरूरतमंद लाभार्थियों को IIT और ऑटोबॉक की एडवांस्ड टेक्नोलॉजी की मदद से तैयार किए गए आधुनिक कृत्रिम अंग दिए गए। इनकी मदद से लाभार्थियों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी बेहतर तरीके से जीने और आत्मनिर्भर बनने में सहायता मिलेगी।
इस अवसर पर वर्धमान स्पेशल स्टील्स के CSR हेड अमित धवन ने बताया कि कंपनी हर साल लगभग 3,500 जरूरतमंद लोगों को मुफ्त आर्टिफिशियल अंग उपलब्ध करवाती है। इस सामाजिक पहल के लिए कंपनी की ओर से हर साल करीब 30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी दी जाती है। उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट कंपनी के चेयरमैन सचित जैन और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सौम्या जैन की पहल है।
एडिशनल डिप्टी कमिश्नर श्रेयांसी जैन ने वर्धमान स्पेशल स्टील्स की इस सामाजिक पहल की सराहना की। उन्होंने अमित धवन और उनकी पूरी टीम को जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए किए जा रहे प्रयासों की बधाई दी।
उन्होंने कहा कि समाज कल्याण के लिए किए जाने वाले ऐसे प्रयास जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं। आधुनिक कृत्रिम अंग मिलने से उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलता है।
खन्ना में कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने पब्लिक मीटिंग में लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को शिकायतों का प्राथमिकता से समाधान करने के निर्देश दिए।
खन्ना / पंजाब / सत्ता संदेश
पंजाब के कैबिनेट मंत्री एवं खन्ना के विधायक तरुणप्रीत सिंह सौंद ने अपने आवास पर आयोजित पब्लिक मीटिंग के दौरान विभिन्न इलाकों से पहुंचे लोगों की समस्याएं और शिकायतें सुनीं। इस दौरान उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को लोगों की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर हल करने और समय पर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
पब्लिक मीटिंग में लोगों ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े विभिन्न जनहित के मुद्दे मंत्री के सामने रखे। मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने प्रत्येक व्यक्ति की बात ध्यानपूर्वक सुनी और संबंधित मामलों में उचित कार्रवाई करवाने का भरोसा दिया।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लोगों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और उनका समाधान करने में किसी तरह की देरी न हो। साथ ही सभी मामलों में नियमों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इस मौके पर मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि आम लोगों की समस्याओं का समाधान करना सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। पब्लिक मीटिंग जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को अपनी समस्याएं सीधे सरकार तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि जनता और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल से समस्याओं का समाधान करने में मदद मिलती है। सरकार लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने और उनकी शिकायतों का निपटारा करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
सामाजिक सशक्तिकरण के लिए शिक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित समुदायों के छात्रों के लिए वित्तीय सहायता, उनकी स्कूली शिक्षा को जारी रखने, उच्च शिक्षा के लिए अवसर मुहैया कराने और अनुसंधान तथा पेशेवर करियर में उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने में मददगार साबित हो सकती है।
वित्तीय वर्ष 2014–15 से 2025–26 के बीच, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने छात्रवृत्तियों, कोचिंग सहायता, विदेशों में शिक्षा के लिए सहयोग और शोध फेलोशिप के ज़रिए इन उद्देश्यों को पूरा करने का प्रयास किया है।
विभाग का दृष्टिकोण वित्तीय बाधाओं को कम करने और शिक्षा के निरंतर विस्तार को मजबूत करने पर आधारित है। इसके प्रयासों का उद्देश्य अनुसूचित जातियों (एससी), अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी), आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों (ईबीसी) तथा डीनोटिफाई, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों (डीएनटी) के लिए अवसरों तक पहुँच को बेहतर बनाना है। इसके अलावा वित्तीय सहायता के साथ-साथ, छात्रवृत्ति प्रशासन में किए गए सुधारों के तहत पारदर्शिता, लाभार्थियों के सत्यापन और सहायता के सीधे वितरण पर भी ख़ासा ज़ोर दिया गया है।
स्कूली वर्षों से ही शिक्षा पर ज़ोर
