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iPhone 17 Pro Max की कीमत में भारी गिरावट, अब ₹1.37 लाख से भी कम में खरीदने का मौका

टेक डेस्क : एपल फैंस के लिए एक बेहतरीन खबर है क्योंकि पहली बार iPhone 17 Pro Max की कीमत में बड़ी कटौती देखी जा रही है. विजय सेल्स (Vijay Sales) पर चल रहे खास ऑफर के तहत, इस प्रीमियम स्मार्टफोन की प्रभावी कीमत अब 1.37 लाख रुपये से भी नीचे पहुंच गई है।

कीमत और ऑफर्स का गणित:विजय सेल्स पर इस फोन की लिस्टेड कीमत 1,47,900 रुपये है, जो इसके लॉन्च प्राइस (1,49,900 रुपये) से कम है। प्लेटफॉर्म पर चुनिंदा बैंक ऑफर्स के जरिए 11,000 रुपये तक की अतिरिक्त छूट दी जा रही है।

इन सभी ऑफर्स को मिलाकर फोन की प्रभावी कीमत 1,37,000 रुपये से कम हो जाती है। इसके अलावा, ग्राहक अपने पुराने फोन को एक्सचेंज करके और भी अधिक बचत कर सकते हैं, हालांकि यह डिवाइस की कंडीशन पर निर्भर करेगा।

iPhone 17 Pro Max के दमदार फीचर्स:

परफॉर्मेंस: इसमें एप्पल का लेटेस्ट A19 Pro चिपसेट दिया गया है, जो हैवी गेमिंग जैसे ‘गेमशिन इम्पैक्ट’ के लिए बेहतरीन है।

डिस्प्ले: फोन में 6.9 इंच का OLED डिस्प्ले है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है।

कैमरा: इसमें ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिलता है, जिसमें तीनों सेंसर 48MP (मेन, अल्ट्रावाइड और 4x टेलीफोटो) के हैं।

बैटरी: यह डिवाइस लंबी बैटरी लाइफ, USB-C चार्जिंग और MagSafe सपोर्ट के साथ आता है।

AI इम्पैक्ट समिट 2026: पीएम मोदी ने भारत को बताया दुनिया का सबसे बड़ा टेक टैलेंट हब, वैश्विक दिग्गजों का लगा जमावड़ा

नेशनल डेस्क: नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के चौथे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया भर के 20 देशों के राष्ट्राध्यक्षों और टेक दिग्गजों को संबोधित किया,। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में वैश्विक हस्तियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत आज दुनिया में सबसे बड़े टेक टैलेंट पूल का केंद्र है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से मानव सामर्थ्य कई गुना बढ़ गया है, लेकिन हमें विजन और जिम्मेदारी दोनों को बड़ा रखना होगा।

मैक्रों के ‘नमस्ते’ और UPI की तारीफ ने बटोरीं सुर्खियां : समिट में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस सहित कई वैश्विक नेता शामिल हुए,। राष्ट्रपति मैक्रों ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘नमस्ते’ से की, जिसने सबका ध्यान खींचा। उन्होंने भारत में तेजी से हो रहे बदलावों और यूपीआई (UPI) की सफलता की जमकर सराहना की। वहीं, यूएन महासचिव गुटेरेस ने ग्लोबल साउथ में पहले एआई शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए भारत के नेतृत्व को बधाई दी,।

टाटा और गूगल की बड़ी घोषणाएं : टेक जगत के दिग्गजों ने भी भारत में बड़े निवेश और साझेदारी के संकेत दिए। टाटा समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने घोषणा की कि टाटा ग्रुप ओपनएआई (OpenAI) के साथ साझेदारी में भारत का पहला बड़े पैमाने पर एआई-ऑप्टिमाइज्ड डेटा सेंटर बना रहा है। दूसरी ओर, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने बताया कि गूगल भारत में अपने 15 अरब डॉलर के निवेश के तहत विशाखापत्तनम में एक पूर्ण-स्टैक एआई हब स्थापित कर रहा है, जिससे रोजगार और अत्याधुनिक तकनीक के अवसर पैदा होंगे।

