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पहुंच से प्राधिकार तक: नारीशक्ति को अगले दशक का भारत का निर्णायक सुधार बनाना
  • डॉ. संगीता रेड्डी

पिछले एक दशक में, भारत ने कुछ वैसा किया है जिसे कुछ ही देश बड़े पैमाने पर हासिल कर पाए हैं। भारत ने महिला सशक्तिकरण को इरादों से आगे जाकर बुनियादी ढांचे में बदल दिया है।

यह बदलाव कोई अनायास नहीं हुआ। यह सुनियोजित था। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, नीतिगत रूप से महिलाओं को विकास के केन्द्र में अधिक से अधिक रखा गया। ऐसा यह मानते हुए किया गया कि जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं, तो पूरी अर्थव्यवस्था में तेजी आती है।

इसके नतीजे सामने हैं। और इन नतीजों को मापा जा सकता है।

प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत 57 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गए हैं। इन खातों  में से 55 प्रतिशत से अधिक महिलाओं के हैं। इस कदम से लाखों लोगों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में पहली बार कदम रखने का मौका मिला है। लगभग 10 करोड़ महिलाएं, 90 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों में संगठित होकर, जमीनी स्तर पर उद्यमिता और स्थानीय आर्थिक मजबूती का वाहक बन रही हैं।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना 10.5 करोड़ से अधिक परिवारों तक पहुंच चुकी है। इससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कम हुए हैं और महिलाओं को अधिक समय लेने वाले श्रम से मुक्ति मिली है। ऋण तक पहुंच बढ़ी है और मुद्रा योजना के तहत दिए गए लगभग 70 प्रतिशत ऋण महिला उद्यमियों को मिले हैं। महिला श्रमशक्ति की भागीदारी बढ़कर लगभग 37 प्रतिशत हो गई है। इससे महिलाओं की भागीदारी में लंबे समय से चला आ रहा गिरावट का रुझान अब उलट गया है।

स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में, आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसे कार्यक्रमों ने जीवन के महत्वपूर्ण चरणों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को बढ़ाया है और नाजुक स्थितियों में कमी लाई है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसी पहलों ने समाज में गहराई से पैठी सोच को बदलना शुरू कर दिया है।

अलग-अलग, ये सभी कार्यक्रम बेहद ठोस हैं। समग्र रूप से देखा जाए तो, ये कार्यक्रम भारत में महिलाओं को देखने के नजरिए में आए एक संरचनात्मक बदलाव को दर्शाते हैं। महिलाओं को अब मात्र समर्थन पाने वाली के बजाय विकास के वाहक के रूप में देखा जा रहा है।

नीति निर्माताओं और प्रशासकों के लिए, इसके सबक बिल्कुल साफ हैं: जब डिजाइन, कार्यान्वयन और जवाबदेही व्यवस्थित हों, तो व्यापक स्तर पर काम करना संभव होता है।

स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में अपने काम के दौरान, मैंने देखा है कि जब प्रणालियां सैद्धांतिक मॉडलों के बजाय वास्तविक जरूरतों पर आधारित होती हैं, तो नतीजे बेहतर होते हैं। यही सिद्धांत यहां भी लागू होता है। जहां पहुंच सरल होती है, जहां वितरण में निरंतरता होती है और जहां नतीजों पर नजर रखी जाती है, वहां असर बिल्कुल साफ नजर आता है।

फिर भी, अगले चरण में और भी अधिक ध्यान देने की जरूरत होगी। क्योंकि हमारे सामने चुनौती अब नीति निर्माण की नहीं, बल्कि नीति के कार्यान्वयन की है।

कार्यक्रमों की व्यापकता के बावजूद, जागरूकता संबंधी कमजोरियां बनी हुई हैं। इन कार्यक्रमों में शामिल होने के आंकड़े एकसमान नहीं है। अंतिम छोर तक आपूर्ति अभी भी स्थानीय क्षमता पर ही निर्भर हैं। अवसर पाने वाली प्रत्येक महिला की दृष्टि से, ऐसी कई और महिलाएं हैं जो नीतिगत कमियों की वजह से नहीं, बल्कि पहुंच की कमी के कारण हाशिए पर बनी हुई हैं।

