ब्रेकिंग न्यूज़
बर्तन मांजने वाली कलिता मांझी अब बनीं माननीय विधायक: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 की सबसे प्रेरक कहानी

नैशनल डेस्क : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बीच आउसग्राम सीट से बीजेपी उम्मीदवार कलिता मांझी की जीत ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। कलिता कोई सामान्य राजनेता नहीं, बल्कि एक घरेलू कामगार (Domestic Worker) रही हैं, जो दूसरों के घरों में बर्तन मांजने और साफ-सफाई का काम करके अपना जीवन यापन करती थीं।

ऐतिहासिक जीत और सादगी: कलिता मांझी ने इस चुनाव में 1,07,692 वोट हासिल किए और अपने प्रतिद्वंदी श्यामा प्रसन्ना लोहार को 12,535 वोटों के अंतर से करारी शिकस्त दी। उनकी यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि वह बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं और कभी महीने के महज 2,500 से 4,500 रुपये कमाती थीं। 2021 के चुनाव में हार मिलने के बावजूद बीजेपी ने उन पर भरोसा बनाए रखा और इस बार उनकी जमीनी पकड़ ने उन्हें जीत दिलाई।

जीत के बाद भी नहीं बदली दिनचर्या: विधायक बनने के बाद भी कलिता की सादगी बरकरार है। सोमवार रात जीत का प्रमाण पत्र लेने के बाद उन्होंने घर आकर अपनी सास के हाथ का बना साधारण खाना खाया और अगले ही दिन मंगलवार को वह फिर से अपने घर के काम, जैसे कपड़े धोने आदि में जुट गईं। वह एक धार्मिक महिला हैं और विधायक बनने के अगले दिन व्रत होने के कारण उन्होंने कुछ नहीं खाया।

प्रेरणा और भविष्य के लक्ष्य: कलिता बताती हैं कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों से प्रभावित होकर राजनीति में आईं। वह अपने जैसे गरीब लोगों के उत्थान और महिलाओं की सुरक्षा के लिए काम करना चाहती हैं। शपथ ग्रहण समारोह के लिए उनके पास कोई अच्छी साड़ी नहीं थी, जिसे देखते हुए उनके मालिक कृष्णा पात्रा ने, जिनके घर वह पिछले 20 वर्षों से काम कर रही हैं, उन्हें साड़ी उपहार में देने का निर्णय लिया है।

UIDAI ने साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक को मजबूत करने के लिए NFSU के साथ साझेदारी की

नई दिल्ली/सत्ता संदेश

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण और राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय ने डिजिटल फॉरेंसिक, साइबर सुरक्षा और उन्नत प्रौद्योगिकी अनुसंधान के क्षेत्रों में एक संरचित, पांच-वर्षीय सहयोग स्थापित करने के लिए हाथ मिलाया है।

यह समझौता ज्ञापन (MoU) सहयोग के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करता है और यूआईडीएआई के डिजिटल बुनियादी ढांचे में साइबर मजबूती को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से दोनों प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों को एक साथ लाता है, जो भारत के डिजिटल पहचान पारिस्थितिकी तंत्र का आधार है।

इस समझौते का आदान-प्रदान यूआईडीएआई के सीईओ विवेक चंद्र वर्मा और एनएफएसयू के गुजरात परिसर के निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) एस.ओ. जुनारे के बीच किया गया। इस अवसर पर यूआईडीएआई के डिप्टी डायरेक्टर जनरल अभिषेक कुमार सिंह सहित दोनों पक्षों के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

यह सहयोग छह रणनीतिक स्तंभों पर केंद्रित होगा, जिनमें अकादमिक और पेशेवर विकास, सूचना सुरक्षा और सिस्टम एकीकरण, फॉरेंसिक बुनियादी ढांचा और प्रयोगशाला उत्कृष्टता, साइबर सुरक्षा गतिविधियों के लिए तकनीकी सहायता, तकनीकी परामर्श और अनुसंधान (जिसमें एआई, ब्लॉकचेन, डीपफेक डिटेक्शन और क्रिप्टोग्राफिक तकनीकों जैसे उभरते क्षेत्रों में संयुक्त शोध शामिल है), तथा रणनीतिक प्लेसमेंट और आउटरीच शामिल हैं।

यूआईडीएआई के सीईओ विवेक चंद्र वर्मा ने कहा, “यह सहयोग भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को समर्थन देने वाली सुरक्षा, मजबूती और फॉरेंसिक क्षमताओं को और सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे देश की डिजिटल पहचान प्रणालियों की सुरक्षा और अधिक सुनिश्चित होगी।”