टेक्नोलॉजी का लोकतंत्रीकरण : केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मेहमानों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का विजन टेक्नोलॉजी को डेमोक्रेटाइज़ (democratize) करना है ताकि इसका लाभ आम लोगों तक आसानी से पहुंच सके। इस शिखर सम्मेलन में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं, जहाँ स्टार्टअप्स और टेक कंपनियां अपनी अत्याधुनिक तकनीक का प्रदर्शन कर रही हैं।

यूट्यूब यूजर्स के लिए राहत: करीब एक घंटे तक डाउन रहने के बाद बहाल हुई सेवा, जानें क्या थी वजह

टेक डेस्क : दुनिया के सबसे लोकप्रिय वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म यूट्यूब (YouTube) की सेवाएं करीब एक घंटे तक बाधित रहने के बाद अब सामान्य हो गई हैं। बुधवार, 18 फरवरी 2026 की सुबह यूट्यूब के अचानक डाउन होने से भारत सहित दुनिया भर के लाखों यूजर्स को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

रिकमंडेशन सिस्टम में आई तकनीकी खराबी: यूट्यूब की टीम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि उनके ‘रिकमंडेशन सिस्टम’ (recommendation system) में आई एक समस्या के कारण यूट्यूब के सभी प्लेटफॉर्म्स, जिनमें होमपेज, यूट्यूब ऐप, यूट्यूब म्यूजिक और यूट्यूब किड्स शामिल हैं, पर वीडियो दिखाई नहीं दे रहे थे। हालांकि अब होमपेज फिर से दिखने लगा है, लेकिन टीम अभी भी पूरी तरह से समस्या को ठीक करने पर काम कर रही है।

यूजर्स को मिलीं ये परेशानियां: आउटेज के दौरान यूजर्स को ऐप और वेबसाइट पर ‘something went wrong’ का एरर दिखाई दे रहा था। इसके अलावा, अमेरिका और भारत सहित कई देशों में यूजर्स के अकाउंट अपने आप लॉगआउट हो रहे थे। टीवी ऐप पर भी दोबारा लॉगिन मांगा जा रहा था।

भारत और अमेरिका में बड़े स्तर पर असर : डाउनडिटेक्टर के मुताबिक, अमेरिका में लगभग 2,83,490 लोगों ने यूट्यूब एक्सेस न कर पाने की रिपोर्ट की। भारत में भी सुबह 6:42 बजे के करीब हजारों यूजर्स ने तकनीकी दिक्कत की शिकायत दर्ज कराई, जिनमें से 72% शिकायतें यूट्यूब ऐप को लेकर थीं। गूगल सपोर्ट और टीम यूट्यूब ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले की जांच कर रहे हैं और जल्द ही इसे पूरी तरह दुरुस्त कर लिया जाएगा।

बिना इंटरनेट चलेगा भारत का अपना AI; Sarvam AI ने लॉन्च किया ‘Sarvam Edge’, ChatGPT और Gemini को मिलेगी टक्कर

गैजेट डेस्क : भारतीय एआई स्टार्टअप सर्वम एआई (Sarvam AI) ने अपना नया ‘देसी’ एआई मॉडल ‘सर्वम एज’ (Sarvam Edge) पेश कर दिया है। इस टूल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे चलाने के लिए इंटरनेट की जरूरत नहीं होगी और इसे सीधे स्मार्टफोन या लैपटॉप पर एक्सेस किया जा सकेगा।

इंटरनेट के बिना भी मिलेगी हाई स्पीड और प्राइवेसी: सर्वम एज को विशेष रूप से स्पीड, प्राइवेसी और रिलायबिलिटी (विश्वसनीयता) पर ध्यान केंद्रित करते हुए बनाया गया है। चूंकि यह मॉडल ऑफलाइन काम करता है, इसलिए डेटा डिवाइस पर ही प्रोसेस होता है और इसे क्लाउड पर भेजने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे यूजर की प्राइवेसी बेहतर होती है। यह उन क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हो सकता है जहाँ इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर या अस्थिर है।