यहीं पर प्रशासनिक नेतृत्व की भूमिका निर्णायक हो जाती है।

हमें योजनाओं की घोषणाओं से आगे बढ़कर, उनकी व्यापकता सुनिश्चित करने की दिशा में काम करना होगा। आउटपुट को मापने से आगे बढ़कर नतीजों पर नजर रखने की दिशा में बढ़ना होगा। पात्रता को कागज़ पर दर्ज करने से आगे जाकर व्यवहार में उसकी उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। जिला स्तर पर स्वामित्व, डेटा-आधारित निगरानी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होंगे। प्रौद्योगिकी इस प्रक्रिया को गति दे सकती है, लेकिन यह जमीनी जवाबदेही का स्थान नहीं ले सकती।

आज हर नीति निर्माता के सामने बिल्कुल सीधा सा सवाल है: हम यह कैसे सुनिश्चित करें कि कोई भी योग्य महिला पीछे न छूटे?

यहीं पर नारी शक्ति वंदन अधिनियम हमारे दौर के सबसे महत्वपूर्ण सुधारों में से एक बन सकता है।

विधायी निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाकर, नीति निर्माण को वास्तविक जीवन के अनुभवों के अनुरूप बनाने की संभावना पैदा होती है। महिला नेता समुदाय की वास्तविकताओं से जुड़ी अंतर्दृष्टि लेकर आती हैं – ऐसी अंतर्दृष्टि जो कार्यक्रमों को मजबूत कर सकती है, उनके कार्यान्वयन को बेहतर बना सकती है, लक्ष्यीकरण में सुधार कर सकती है और उन्हें तेजी से अपनाने में सहायक साबित हो सकती है।

उद्देश्यपूर्ण तरीके से कार्यान्वित किए जाने पर, नारी शक्ति वंदन अधिनियम का प्रभाव कई गुना बढ़ सकता है: नेतृत्व में अधिक महिलाएं आ सकती हैं, अधिक उत्तरदायी नीतियां बन सकती हैं, उच्च भागीदारी और मजबूत नेतृत्व क्षमता का निर्माण संभव हो सकता है। इसी तरह सुधार अपने-आप सुदृढ़ होता जाएगा। इसी तरह आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य भी हासिल किए जा सकेंगे।

हम ज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी द्वारा परिभाषित दशक में कदम रख रहे हैं। भारत के पास पहले से ही एक मजबूत आधार मौजूद है। यहां वैश्विक स्तर पर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) की शिक्षा में महिलाओं का अनुपात सबसे अधिक है। इस उपलब्धि को बिना कोई समय गवांए स्वास्थ्य सेवा, विज्ञान, उद्यम और शासन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व में बदल देने का यही सही क्षण है।

पिछले दशक ने यह दर्शाया है कि नीति निर्माण और कार्यान्वयन के साथ राजनीतिक इच्छाशक्ति का समन्वय होने पर क्या कुछ संभव हो सकता है। आज की ठोस बुनियाद पर, नारी शक्ति वंदन अधिनियम का कार्यान्वयन सशक्तिकरण को पहुंच से परे प्राधिकार तक ले जा सकता है।

लेकिन प्रतिनिधित्व को क्षमता में बदलना चाहिए और क्षमता का विकास संस्थागत समर्थन के जरिए होना चाहिए, ताकि कार्यान्वयन से सही नतीजे हासिल हो सकें।

अगले पांच वर्षों में, हमें महिलाओं को न केवल चुनावी रूप से, बल्कि संस्थागत रूप से भी नेतृत्व करने के लिए तैयार करने की दिशा में निवेश करना होगा। इसका सीधा मतलब है व्यवस्थित  मार्गदर्शन, नेतृत्व संबंधी प्रशिक्षण, नीतिगत अनुभव और प्रभावी शासन को संभव बनाने वाली प्रशासनिक सहायता प्रणाली।