अनुसूचित जातियों और अन्य वर्गों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना शुरुआती स्तर पर शिक्षा में मददगार साबित होती है। केंद्र प्रायोजित इस योजना का उद्देश्य साक्षरता को बढ़ावा देना, स्कूल छोड़ने की दर को कम करना और अनुसूचित जाति के बच्चों तथा ऐसे बच्चों की स्कूली शिक्षा को निरंतर बनाए रखना है, जिनके माता-पिता या अभिभावक अस्वच्छ और खतरनाक व्यवसायों में लगे हुए हैं।
वित्त वर्ष 2014–15 से 2025–26 के दौरान, इस योजना के तहत 4,893 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की गई, जिससे इस पूरी अवधि में लगभग 3 करोड़ लोगों को लाभ मिला। केवल वित्त वर्ष 2025–26 में ही 562 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिससे लगभग 27 लाख छात्रों को लाभ मिला। स्कूली शिक्षा के दौरान आने वाली आर्थिक बाधाओं को दूर करके, यह योजना वंचित बच्चों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में मदद करने का प्रयास करती है।
पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से अनुसूचित जाति के छात्रों को स्कूली शिक्षा के बाद भी सहायता दी जाती है। इस प्रमुख योजना का उद्देश्य उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ाना, छात्रों को पढ़ाई जारी रखने में मदद करना और उच्च शिक्षा में एससी छात्रों की भागीदारी को बढ़ाना है।
वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान, इस योजना के तहत 46,581 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता दी गई, जिससे लगभग 6.13 करोड़ छात्रों को लाभ मिला। वित्त वर्ष 2025-26 में, इस योजना ने 47.53 लाख छात्रों को सहायता प्रदान की।
डिजिटल सुधारों के ज़रिए पारदर्शिता को मजबूत करना
छात्रवृत्ति वितरण में एक बड़ा बदलाव तब आया, जब वित्त वर्ष 2021-22 से प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) प्रणाली लागू की गई। इस व्यवस्था के तहत, छात्रवृत्ति की राशि सीधे लाभार्थियों के आधार-लिंक्ड बैंक खातों में भेजी जाती है। इस सुधार का मकसद जवाबदेही बढ़ाना, देरी और धन के दुरुपयोग को कम करना तथा छात्रों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाना है।
डिजिटल सत्यापन इस ढांचे का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। डी-डुप्लीकेशन प्रक्रियाएं फर्जी या डुप्लिकेट लाभार्थियों की पहचान करने में मदद करती हैं, जबकि बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और इलेक्ट्रॉनिक ‘नो योर कस्टमर’ सत्यापन पहचान की जांच को और मजबूत बनाते हैं। डिजीलॉकर और एपीआई सेतु के साथ एकीकरण, प्रमाणपत्रों और दस्तावेजों के डिजिटल सत्यापन में सहायता करता है।
वन-टाइम रजिस्ट्रेशन यानी एक बार पंजीकरण की सुविधा से विभिन्न योजनाओं और शैक्षणिक वर्षों के दौरान लाभार्थियों को ट्रैक करना संभव हो जाता है। शैक्षिक डेटाबेस के साथ जुड़ाव से संस्थानों और छात्रों के रिकॉर्ड की पुष्टि करने में मदद मिलती है, जबकि यूआईडीएआई, एनपीसीआई और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के साथ जुड़ाव भुगतान प्रक्रिया को सरल बनाता है। ये सभी उपाय मिलकर उन प्रशासनिक प्रणालियों को मजबूत करते हैं, जिनके ज़रिए पात्र छात्रों तक छात्रवृत्ति सहायता पहुंचती है।
उच्च शिक्षा और शोध के लिए नए मार्ग
प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक सहायता के अलावा, स्कॉलरशिप्स फॉर हायर एजुकेशन फॉर यंग अचीवर्स या श्रेयस योजना, कोचिंग, प्रतिष्ठित संस्थानों, विदेश में पढ़ाई और अनुसंधान के अवसरों तक पहुंच सुनिश्चित करने में मदद करती है।
एससीऔर ओबीसी छात्रों के लिए मुफ्त कोचिंग योजना, प्रतियोगी और पेशेवर परीक्षाओं की तैयारी कर रहे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को अच्छी कोचिंग के लिए वित्तीय मदद प्रदान करती है। वित्त वर्ष 2025–26 में, 9.87 करोड़ रुपये खर्च करके 854 लाभार्थियों की मदद की गई। दरअसल इस सहायता का मकसद उन आर्थिक बाधाओं को कम करना है, जिनका सामना छात्र शैक्षणिक और पेशेवर अवसरों की तैयारी के दौरान करते हैं।
एससीछात्रों के लिए टॉप क्लास एजुकेशन स्कीम, देश भर के प्रमुख संस्थानों में पढ़ाई कर रहे मेधावी छात्रों को मदद करती है। इस योजना के तहत खर्च वित्त वर्ष 2014–15 के 19 करोड़ रुपये से लगभग 6 गुना बढ़कर, वित्त वर्ष 2025–26 में 117 करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि के दौरान, सालाना लाभार्थियों की संख्या 1,568 से बढ़कर 4,742 हो गई, जो उच्च गुणवत्ता वाली उच्च शिक्षा तक पहुंच के लिए बढ़ते प्रयासों को दर्शाती है।
(लेखक सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय में हैं)