भारतीय भाषाओं पर मजबूत पकड़: यह एआई टूल मुख्य भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है और यह स्वयं पहचान सकता है कि यूजर कौन सी भाषा बोल रहा है। इसके फीचर्स में शामिल हैं:ट्रांसलेशन: अंग्रेजी सहित 11 भाषाओं में सपोर्ट और 100 से अधिक भाषाओं के कॉम्बिनेशन में टू-वे ट्रांसलेशन।

स्पीच रिकग्निशन और टेक्स्ट-टू-स्पीच: यह वॉयस असिस्टेंट के रूप में भी बेहद उपयोगी है।

स्मार्टफोन और लैपटॉप के लिए अनुकूल: कंपनी का दावा है कि सर्वम एज मॉडर्न स्मार्टफोन्स और लैपटॉप्स के लिए ऑप्टिमाइज किया गया है और इसके लिए किसी विशेष हार्डवेयर की जरूरत नहीं है। यह कम मेमोरी का इस्तेमाल करते हुए मौजूदा प्रोसेसर्स पर भी तेज रिस्पॉन्स टाइम देने में सक्षम है। अपनी इन खूबियों के साथ यह मॉडल वैश्विक दिग्गजों जैसे चैटजीपीटी (ChatGPT) और जेमिनी (Gemini) को कड़ी टक्कर देने के लिए तैयार है।

भारत कृत्रिम मेधा से आ रहे बदलाव के क्षेत्र में अग्रणी है: प्रधानमंत्री मोदी

नयी दिल्ली, 16 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत कृत्रिम मेधा (एआई) से आ रहे बदलाव के क्षेत्र में अग्रणी है और एआई क्षेत्र में उसकी प्रगति महत्वाकांक्षा एवं दायित्व दोनों को दर्शाती है।

मोदी की यह टिप्पणी उस दिन आई है जब वह यहां भारत मंडपम में ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो’ 2026 का उद्घाटन करने वाले हैं।

‘इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो’ 2026 का आयोजन 16 से 20 फरवरी तक भारत मंडपम में ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के साथ किया जाएगा।

मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ एआई पर चर्चा करने के लिए दुनिया को एक साथ ला रहे हैं! आज से, भारत दिल्ली के भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी कर रहा है। मैं इस शिखर सम्मेलन में दुनिया भर के नेताओं, उद्योगपतियों, नवोन्मेषकों, नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी प्रेमियों का हार्दिक स्वागत करता हूं।’’

उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन का विषय ‘‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’’ है, जो मानव-केंद्रित प्रगति के लिए कृत्रिम मेधा का उपयोग करने की ‘‘हमारी साझा प्रतिबद्धता’’ को दर्शाता है।

मोदी ने कहा कि आज एआई स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि, शासन और उद्यम सहित कई क्षेत्रों में बदलाव ला रहा है।

उन्होंने कहा कि ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ एआई के विविध पहलुओं जैसे नवाचार, सहयोग, जिम्मेदार उपयोग आदि पर वैश्विक चर्चा को समृद्ध करेगा।

मोदी ने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि शिखर सम्मेलन के परिणाम एक प्रगतिशील, नवोन्मेषी और अवसर-उन्मुख भविष्य को आकार देने में सहायक होंगे।’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘भारत की 1.4 अरब जनता की बदौलत हमारा देश एआई से आए परिवर्तन में अग्रणी स्थान पर है। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से लेकर जीवंत स्टार्टअप तंत्र और अत्याधुनिक अनुसंधान तक, एआई में हमारी प्रगति महत्वाकांक्षा और जिम्मेदारी दोनों को दर्शाती है।”

इससे पहले रविवार को मोदी ने भारत को डिजिटल बुनियादी ढांचे और कृत्रिम मेधा के वैश्विक केंद्र के रूप में पेश किया और कहा कि भारत दुनिया के डेटा को संभालने एवं प्रौद्योगिकी क्रांति की अगली लहर का नेतृत्व करने के लिए तैयार है।