इसका मतलब यह भी है कि हमें नीति निर्माण के तरीकों पर नए सिरे से विचार करना होगा। कार्यक्रम सुलभ, समझने में आसान और तेज गति से कार्यान्वित किए जा सकने वाले होने चाहिए। नीतियों को जरूरत के हिसाब से विकसित करने के लिए फीडबैक प्रणालियों को मजबूत किया जाना चाहिए। और सफलताओं को केवल कवरेज से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, आय, शिक्षा और सशक्तिकरण जैसे नतीजों में हुए बदलाव के आधार पर मापा जाना चाहिए। अब जबकि भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर है, ऐसे में यह कोई गौण मुद्दा नहीं है – यह हमारी सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। महिलाओं की भागीदारी आर्थिक विकास, सामाजिक स्थिरता और संस्थागत प्रभावशीलता से सीधे जुड़ी हुई है।

इसलिए सफलता का असली पैमाना यह नहीं होगा कि हम कितनी योजनाएं बनाते हैं, बल्कि यह होगा कि हम कितने लोगों के जीवन को बदल पाते हैं।

अगर भारत पहुंच के मामले में संतृप्ति हासिल कर लेता है, भागीदारी को मजबूत करता है और नेतृत्व को सक्षम बनाता है, तो वह न केवल अपनी महिलाओं को सशक्त बनाएगा बल्कि अपने विकास की राह को भी नए सिरे से निर्धारित करेगा।

नीति निर्माताओं और प्रशासकों के लिए जिम्मेदारियां बिल्कुल साफ हैं। इन्हें पूरा करने का समय अब ​​आ गया है।

(लेखिका अपोलो हॉस्पिटल्स में संयुक्त प्रबंध निदेशक हैं)

जसमीन सैंडल्स का जलवा: ₹20 में सीडी बेचने वाली लड़की बनीं सबसे महंगी पंजाबी सिंगर; अब एक गाने के लिए लेती हैं ₹35 लाख

मनोरंजन डेस्क: पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री में अपनी बुलंद आवाज और अनोखे अंदाज के लिए मशहूर जसमीन सैंडल्स ने एक नया मुकाम हासिल कर लिया है। हालिया फिल्म ‘धुरंधर-2’ के सुपरहिट गाने ‘जाइए सज्जना’ की सफलता के बाद, वे पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री की सबसे ज्यादा फीस लेने वाली महिला गायिका बन गई है।

रिकॉर्ड तोड़ फीस: म्यूजिक इंडस्ट्री के सूत्रों के अनुसार, जसमीन अब एक फिल्मी गाने के लिए करीब 30 से 35 लाख रुपये चार्ज करती हैं। इसके अलावा, एक लाइव कॉन्सर्ट के लिए उनकी फीस 10 लाख से 25 लाख रुपये के बीच होती है। इस मामले में उन्होंने नेहा कक्कड़, निम्रत खैरा और सुनंदा शर्मा जैसी दिग्गजों को भी पीछे छोड़ दिया है।

₹60 करोड़ की संपत्ति: कभी संघर्ष के दिनों से गुजरने वाली जसमीन की कुल नेटवर्थ (जायदाद) आज करीब 60 करोड़ रुपये है। सैन फ्रांसिस्को में उनका लगभग 20 करोड़ रुपये का एक आलीशान बंगला भी है।

जालंधर से कैलिफोर्निया का संघर्ष: 1985 में जालंधर में जन्मी जसमीन का बचपन काफी चुनौतियों भरा रहा। 13 साल की उम्र में वे परिवार के साथ अमेरिका चली गईं। एक समय ऐसा था जब वे कैलिफोर्निया के क्लबों के बाहर खड़े होकर अपने गानों की सीडी (CD) महज 20-20 रुपये में बेचती थीं ताकि लोग उनका संगीत सुन सकें।