रूस में WhatsApp पर ‘डिजिटल स्ट्राइक’: 10 करोड़ यूजर्स को ब्लॉक करने की तैयारी, सरकारी ऐप ‘MAX’ पर शिफ्ट करने का दबाव

इंटरनेशनल डेस्क : अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव और यूक्रेन के साथ जारी युद्ध के बीच रूस ने WhatsApp को पूरी तरह से ब्लॉक करने की कोशिश की है। रूस की इस ‘डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक’ का मुख्य उद्देश्य देश के लगभग 10 करोड़ (100 मिलियन) यूजर्स को सुरक्षित निजी बातचीत से अलग कर उन्हें सरकारी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट करना है।

WhatsApp ने जताई कड़ी आपत्ति: WhatsApp ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट के जरिए इस जानकारी की पुष्टि की है। कंपनी का कहना है कि रूस सरकार लोगों को सरकारी सर्विलांस ऐप की तरफ धकेलने के लिए यह कदम उठा रही है। WhatsApp के प्रवक्ता के अनुसार, 10 करोड़ से ज्यादा लोगों को सुरक्षित संचार से अलग करना एक “पिछड़ा कदम” है, जिससे रूस में लोगों की सुरक्षा कम होगी। कंपनी ने स्पष्ट किया कि रूस सरकार इंटरनेट स्पेस पर ज्यादा नियंत्रण चाहती है।

सरकारी ऐप ‘MAX’ पर गहराया विवाद: रूस में ‘MAX’ नामक सरकारी समर्थित प्रतियोगी ऐप को प्रमोट किया जा रहा है। हालांकि, आलोचकों का दावा है कि इस ऐप का इस्तेमाल यूजर्स को ट्रैक करने और उनकी निगरानी (सर्विलांस) के लिए किया जा सकता है। दूसरी ओर, रूस की सरकारी मीडिया ने इन निगरानी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

विदेशी टेक कंपनियों से बढ़ता विवाद: फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से ही विदेशी टेक प्रोवाइडर्स और मॉस्को के बीच विवाद गहरा गया है। पिछले साल भी मेटा (Meta) ने रूसी अधिकारियों पर आरोप लगाए थे कि वे नागरिकों से उनकी निजी बातचीत का अधिकार छीनने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल, रूस सरकार अपने देश में बने प्लेटफॉर्म्स को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम कर रही है।

सरकार का बड़ा एक्शन: 3 घंटे में हटाना होगा Deepfake और AI कंटेंट, सोशल मीडिया के लिए जारी हुए नए नियम

नेशनल डेस्क : भारत सरकार ने डीपफेक (Deepfake) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार भ्रामक सामग्री पर नकेल कसने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 (IT Rules, 2021) में महत्वपूर्ण संशोधन अधिसूचित किए हैं। नए नियमों के अनुसार, सोशल मीडिया कंपनियों को अब सरकारी या अदालती आदेश मिलने के मात्र 3 घंटे के भीतर विवादित एआई कंटेंट को अपने प्लेटफॉर्म से हटाना होगा।

नियमों के मुख्य प्रावधान:

  • समय सीमा में बड़ी कटौती: पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के पास ऐसे आदेशों पर कार्रवाई करने के लिए 36 घंटे का समय होता था, जिसे अब घटाकर मात्र 3 घंटे कर दिया गया है।
  • अनिवार्य लेबलिंग: एआई द्वारा तैयार की गई सामग्री के लिए स्पष्ट और प्रमुख लेबलिंग अनिवार्य कर दी गई है। जहाँ तकनीकी रूप से संभव हो, इसे स्थायी मेटाडेटा या पहचानकर्ताओं के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
  • लेबल हटाने पर रोक: एक बार एआई लेबल लग जाने के बाद, प्लेटफॉर्म्स को उसे छिपाने या हटाने की अनुमति नहीं होगी।
  • लागू होने की तिथि: ये संशोधित नियम 20 फरवरी, 2026 से प्रभावी होंगे।

किसे मिलेगी छूट? इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अनुसार, सामान्य एडिटिंग (संशोधन), सामग्री को बेहतर बनाने और नेक नीयत से किए गए शैक्षिक या डिजाइन कार्यों को फिलहाल इन सख्त नियमों के दायरे से बाहर रखा गया है।

शिकायत निवारण: नए नियमों के तहत यूजर्स की शिकायतों के निपटारे की समय सीमा को भी कम कर दिया गया है, ताकि भ्रामक सूचनाओं के प्रसार को तुरंत रोका जा सके। एआई कंटेंट को अब सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत अन्य सूचनाओं के समान ही माना जाएगा और गैरकानूनी कार्यों के लिए जवाबदेही तय की जाएगी।


आईवीएफ परीक्षण के जरिए बच्चे के लंबे या होशियार होने के पूर्वानुमान जैसे सपने बेचे जा रहे हैं
(एलेक्स पॉलिआकोव, मेलबर्न यूनिवर्सिटी)
मेलबर्न, 10 फरवरी (द कन्वरसेशन) अपनी होने वाली संतान को लेकर संभावित माता-पिता पहले ही रोमांचित रहते हैं। अब उन्हें ऐसी आनुवंशिक जांचों के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाता है, जिनमें आईवीएफ के जरिए तैयार किये गए भ्रूण की विशेषताएं बताने का दावा किया जाता है जैसे कौन सा बच्चा सबसे लंबा, सबसे बुद्धिमान या सबसे स्वस्थ बनेगा।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ये जांच अपने वादों को पूरा नहीं कर सकतीं। इनके लाभ बेहद सीमित हैं, जबकि मरीजों, बच्चों और समाज के लिए इससे जुड़े जोखिम वास्तविक और गंभीर हैं। विशेषज्ञों की राय है कि माता-पिता को अपने भावी बच्चों से जुड़े अहम फैसले लेते समय भ्रामक प्रचार नहीं, बल्कि सटीक जानकारी मिलनी चाहिए।
फिलहाल आईवीएफ के जरिए विकसित भ्रूणों की जांच कुछ आनुवंशिक बीमारियों से बचाव के लिए की जाती है, जो आमतौर पर एकल जीन से जुड़ी होती हैं, जैसे सिस्टिक फाइब्रोसिस। लेकिन हाल के वर्षों में सामने आई यह नई जांच हजारों जीनों के संयुक्त प्रभाव से जुड़े जटिल गुणों का अनुमान लगाने का दावा करती है।
 नई तकनीक में भ्रूणों के लिए तथाकथित ‘पॉलीजेनिक रिस्क स्कोर’ तैयार किए जाते हैं, जिनके आधार पर हृदय रोग, अल्ज़ाइमर जैसी बीमारियों या बुद्धिमत्ता और कद जैसे गुणों का पूर्वानुमान लगाया जाता है।
ऑस्ट्रेलिया में ऐसी जांच उपलब्ध नहीं है, लेकिन अमेरिका की कई कंपनियां यह सुविधा दे रही हैं। कुछ कंपनियां भ्रूणों की हजारों विशेषताओं की जांच करने का दावा करती हैं और धुआंधार विज्ञापन के जरिए माता-पिता को आकर्षित कर रही हैं।