सफलता का सफर: ‘गुलाबी क्वीन’ के नाम से मशहूर जसमीन ने महज 6 साल की उम्र में गाना शुरू किया था। उन्हें असली पहचान 2012 में एल्बम ‘गुलाबी’ से मिली। इसके बाद 2014 में सलमान खान की फिल्म ‘किक’ के गाने ‘यार ना मिले’ ने उन्हें रातों-रात बॉलीवुड का बड़ा स्टार बना दिया।

अनोखा अंदाज: जसमीन ने अपनी पंजाबी जड़ों को पश्चिमी ‘हिप-हॉप’ संगीत के साथ जोड़कर एक नया स्टाइल पैदा किया, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया।उनकी यह कहानी साबित करती है कि बिना किसी ‘गॉडफादर’ के भी अपनी मेहनत और जुनून के दम पर दुनिया जीती जा सकती है।

कमल भाभी हत्याकांड: मुख्य आरोपी अमृतपाल सिंह गिरफ्तार; मिडिल ईस्ट से डिपोर्ट कर दिल्ली एयरपोर्ट पर दबोचा

पंजाब डेस्क: पंजाब पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है। बठिंडा की मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर कंचन कुमारी उर्फ कमल भाभी की हत्या के मुख्य आरोपी अमृतपाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी को पश्चिमी एशिया (मिडिल ईस्ट) से डिपोर्ट कर 10 अप्रैल 2026 की सुबह दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया।

सनसनीखेज हत्या का मामला: अमृतपाल सिंह जून 2025 में बठिंडा में हुई कमल भाभी की हत्या का मुख्य आरोपी है। उसने 9 जून, 2025 को अपने तीन साथियों के साथ मिलकर पीड़िता को किडनैप किया और उसकी हत्या कर दी।

अस्पताल के बाहर मिली थी लाश: हत्या के बाद आरोपियों ने कमल भाभी की लाश को बठिंडा के आदेश हॉस्पिटल में खड़ी एक कार में छोड़ दिया था।

विदेश भाग गया था आरोपी: वारदात को अंजाम देने के बाद अमृतपाल कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए देश छोड़कर मिडिल ईस्ट भाग गया था, जबकि उसके दो साथियों को पुलिस ने पहले ही पकड़ लिया था।

ऐसे हुई गिरफ्तारी: पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग के ‘ओवरसीज फ्यूजिटिव ट्रैकिंग एंड एक्सट्रैडिशन सेल’ ने केंद्रीय एजेंसियों की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रेस की। इसके बाद एक्सट्रैडिशन (प्रत्यर्पण) की प्रक्रिया शुरू की गई और उसे भारत डिपोर्ट कराया गया।

दिल्ली में गिरफ्तारी: जैसे ही आरोपी 10 अप्रैल की सुबह दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा, पुलिस ने उसे अपनी गिरफ्त में ले लिया।

विदेश से आने वाला पैसा अब ‘उसी दिन’ खाते में होगा जमा; RBI ने बदला सालों पुराना नियम, खत्म होगा लंबा इंतजार

बिजनेस डेस्क: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी ट्रांजैक्शन के जरिए पैसा प्राप्त करने वाले ग्राहकों के लिए एक बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है। नए निर्देशों के तहत, अब विदेश से आने वाला पैसा उसी दिन ग्राहक के खाते में क्रेडिट करना अनिवार्य होगा, जिससे ट्रांजैक्शन की रफ्तार बढ़ेगी और देरी खत्म होगी।

उसी दिन क्रेडिट का नियम: अब यदि बैंकों को विदेशी पैसा (इनवर्ड रेमिटेंस) विदेशी मुद्रा बाजार के समय के दौरान प्राप्त होता है, तो उन्हें उसे उसी दिन ग्राहक के खाते में जमा करना होगा। यदि पैसा बाजार बंद होने के बाद आता है, तो उसे अगले कार्य दिवस में क्रेडिट करना जरूरी होगा।

दो दिन का इंतजार खत्म: वर्तमान व्यवस्था में विदेश से पैसा आने में अक्सर 1 से 2 दिन या उससे अधिक समय लग जाता था। इस देरी से उन लोगों को परेशानी होती थी जो परिवार या बिजनेस की जरूरतों के लिए इस राशि पर निर्भर रहते हैं।