विशेषज्ञों के एक समूह ने इस तकनीक का मूल्यांकन किया और पाया कि इन जांचों से मिलने वाले पूर्वानुमान बेहद अनिश्चित हैं। गणितीय विश्लेषण के अनुसार, इससे होने वाला संभावित लाभ नगण्य है, जैसे आईक्यू में कुछ अंकों की बढ़ोतरी या कद में एक से तीन सेंटीमीटर का अंतर। इसके अलावा, देर से सामने आने वाली बीमारियों के बारे में वास्तविक लाभ का आकलन करना फिलहाल संभव नहीं है, क्योंकि उनके परिणाम दशकों बाद सामने आएंगे।
शोधकर्ताओं ने कहा कि पॉलीजेनिक रिस्क स्कोर उन लोगों के आंकड़ों पर आधारित हैं, जो आज 50-60 वर्ष की उम्र में हैं और जिन्होंने पूरी तरह अलग सामाजिक, पर्यावरणीय और जीवनशैली स्थितियों में जीवन बिताया है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के गुण और बीमारियां जीन और पर्यावरण के आजीवन पारस्परिक प्रभाव का नतीजा होती हैं, जिसे केवल आनुवंशिक जांच से नहीं समझा जा सकता।
विशेषज्ञों ने उदाहरण देते हुए कहा कि बच्चे की बुद्धिमत्ता पर शुरुआती शिक्षा, पोषण, पारिवारिक सहयोग और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का गहरा असर पड़ता है। केवल आनुवंशिक स्कोर के आधार पर भविष्य की बुद्धिमत्ता तय करना व्यावहारिक नहीं है।
शोध में यह भी चेतावनी दी गई कि एक ही जीन कई गुणों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में किसी एक सकारात्मक गुण के चयन से अनजाने में किसी अन्य बीमारी का जोखिम बढ़ सकता है।
ऑस्ट्रेलिया में मौजूदा दिशा-निर्देश गंभीर आनुवंशिक बीमारियों से बचाव के लिए भ्रूण जांच की अनुमति देते हैं, लेकिन पॉलीजेनिक रिस्क स्कोर भविष्य के संभावित जोखिमों का अनुमान मात्र हैं, न कि चिकित्सीय निदान। ऐसे में इनका उपयोग नियामकीय अस्पष्टता के दायरे में आता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि इस तकनीक से जुड़े नैतिक सवाल भी गंभीर हैं और यह सामाजिक असमानताओं और भेदभाव को बढ़ावा दे सकती है। उन्होंने चेताया कि केवल इन जांचों के लिए आईवीएफ कराना, बिना चिकित्सकीय आवश्यकता के, स्वस्थ बच्चे की संभावना को भी कम कर सकता है, क्योंकि आईवीएफ प्रक्रिया स्वयं कुछ जोखिमों से जुड़ी होती है।
उनका कहना है कि ‘‘सबसे अच्छा’’ बच्चा वह नहीं होता जिसका आनुवंशिक स्कोर सबसे ऊंचा हो, बल्कि वह होता है जो प्यार, अच्छे पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं वाले माहौल में जन्म लेता है।
21 साल का हुआ Google Maps: डूबते स्टार्टअप से ऐसे बनी 1 लाख करोड़ की कंपनी, नेविगेशन की दुनिया में मचाया तहलका