तुरंत मिलेगी सूचना: जैसे ही बैंकों को विदेश से पैसा आने की जानकारी मिलेगी, उन्हें तुरंत ग्राहक को सूचित करना होगा। यदि बैंकिंग समय के बाद सूचना मिलती है, तो अगले कार्य दिवस की शुरुआत में जानकारी देना अनिवार्य होगा।

रियल-टाइम अपडेट पर जोर: आरबीआई ने बैंकों को दिन के अंत में होने वाले मिलान (Reconciliation) की जगह रियल-टाइम या हर एक घंटे में सिस्टम अपडेट करने का निर्देश दिया है। साथ ही, बैंकों को STP (Straight Through Processing) जैसे ऑटोमेटेड सिस्टम अपनाने की सलाह दी गई है ताकि बिना मानवीय दखल के पैसा सीधे खाते में पहुँच सके।ट्रैकिंग की सुविधा: बैंकों को ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करने को कहा गया है जहाँ ग्राहक अपने ट्रांजैक्शन को ट्रैक कर सकें और जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन जमा कर सकें।

कब से लागू होगा नियम: यह नया नियम जारी होने के छह महीने बाद से प्रभावी होगा, ताकि बैंकों को अपना तकनीकी सिस्टम अपडेट करने का पर्याप्त समय मिल सके।आरबीआई का यह कदम न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगा, बल्कि भारत के पेमेंट सिस्टम को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत बनाएगा।

IPL 2026 में अनकैप्ड खिलाड़ियों का ‘गदर’: पंत-ग्रीन जैसे दिग्गज फेल, तो रिजवी और मुकुल चौधरी ने मचाया तहलका; टीम इंडिया का खटखटा रहे दरवाजा

स्पोर्टस डेस्क: आईपीएल 2026 में इस बार बड़े और नामी सितारों से ज्यादा भारत के अनकैप्ड (Uncapped) खिलाड़ी अपनी चमक बिखेर रहे हैं। जहां करोड़ों की मोटी रकम लेने वाले कैमरून ग्रीन और ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ी अब तक कोई बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे हैं, वहीं कम कीमत में खरीदे गए युवा खिलाड़ी हर मैच में नए हीरो बनकर उभर रहे हैं।

मुकुल चौधरी का धमाका: लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के 21 वर्षीय खिलाड़ी मुकुल चौधरी ने कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के खिलाफ नाबाद 54 रनों की तूफानी पारी खेलकर अपनी टीम को जीत दिलाई। मुकुल को LSG ने 2.60 करोड़ रुपये में खरीदा था और उनके एक अनोखे छक्के ने टीम मालिक संजीव गोयनका को भी झूमने पर मजबूर कर दिया।

समीर रिजवी और अंगक्रश का जलवा: इस सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले अनकैप्ड खिलाड़ियों में यशस्वी जायसवाल 170 रनों के साथ टॉप पर हैं, लेकिन समीर रिजवी (160 रन) और केकेआर के अंगक्रश रघुवंशी (155 रन) उनसे ज्यादा पीछे नहीं हैं।वैभव सूर्यवंशी की निरंतरता: राजस्थान रॉयल्स के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने भी अब तक 3 मैचों में 122 रन बनाकर अपनी काबिलियत साबित की है।

भारतीय टीम में मौके की उम्मीद: क्रिकेट जानकारों का मानना है कि यदि इन युवा खिलाड़ियों का प्रदर्शन इसी तरह जारी रहा, तो जल्द ही ये भारतीय राष्ट्रीय टीम की जर्सी में नजर आ सकते हैं।

दिग्गजों पर भारी युवा: रिपोर्ट के अनुसार, जहां एक ओर अनुभवी खिलाड़ी संघर्ष कर रहे हैं, वहीं ये अनकैप्ड खिलाड़ी अपनी निडर बल्लेबाजी से दर्शकों का दिल जीत रहे हैं और ऑरेंज कैप की रेस में भी बने हुए हैं।