टेक डेस्क : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में रास्ता खोजने के लिए हम सभी जिस Google Maps पर निर्भर हैं, वह अपनी स्थापना के 21 साल पूरे कर चुका है। एक समय जो केवल एक असफल स्टार्टअप था, वह आज दुनिया का सबसे बड़ा नेविगेशन प्लेटफॉर्म बन चुका है।

ऑस्ट्रेलियाई भाइयों की देन:गूगल मैप्स की शुरुआत गूगल ने नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया की एक स्टार्टअप कंपनी ‘Where2’ ने की थी। इसे लार्स (Lars) और जेन्स रासमुसेन (Jens Rasmussen) नाम के दो भाइयों ने शुरू किया था। उस समय के स्थिर नक्शों के बजाय उन्होंने ‘इंटरएक्टिव और ड्रैग करने योग्य’ नक्शों का विचार दिया था। जब फंडिंग रुकने के कारण कंपनी संकट में आई, तब लैरी पेज की नजर इस टेक्नोलॉजी पर पड़ी और गूगल ने इसे खरीदकर ब्राउजर आधारित प्लेटफॉर्म में बदल दिया।

सफलता का सफर:2005 में लॉन्च: लॉन्च से ठीक एक दिन पहले गूगल मैप्स लीक हो गया था, लेकिन इसके स्मूथ और ड्रैग होने वाले डिजिटल नक्शों ने पहली बार में ही दुनिया को चौंका दिया।नंबर 1 प्लेटफॉर्म: 2006 तक यह दुनिया का सबसे बड़ा मैप प्रोवाइडर बन गया। बाद में इसमें सैटेलाइट इमेजरी, रियल टाइम ट्रैफिक, GPS नेविगेशन और AI आधारित रूट ऑप्टिमाइजेशन जैसे फीचर्स जोड़े गए, जिसने इसे रोजमर्रा की जरूरत बना दिया।

कमाई का बड़ा जरिया:गूगल मैप्स अब अपनी मूल कंपनी अल्फाबेट (Alphabet) के लिए कमाई का एक बड़ा इंजन है। 2023 तक इसका रेवेन्यू **11 अरब डॉलर (लगभग 1 लाख करोड़ रुपये)** से ज्यादा हो गया है। इसकी कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा **विज्ञापनों (Ads), प्रमोटेड पिन्स और डेवलपर्स द्वारा उपयोग किए जाने वाले API की फीस से आता है।

मुकाबला और भविष्य:आज बाजार में Apple Maps, Waze और भारत के MapmyIndia जैसे कई प्रतियोगी इसे चुनौती दे रहे हैं। इसके बावजूद, अपनी बेहतरीन टेक्नोलॉजी और विशाल डेटा स्केल के कारण गूगल मैप्स आज भी इंडस्ट्री का सबसे मजबूत खिलाड़ी बना हुआ है।

गूगल पे और फोनपे यूजर्स के लिए बड़ी खबर! UPI के नए नियम: फरवरी से बदल जाएगा पेमेंट का तरीका

नेशनल डेस्क : अगर आप भी रोजमर्रा के लेन-देन के लिए गूगल पे (Google Pay), फोनपे (PhonePe) या पेटीएम (Paytm) का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। फरवरी 2026 से यूपीआई पेमेंट सिस्टम में कई बड़े बदलाव लागू किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य ट्रांजैक्शन को पहले से अधिक तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है।

10 सेकंड में पूरा होगा ट्रांजैक्शन: नए नियमों के तहत अब किसी भी यूपीआई ट्रांजैक्शन को अधिकतम 10 सेकंड के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा। पहले इसके लिए 30 सेकंड की समय सीमा थी, जिसकी वजह से अक्सर पेमेंट अटक जाते थे। अब डिजिटल पुल (API) के रिस्पॉन्स टाइम को तेज किया गया है ताकि पीक टाइम में भी पेमेंट सुचारू रूप से हो सके।

सुरक्षा और यूजर कंट्रोल पर जोर: डिजिटल धोखाधड़ी को रोकने के लिए सुरक्षा की नई परतें जोड़ी गई हैं:अतिरिक्त वेरिफिकेशन: बड़े अमाउंट के ट्रांजैक्शन के लिए अब एक्स्ट्रा वेरिफिकेशन स्टेप्स पूरे करने होंगे।

स्पष्ट कन्फर्मेशन: पैसे भेजने से पहले स्क्रीन पर साफ कन्फर्मेशन दिखेगा ताकि गलती से ट्रांजैक्शन न हो।सब्सक्रिप्शन कंट्रोल: अब ऑटो-डेबिट और मंथली सब्सक्रिप्शन को मैनेज या कैंसिल करना पहले से कहीं आसान होगा।

फ्रॉड पर लगाम और तेज रिफंड: जो यूपीआई आईडी लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हुई हैं, उन्हें फ्रॉड के खतरे को कम करने के लिए अस्थायी रूप से सीमित कर दिया जाएगा और उन्हें दोबारा शुरू करने के लिए री-वेरिफिकेशन जरूरी होगा।

इसके अलावा, अगर कोई ट्रांजैक्शन फेल होता है, तो उसका समाधान अब तेजी से किया जाएगा और ग्राहकों को रिफंड कुछ ही घंटों में मिल सकेगा। साथ ही, बार-बार आने वाली स्पैम ‘कलेक्ट रिक्वेस्ट’ (पैसे मांगने वाले नोटिफिकेशन) पर भी सीमा तय की गई है।